मध्य-प्रदेश में केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना (Ken-Betwa river linking project) से प्रभावित होने वाले कई गांवों (जिनमें ज़्यादातर आदिवासी हैं) के लोगों ने बेहतर मुआवज़े और पुनर्वास की अपनी मांगों को लेकर छतरपुर ज़िले में अपना आंदोलन फिर से शुरू कर दिया है.
अधिकारियों के साथ बातचीत बेनतीजा रहने के बाद उन्होंने यह कदम उठाया है.
कई प्रदर्शनकारियों, जिनमें ज़्यादातर महिलाएं हैं, उन्होंने कुपी गांव के पास बराना नदी के किनारे गले में फांसी का फंदा डालकर एक सांकेतिक विरोध शुरू किया है. ये प्रदर्शन पांचवें दिन में पहुंच गया है.
इससे पहले अप्रैल महीने में प्रदर्शनकारियों ने पानी के ऊपर सांकेतिक चिताओं पर लेटकर कई दिनों तक विरोध प्रदर्शन किया था, जिसने राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित किया था.
छतरपुर और पन्ना जिलों के अधिकारियों के साथ बातचीत के कारण विरोध प्रदर्शन को रोक दिया गया था.
अब एक बार फिर प्रदर्शनकारियों ने अपर्याप्त पुनर्वास पैकेज का आरोप लगाया है और कई ग्रामीणों को केन-बेतवा परियोजना और मझगांव व रुंज सिंचाई परियोजनाओं की पुनर्वास योजना से बाहर भी छोड़ दिया गया है.
उन्होंने मांग की है कि उनके पुनर्वास पैकेज को 12.5 लाख रुपये से बढ़ाकर 25 लाख किया जाए.
इसके अलावा प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने विरोध स्थल पर पीने के पानी की सप्लाई रोक दी है, जिससे महिलाओं, बच्चों और बुज़ुर्गों को नदी का गंदा पानी पीने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है.
उन्होंने दावा किया कि पानी पीने के बाद कई लोग बीमार पड़ गए हैं.
उन्होंने अधिकारियों पर उनकी शिकायतों का समाधान करने के बजाय उन्हें डराने-धमकाने की कोशिश करने का भी आरोप लगाया.
हालांकि, छतरपुर कलेक्टर पार्थ जायसवाल ने ‘द हिंदू’ को बताया कि विरोध कर रहे लोगों पर “केन-बेतवा परियोजना का कोई असर नहीं पड़ रहा है.”
उन्होंने कहा, “अभी करीब 100 लोग विरोध कर रहे हैं और वे सभी पन्ना से हैं. उनमें से किसी पर भी केन-बेतवा का असर नहीं है बल्कि अन्य दो सिंचाई परियोजनाओं का असर है. वे मांग कर रहे हैं कि उनका पुनर्वास पैकेज केन-बेतवा जैसा होना चाहिए. हमने उनसे बात करने के लिए दोनों जिलों के अधिकारियों की टीमें भेजी हैं.”
जायसवाल ने कहा कि अप्रैल के विरोध प्रदर्शन के बाद एक नया सर्वेक्षण किया गया और मझगांव और रुंज परियोजनाओं की पुनर्वास योजना में लगभग 750 परिवारों को जोड़ा गया.
उन्होंने कहा, “राज्य कैबिनेट ने इस हफ्ते (मझगांव और रुंज परियोजनाओं के लिए) पुनर्वास पैकेज की राशि को करीब 300 करोड़ बढ़ाने का प्रस्ताव भी पारित किया है. उनका मुआवजा 5 लाख से बढ़ाकर 12.5 लाख कर दिया गया है. हमने उन्हें इन उपायों के बारे में बता दिया है और प्रदर्शनकारियों से पन्ना प्रशासन के सामने अपनी बात रखने को कह रहे हैं.”
जायसवाल ने यह भी कहा कि ग्रामीणों को कुछ स्थानीय कार्यकर्ताओं द्वारा गुमराह किया जा रहा है जो विरोध प्रदर्शन के लिए केन-बेतवा परियोजना स्थल का उपयोग कर रहे हैं.
उन्होंने कहा, “अभी जो मांगें उठाई जा रही हैं, वे जायज़ नहीं हैं.”
इस बीच, पूर्व कैबिनेट मंत्री और पन्ना के विधायक बृजेंद्र प्रताप सिंह ने मीडिया को बताया कि राज्य सरकार ने मझगवां, रुंज और केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट्स की वजह से विस्थापित हुए परिवारों के लिए एक खास पुनर्वास पैकेज को मंज़ूरी दी है.
इस पैकेज के तहत, पात्र परिवारों को 12.5 लाख रुपये तक की एकमुश्त पुनर्वास सहायता राशि मिलेगी।
लेकिन उफनती नदी में कमर तक पानी में खड़े प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जातीं, वे अपना आंदोलन वापस नहीं लेंगे.
‘जय किसान संगठन’ के बैनर तले हो रहे इस विरोध-प्रदर्शन के साथ-साथ अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल और सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर के नेतृत्व में ‘मिट्टी सत्याग्रह’ भी किया जा रहा है.
केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 दिसंबर, 2024 को केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट (KBLP) की शुरुआत की थी.
यह ‘नेशनल पर्सपेक्टिव प्लान’ (NPP) के तहत 30 ऐसी लिंक परियोजनाओं में से पहली है, जिसका मकसद जल संसाधनों का विकास करना और ‘अतिरिक्त पानी’ वाली नदियों को ‘पानी की कमी’ वाली नदियों से जोड़ना है.
KBLP का प्लान बुंदेलखंड इलाके में केन नदी बेसिन से अतिरिक्त पानी को बेतवा नदी बेसिन में पहुंचाना है; बुंदेलखंड का यह इलाका मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में फैला है.
हालांकि, छतरपुर और पन्ना जिलों के कई गांवों के लोग विस्थापन के डर से लंबे समय से इस प्रोजेक्ट का विरोध कर रहे हैं और बेहतर पुनर्वास व मुआवजे की मांग कर रहे हैं.
कई पर्यावरणविदों ने, जिनमें पूर्व केंद्रीय पर्यावरण मंत्री और कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश भी शामिल हैं, उन्होंने पर्यावरण, स्थानीय इकोलॉजी और वन्यजीवों पर इसके संभावित असर को लेकर चिंता जताई है क्योंकि इस प्रोजेक्ट का एक बड़ा हिस्सा पन्ना नेशनल पार्क और टाइगर रिजर्व के अंदर आता है.
(Photo credit: ANI Video Grab)

