बुधवार को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड इलाके में केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना (Ken-Betwa River Link Project) का विरोध कर रहे आदिवासी निवासियों का समर्थन किया.
उन्होंने कहा कि कांग्रेस उनके साथ है और मुआवज़े व पुनर्वास की उनकी मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बनाने के लिए वे विरोध स्थल का दौरा करेंगे.
कांग्रेस नेता राहुल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक वीडियो शेयर किया जिसमें परियोजना से प्रभावित आदिवासी निवासियों की बातें थीं.
उन्होंने कहा, “केन-बेतवा परियोजना के खिलाफ सत्याग्रह कर रहे आदिवासी भाई-बहनों की समस्याएं, मांगें, संघर्ष और निजी परेशानियां – उन्हीं की ज़ुबानी. बुंदेलखंड के ये निवासी सालों से सिर्फ़ अपने अधिकारों के लिए अन्याय और उत्पीड़न सह रहे हैं; वे सम्मान और समर्थन के हकदार हैं.”
उन्होंने कहा, “हमारे आदिवासी भाई-बहनों की इस लड़ाई में मैं और कांग्रेस उनके साथ हैं.”
वीडियो में एक आदिवासी प्रतिनिधि ने दावा किया कि इस परियोजना से आदिवासी बहुल 21 गांव प्रभावित होंगे और करीब 46 लाख पेड़ कट जाएंगे, साथ ही पन्ना टाइगर रिज़र्व पर भी असर पड़ेगा.
प्रतिनिधि ने यह भी दावा किया कि करीब 7 हज़ार परिवारों की करीब 11 हज़ार 500 एकड़ ज़मीन प्रभावित होगी.
उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं का प्रभाव काफी व्यापक है, जिसमें लगभग 50,000 लोगों की आबादी है जो सरकार की गलत नियम, नीति और नीयत के कारण अपने घरों से बेघर हो गई. उन्होंने अपने घर, जल, जंगल, जमीन और आजीविका खो दी है.
वहां के लोगों ने राहुल से गुज़ारिश की कि वे संसद में प्रशासन द्वारा कथित तौर पर परेशान किए जाने के मुद्दे को उठाएं और उनके आंदोलन में शामिल हों.
राहुल गांधी से मिलने पहुंची आदिवासी महिलाओं ने न्याय की गुहार लगाते हुए कहा कि बच्चों के लिए जमीन और मकान के लिए जगह दी जाए. उन्होंने बताया कि उनकी जमीन ले ली गई है लेकिन उन्हें कोई वैकल्पिक जमीन नहीं दी गई है. 12.5 लाख रुपये का मुआवजा मिला है जो जमीन खरीदने और मकान बनाने के लिए अपर्याप्त है.
राहुल ने उन्हें भरोसा दिलाया कि वे उस जगह का दौरा करेंगे और सरकार पर दबाव डालेंगे.
आदिवासी लोग इस प्रोजेक्ट के ख़िलाफ़ सत्याग्रह कर रहे हैं. उनकी मांग है कि जिन लोगों की ज़मीन ली जा रही है, उन्हें सही मुआवज़ा और सम्मान के साथ बसाया जाए.
राहुल ने जुलाई में भी इस आंदोलन का समर्थन किया था. विरोध प्रदर्शन की तस्वीरें और एक कविता शेयर करते हुए उन्होंने कहा कि आदिवासी लोग अहिंसक तरीक़े से सही मुआवज़े की मांग कर रहे हैं और उन्होंने आदिवासियों को “देश का असली मालिक” बताया.
तब राहुल गांधी ने कहा था, “मध्य प्रदेश के आदिवासी भाई-बहन जल सत्याग्रह और भूख हड़ताल पर बैठे थे क्योंकि केन-बेतवा प्रोजेक्ट के लिए उनकी ज़मीन ले ली गई थी लेकिन उन्हें न तो सही मुआवज़ा मिला और न ही सम्मान के साथ बसाया गया. ‘सच’ तो यह है कि आदिवासी ही देश के असली मालिक हैं – पानी, जंगल और ज़मीन पर पहला हक़ उन्हीं का है और उनका ‘सत्याग्रह’ इसलिए है क्योंकि आज उनसे वही हक़ छीना जा रहा है.”
उन्होंने आगे कहा, “अपने अनोखे अंदाज़ में उनकी बस यही मांग है: गुज़ारे का सही ज़रिया दिया जाए – वरना ज़िंदगी चिता से अलग नहीं है. लेकिन बीजेपी सरकार को यह भी मंज़ूर नहीं है. उनकी बात सुनने के बजाय, पुलिस बल का इस्तेमाल करके उनके शांतिपूर्ण विरोध को कुचला जा रहा है. हम अपने आदिवासी भाई-बहनों के साथ खड़े हैं. हम उन्हें न्याय दिलाएंगे – मुआवज़ा और पुनर्वास देना ही होगा.”
क्या है केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट
केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट नदियों को जोड़ने की एक बड़ी पहल है, जिसका मकसद मध्य प्रदेश की केन नदी से अतिरिक्त पानी को 221 किलोमीटर लंबी लिंक नहर के ज़रिए बेतवा नदी तक पहुंचाना है.
यह प्रोजेक्ट मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के सूखे की मार झेलने वाले बुंदेलखंड इलाके में लागू किया जा रहा है.
44,605 करोड़ रुपये का यह प्रोजेक्ट ‘नेशनल पर्सपेक्टिव प्लान’ के तहत नदियों को आपस में जोड़ने वाला पहला प्रोजेक्ट है.
सरकार के अनुसार, इससे 10.62 लाख हेक्टेयर ज़मीन की सिंचाई होने, लगभग 62 लाख लोगों को पीने का पानी मिलने और पनबिजली (हाइड्रोपावर) पैदा होने की उम्मीद है.
इस प्रोजेक्ट में पन्ना में केन नदी बेसिन में 77 मीटर ऊंचे दौधन बांध और दो सुरंगों का निर्माण शामिल है.
सरकार का कहना है कि इस प्रोजेक्ट से 10 ज़िलों के 2,000 गांवों में 8.11 लाख हेक्टेयर ज़मीन पर सिंचाई हो सकेगी और लगभग सात लाख किसान परिवारों को फ़ायदा होगा.
इससे मध्य प्रदेश में 44 लाख और उत्तर प्रदेश में 21 लाख लोगों को पीने का पानी मिलने की भी उम्मीद है, साथ ही 103 मेगावाट पनबिजली और 27 मेगावाट सौर ऊर्जा का उत्पादन भी होगा.
हालांकि, 22 गांवों (10 पूरी तरह डूब क्षेत्र) के 7,000 परिवार विस्थापन, फर्जी लाभार्थियों और सहमति प्रक्रिया पर विरोध कर रहे हैं.
ग्रामीणों की मांग प्रत्येक वयस्क को अलग लाभार्थी मानने, जमीन के बदले जमीन, गांव के बदले गांव और जबरन बेदखली रोकने की है.
(Photo credit: PTI)

