जिस आदिवासी युवक को साइकिल चलाना तक नहीं आता, उसपर लगा गाड़ी चोरी का आरोप

पुलिस का दावा है कि अतीकडवु पनिया आदिवासी कॉलोनी के 22 साल के दीपू को चोरी की कार चलाते हुए पकड़ा गया था, अबकी दीपू के रिश्तेदार दावा करते हैं कि उसे साइकिल तक चलाना नहीं आता.

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केरल के वायनाड जिले के मीनांगडी के एक आदिवासी युवक, दीपू को पिछले शुक्रवार सुल्तान बतेरी पुलिस ने गाड़ी चोरी करने के इल्ज़ाम में गिरफ्तार कर लिया. 

उसके रिश्तेदार इस इल्ज़ाम को गलत बता रहे हैं. उनका कहना है की दीपू को गाड़ी चलाना ही नहीं आता.

उधर पुलिस का दावा है कि अतीकडवु पनिया आदिवासी कॉलोनी के 22 साल के दीपू को चोरी की कार चलाते हुए पकड़ा गया था, अबकी दीपू के रिश्तेदार दावा करते हैं कि उसे साइकिल तक चलाना नहीं आता. 

दिहाड़ी मजदूर दीपू के लिए न्याय की मांग करने के लिए मानवाधिकार कार्यकर्ता और रिश्तेदार अब पुलिस के खिलाफ खड़े हो गए हैं. स्थानीय निवासियों ने भी जिला कलेक्टर से इस बारे में शिकायत की है. 

इन सबका यह भी आरोप है कि पुलिस ने दीपू के साथ मारपीट की और उस पर कई दूसरी चोरियों के आरोप भी लगाए. दीपू फिलहाल मनंतावड़ी जिला जेल में बंद है.

सुल्तान बतेरी एसएचओ बेनी के पी ने न्यू इंडियन एक्सप्रेस से कहा, “आरोपी चोरी की कार (KL 05 N 9551) के साथ भागने की कोशिश कर रहा था और 5 नवंबर को शहर में लोगों ने उसे देखा था. उसने कबूल किया है कि उसने 2 किमी के लिए कार चलाई. उसने अपने बयान में दूसरी चोरी के बारे में भी बताया.” 

दीपू की मां लीला का कहना है कि उनका बेटा 3 से 5 नवंबर तक मुतंगा के पास अपनी पत्नी के घर पर था. “5 नवंबर को, वह मीनांगडी आया और दोपहर करीब 2.30 बजे घर से निकला और कहा कि वह किसी काम के लिए सुल्तान बतेरी जा रहा है. रात करीब 10 बजे हमें एक पड़ोसी के जरिए उसकी गिरफ्तारी के बारे में पता चला. जब हम इस बारे में पूछताछ करने थाने गए तो पुलिस ने हमारे सामने ही उसकी पिटाई कर दी. वह चिल्ला रहा था कि वह निर्दोष है. उन्होंने पूरे दिन उसे खाना भी नहीं दिया,” लीला ने कहा.

मानवाधिकार कार्यकर्ता अम्मिणी के ने कहा कि पुलिस ने दावा किया कि उन्होंने दीपू की मां को उसकी गिरफ्तारी के बारे में सूचित किया था, लेकिन यह सच नहीं है.

अम्मिणी का कहना है, “दीपू गाड़ी चलाना नहीं जानता. फिर वे कैसे कह सकते हैं कि उसने कार चलाई और चोरी करने की कोशिश की? परिवार ने पुलिसकर्मियों को दीपू को पीटते देखा. हमें शक है कि उस पर लगाए गए चोरी के दूसरे मामले भी मनगढ़ंत हैं. सच्चाई सामने आने तक हम विरोध करेंगे.” 

आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए, वायनाड के जिला पुलिस प्रमुख अरविंद सुकुमार ने कहा, “पुलिस ने दीपू को चाबी से कार स्टार्ट करते हुए पाया. हमें अभी यह जांचना है कि वह गाड़ी चलाना जानता है या नहीं.”

इसके अलावा पुलिस का दावा है की दीपू की उंगलियों के निशान उस घर से मिले हैं जहां से मोबाइल फोन और झुमके गायब हुए. पुलिस ने दीपू की पिटाई करने से भी इंकार किया है. 

हाल ही में, वन विभाग ने सितंबर में सांड की चोरी के झूठे मामले में मुतंगा के पास कन्ननकोड में कदमकोली कॉलोनी के रहने वाले एक आदिवासी युवक को फंसाने के लिए एक बीट वन अधिकारी को निलंबित कर दिया था.

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