तमिल नाडु: कुरुमलई पहाड़ी के आदिवासी निवासियों को पक्की सड़क का तोहफा

वेल्लोर के कलेक्टर पी कुमारवेल पांडियन और आनैकट्ट विधायक एपी नंदकुमार जवाधु हिल्स की इन आदिवासी बस्तियों में बुनियादी ढांचे के काम की करीब से निगरानी कर रहे हैं.

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तमिल नाडु के वेल्लोर ज़िले के आनैकट्ट के पास कुरुमलई पहाड़ी पर रहने वाले आदिवासियों के लिए एक अच्छी खबर है. अब यहां की आदिवासी बस्तियों के निवासी आसानी से तलहटी पर वेल्लोर तक पहुंच सकते हैं क्योंकि ग्रामीण विकास विभाग एक टार की सड़क बना रहा है.

तिरुवन्नामलई की सीमा से लगे जवाधु हिल्स का हिस्सा रही इन पहाड़ियों में 68 आदिवासी बस्तियाँ हैं जो आनैकट्ट तालुक के तहत आती हैं. हर पहाड़ी पर लगभग पाँच बस्तियाँ हैं, जिनमें से हर एक में लगभग 400 परिवार रहते हैं.

“फिलहाल सिर्फ बाइक पर ही पथरीले रास्तों से होते हुए तलहटी तक पहुंचा जा सकता है. इन पहाड़ियों में से एक पर टार की सड़क से हमें यात्रा करने में आसानी होगी, खासतौर से आपात स्थिति में,” कुरुमालाई ग्राम पंचायत के अध्यक्ष एस अन्नामलई ने एक अखबार को बताया.

इन आदिवासी गांवों में से अधिकांश में सिर्फ एक ग्राम स्वास्थ्य नर्स (Village Health Nurse), एक सरकारी स्कूल, एक सामुदायिक टेलीविजन और एक सरकारी राशन की दुकान है.

चार से पांच बस्तियों के एक समूह के लिए एक सामुदायिक हॉल होता है जहां टीकाकरण शिविर और दूसरे सरकारी कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं.

नियमित बस सेवाओं और परिवहन के दूसरे साधनों के अभाव में, आदिवासियों, खासकर महिलाओं और छात्रों, को वेल्लोर के साप्ताहिक बाजार में काम और स्कूलों तक जाने, जरूरी सामान खरीदने और अपने कृषि उत्पाद बेचने के लिए पहाड़ियों से नीचे उतरना पड़ता है. और यह काफी जोखिम भरा काम है.

“सड़क बनाने में COVID-19 महामारी की वजह से देरी हुई. जिस रूट पर शार्प कर्व हों उस पर सिर्फ छोटी बसें ही चलाई जा सकती हैं. काम 15 अप्रैल तक पूरा कर लिया जाएगा,” ग्रामीण विकास विभाग (वेल्लोर क्षेत्र) के एक्जीक्यूटिव इंजीनियर, एम सेंथिल कुमार ने कहा.

वेल्लोर के कलेक्टर पी कुमारवेल पांडियन और आनैकट्ट विधायक एपी नंदकुमार जवाधु हिल्स की इन आदिवासी बस्तियों में बुनियादी ढांचे के काम की करीब से निगरानी कर रहे हैं.

अधिकारियों का कहना है कि कुरुमलई पहाड़ी पर ही टार रोड बिछाई जा रही है, क्योंकि तलहटी से सबसे पास की जगह यही है.

दूसरी पहाड़ियों, जैसे जरता कोल्लई और नचिमेडु, जिनमें ज्यादा संख्या में आदिवासी बस्तियाँ हैं, को आने वाले महीनों में मोटर योग्य सड़कें मिलेंगी.

इन पहाड़ियों की जमीन काफी कठोर और उबड़-खाबड़ है, जिसपर टार की सड़क बनाना मुश्किल हो जाता है.

इसके अलावा इन पहाड़ियों पर काफी शार्प मोड़ हैं. सिर्फ कुरुमलई पहाड़ी की तलहटी से 2.5 किमी की दूरी तक की सड़क पर नौ ऐसे मोड़ हैं.

तमिलनाडु ग्रामीण सड़क सुधार योजना 2019-20 के तहत वन विभाग की मंजूरी के बाद 1.06 करोड़ रुपए की लागत से सड़क का काम लागू किया जा रहा है.

10 फुट के कैरिजवे के अलावा, सड़क के बगल में चार फुट का नाला, क्रैश बैरियर, खतरनाक जगहों पर रिटेनिंग वॉल और स्पीड-ब्रेकर होंगे. जिला प्रशासन के फंड से स्थानीय पंचायत द्वारा स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था भी की जाएगी.

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