वन अधिकारियों की गोलियों का शिकार हुए आदिवासी की जान की कीमत 20 लाख रुपए

डिप्टी रेंजर निर्मल सिंह सहित कुछ दूसरे वन अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है और उनके खिलाफ़ हत्या का मामला दर्ज किया गया है.

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मध्य प्रदेश में एक आदिवासी आदमी की मौत हो गई जब वन अधिकारियों ने उस पर गोली चलाई. मामला राज्य के विदिशा का है, जहां वन अधिकारी कथित तौर पर जंगल से लकड़ी की तस्करी को रोकने की कोशिश कर रहे थे. घटना में तीन लोग घायल भी हुए हैं.

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक समीर यादव के मुताबिक आदिवासी चैन सिंह की मौत हो गई, जबकि महेंद्र सिंह, भगवान सिंह और एक तीसरा अज्ञात व्यक्ति घायल हो गए. उन्होंने यह भी बताया कि डिप्टी रेंजर निर्मल सिंह सहित कुछ दूसरे वन अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है और उनके खिलाफ़ हत्या का मामला दर्ज किया गया है. इलाके में तनाव की स्थिति है, इसलिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया है.

वन अधिकारियों का दावा है कि जंगल से लकड़ी लेने आए लोगों ने उन पर पथराव किया, जिसके जवाब में उन्होंने गोलियां चलाईं.

संभागीय वनाधिकारी राजवीर सिंह ने कहा कि मंगलवार की रात जब उन्हें गुना से लकड़ी तस्करों की मौजूदगी की सूचना मिली तो एक टीम को खड्यापुरा जंगल में भेजा गया.

सिंह ने बताया कि एक टीम मौके पर पहुंची और देखा कि करीब सात से आठ लोग लकड़ी के साथ हैं. उन्हें गिरफ्तार करने के लिए इलाके की घेराबंदी की गई लेकिन उन लोगों ने पथराव शुरू कर दिया. उनका दावा है कि वन अधिकारियों ने आत्मरक्षा में गोली चलाई.

उन्होंने कहा, “एक व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि तीन अन्य घायल हो गए.”

राज्य के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने बताया कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं और गोलीबारी में मारे गए और घायल हुए सभी लोगों के परिवारों के लिए वित्तीय सहायता की घोषणा की गई है. मृतक के परिजनों को 20 लाख रुपए और एक नौकरी दी जाएगी, और प्रत्येक घायल को 5 लाख रुपए दिए जाएंगे.

विपक्षी कांग्रेस नेता कमलनाथ ने सरकार पर निशाना साधा और मुख्यमंत्री से आदिवासी समुदाय से माफी मांगने को कहा. उन्होंने कहा कि जब देश आजादी के 75 साल की जयंती मना रहा है, तब भी सरकार आदिवासियों के उत्पीड़न के अपने अभियान से पीछे नहीं हट रही है.

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