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कोयंबटूर में खराब सड़कों और ट्रांसपोर्ट की कमी के कारण आदिवासी बच्चे स्कूल छोड़ने को मजबूर

गाँवों तक जाने वाले आसान रास्ते के बीच में एक सूखी नदी की धारा पड़ती है और सड़क अधूरी रह गई है. इस वजह से इस इलाके में सार्वजनिक परिवहन नहीं पहुँच पाता है.

तमिलनाडु के कोयंबटूर जिले के पश्चिमी घाट की तलहटी में मदुक्कराई ब्लॉक (Madukkarai Block) में स्थित मुरुगनपति और अय्यनपति, इरुला आदिवासी समुदाय (Irula tribal) की दो बस्तियां हैं. जहां करीब 100 परिवार रहते हैं.

लेकिन बुनियादी सड़क और ट्रांसपोर्ट सुविधाओं के अभाव में इन बस्तियों को संघर्ष करना पड़ रहा है. इन बस्तियों के बच्चे शिक्षा जारी नहीं रख पा रहे हैं और कई बच्चे स्कूल छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं.  

गांवों तक जाने वाले आसान रास्ते के बीच एक सूखी नदी की धारा पड़ती है और सड़क का काम अधूरा पड़ा है. इस वजह से पब्लिक ट्रांसपोर्ट गांवों तक नहीं पहुंच पाता है.

मुरुगनपति (Muruganpathi) में एक सरकारी प्राइमरी स्कूल है जिसमें 20 से ज़्यादा बच्चे पढ़ते हैं. लेकिन पांचवीं कक्षा के बाद छात्रों को मिडिल स्कूल के लिए करीब 3 किलोमीटर दूर नवाक्कराई जाना पड़ता है और बड़े छात्रों को हाई स्कूल के लिए करीब 5 किलोमीटर दूर मावुथांपति जाना पड़ता है.

ऐसे में सड़कों और पब्लिक ट्रांसपोर्ट की कमी के कारण कई बच्चे अपनी पढ़ाई जारी नहीं रख पाते हैं.

ग्रामीणों के मुताबिक कुछ बच्चों ने स्कूल छोड़ दिया है और खेती-बाड़ी में मज़दूरी करने लगे हैं.

मुरुगनपति मावुथांपति ग्राम पंचायत के अंतर्गत आता है और अय्यनपति नवाक्कराई टाउन पंचायत के अंतर्गत आता है. ये गांव एट्टीमदाई के रास्ते जुड़े हुए हैं लेकिन उस रास्ते से दूरी और यात्रा का समय दोनों दोगुना हो जाता है.

स्थानीय निवासी मौजूदा छोटे रास्ते पर सड़क बनाने की मांग कर रहे हैं जो मुरुगनपति को सीधे मावुथांपति और सलेम-कोच्चि नेशनल हाईवे से जोड़ता है.

एक ग्रामीण ने कहा, “सिर्फ़ जिनके पास दोपहिया वाहन हैं, वे ही अपने बच्चों को स्कूल ले जा सकते हैं. अगर सड़क ठीक हो जाए और बस सेवा शुरू हो जाए तो यहां के बच्चे आसानी से स्कूल जा सकेंगे. इस इलाके में जंगली जानवरों, खासकर हाथियों के आने-जाने का खतरा रहता है. इन खतरों के बीच हमें पैदल चलना पड़ता है. अब हम ऑटो-रिक्शा पर निर्भर रहने को मजबूर हैं और अपनी पूरी कमाई ट्रांसपोर्ट पर खर्च कर देते हैं. इसीलिए बच्चों का स्कूल छोड़ना तय है.”

माता-पिता ने कहा कि उन्हें बच्चों को पैदल स्कूल भेजने में डर लगता है.

उन्होंने आरोप लगाया कि इमरजेंसी के समय एम्बुलेंस भी गांवों तक नहीं पहुंच पाती और बारिश के मौसम में स्थिति और खराब हो जाती है.

पंचायत सूत्रों के अनुसार, 2021 में हाईवे विभाग ने 4.7 करोड़ रुपये की सड़क परियोजना तैयार की थी लेकिन कम आबादी का हवाला देते हुए इसे रद्द कर दिया गया. उन्होंने राज्य हाईवे विभाग से इस परियोजना को फिर से शुरू करने का आग्रह किया है.

स्थानीय संगठन के एक सूत्र ने बताया, “हमने एट्टीमदाई रूट से बस सेवा की भी मांग की थी. हमने जुलाई में मंत्री के. विग्नेश के दौरे के दौरान सड़क कनेक्टिविटी और बस सुविधा के लिए अपनी मांगें रखी थीं और उन्होंने सड़क के लिए तुरंत अस्थायी उपाय करने का भरोसा दिया था. गांव ने आपातकालीन स्थिति के लिए ‘महालिर थिट्टम’ योजना के तहत एक चार-पहिया वाहन भी उपलब्ध कराया है.”

ग्रामीणों ने बताया कि सड़क निर्माण में दो प्रमुख बाधाएं हैं – एक सूखी नदी की धारा और दो रेलवे क्रॉसिंग. मुरुगनपथी जाने का रास्ता रेलवे ट्रैक के नीचे से और कुछ मीटर तक नदी की धारा के ऊपर से होकर गुजरता है, जिससे यह इस्तेमाल के लायक नहीं रह जाता.

ग्रामीण विकास और पंचायत राज विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि इन मुद्दों पर गौर किया जाएगा और भरोसा दिलाया कि इन्हें जल्द से जल्द हल करने के लिए कदम उठाए जाएंगे.

कदंबुर हिल्स में आदिवासी बस्ती के लोग बस सेवा की मांग कर रहे

वहीं कोयंबटूर जिले के ही कदंबुर हिल्स में एक आदिवासी बस्ती के लोगों ने ज़िला प्रशासन से अपने गाँव के लिए बस सेवा शुरू करने की मांग की है. उन्होंने जंगल वाले इलाके से आने-जाने में स्कूल और कॉलेज के छात्रों, गर्भवती महिलाओं और बुज़ुर्गों को होने वाली दिक्कतों का ज़िक्र किया.

सोमवार को ज़िला प्रशासन को सौंपी गई अपनी अर्ज़ी में, करलायम के पास स्थित नागलुर के निवासियों ने बताया कि लगभग 145 परिवार पिछले 83 सालों से इस बस्ती में रह रहे हैं.

इलाके में सरकारी आदिवासी कल्याण आवासीय मिडिल स्कूल है, जिसमें लगभग 51 छात्र पढ़ते हैं.

निवासियों ने बताया कि मुख्य सड़क तक पहुँचने के लिए उन्हें जंगल वाले इलाके से होकर लगभग 1.2 किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है. उन्होंने कहा कि इस रास्ते पर अक्सर हाथी आते-जाते रहते हैं, जिससे आना-जाना बहुत मुश्किल और असुरक्षित हो जाता है.

बस सेवा न होने के कारण, बच्चों, छात्रों, गर्भवती महिलाओं और बुज़ुर्गों समेत सभी निवासियों को पब्लिक ट्रांसपोर्ट और दूसरी ज़रूरी सुविधाओं तक पहुँचने के लिए यह दूरी पैदल तय करनी पड़ती है.

उन्होंने ज़िला प्रशासन से अपील की कि कनेक्टिविटी बेहतर करने और निवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सुबह और शाम बस सेवा शुरू की जाए.

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