पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी (CM Suvendu Adhikari) ने मंगलवार को राज्य की पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार पर आदिवासियों की अनदेखी करने का आरोप लगाया.
उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने जनजातीय विकास विभाग को आदिवासी बहुल इलाकों के विकास के लिए 350 करोड़ रुपये का विशेष पैकेज तैयार करने का निर्देश दिया है.
बांकुरा जिले के मुकुटमणिपुर में हुल दिवस (Hul Diwas) के मौके पर राज्य के आदिवासी समुदायों से बात करते हुए मुख्यमंत्री शुभेंदु ने कहा, “अमरा चाय अपनारा नीचे नोय, आमदेर पाशे बोसुन (हम चाहते हैं कि आप हमारे बगल में बैठें, नीचे नहीं).”
हुल दिवस ब्रिटिश राज के खिलाफ 1855 के ऐतिहासिक संथाल विद्रोह की याद में मनाया जाता है.
इस दौरान शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि बंगाल सरकार आदिवासी पहचान और अधिकारों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है. यह भरोसा राज्य में यूनिफ़ॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू करने की प्रक्रिया शुरू होने के एक दिन बाद आया है.
उन्होंने कहा, “बंगाल सरकार राज्य के आदिवासी समुदायों और मूल निवासियों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है. हम आपकी भाषा, संस्कृति, पूजा-स्थलों, विकास और सुरक्षा से जुड़े आपके अधिकारों का पूरी तरह से सम्मान और संरक्षण करेंगे.”
शुभेंदु अधिकारी ने आदिवासी समुदायों के लिए कई कल्याणकारी योजनाओं की घोषणा की.
आदिवासी सशक्तिकरण के साथ बीजेपी के जुड़ाव का ज़िक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने संविधान की आठवीं अनुसूची में संथाली भाषा को मान्यता दिलाने और झारखंड राज्य बनाने का श्रेय पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को दिया.
सीएम अधिकारी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के चुनाव का भी ज़िक्र किया और कहा कि यह सबसे ऊंचे संवैधानिक स्तर पर आदिवासियों की भागीदारी सुनिश्चित करने के प्रति बीजेपी की प्रतिबद्धता को दर्शाता है.
उन्होंने कहा, “हम नहीं चाहते कि आप हाशिए पर रहें; हम चाहते हैं कि आप हमारे साथ बराबरी के साझेदार बनकर बैठें. जैसे-जैसे भारत 2047 तक एक विकसित देश बनने की ओर बढ़ रहा है, हम आपको एक नए भारत, एक आधुनिक भारत के निर्माण में हमारे साथ जुड़ने के लिए आमंत्रित करते हैं.”
मुख्यमंत्री ने TMC सरकार पर आदिवासी कल्याण की अनदेखी करने का आरोप लगाया और कहा कि उसने ज़मीन देने से इनकार करके 9 एकलव्य आवासीय स्कूलों की स्थापना को रोक दिया.
उन्होंने राष्ट्रपति मुर्मू का अपमान करने के लिए पिछली सरकार को भी ज़िम्मेदार ठहराया.
पिछली सरकार पर आदिवासियों की अनदेखी का आरोप
मुख्यमंत्री शुभेंदु ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पूर्ववर्ती तृणमूल सरकार पर आदिवासियों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए कहा कि उसने (ममता सरकार) ‘पश्चिमांचल विकास विभाग’ के लिए निधि नहीं दी थी. यह विभाग राज्य के पश्चिमी जिलों में आदिवासी लोगों के कल्याण के लिए बनाया गया था.
शुभेंदु ने कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 में राज्य के पश्चिमी हिस्से में आदिवासी-बहुल जंगलमहल इलाके के 75 ब्लॉक में तत्कालीन तृणमूल सरकार ने अलग-अलग कार्यों के लिए सिर्फ 6 करोड़ रुपये खर्च किए.
उन्होंने कहा, “हमने वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में इस विभाग के लिए 1,200 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं.”
शुभेंदु ने कहा कि जंगलमहल इलाके में बड़े पैमाने पर विकास कार्य किए जाएंगे, जिसमें पश्चिम मेदिनीपुर, झाड़ग्राम, पुरुलिया और बांकुरा जिले शामिल हैं.
उन्होंने कहा, “हम स्वास्थ्य देखभाल और जल आपूर्ति जैसी सुविधाओं को बेहतर बनाएंगे.”
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार क्षेत्र के सर्वांगीण विकास के लिए झारखंड के जमशेदपुर और पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर जैसे औद्योगिक शहरों को जोड़ने वाले 200 किलोमीटर लंबे ग्रीनफील्ड हाईवे का निर्माण कराना चाहती है.
उन्होंने घोषणा की कि मुकुटमणिपुर में आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं से लैस एक अस्पताल बनाया जाएगा.
शुभेंदु ने कहा कि सरकार मुकुटमणिपुर को एक आदर्श पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करेगी.
उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य के लोगों पर अत्याचार करने के मामले में पूर्ववर्ती तृणमूल सरकार ने अंग्रेजों को भी पीछे छोड़ दिया था.
शुभेंदु ने हाल में संपन्न विधानसभा चुनावों में आदिवासी आबादी से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को मिले “भरपूर समर्थन” का जिक्र करते हुए कहा, “हमारे आदिवासी उम्मीदवार अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित सभी 16 निर्वाचन क्षेत्रों और अनारक्षित काशीपुर सीट पर भी जीते.”
अन्नपूर्णा योजना से 5 लाख आदिवासी महिलाओं को लाभ
मुख्यमंत्री ने कहा, “भाजपा सरकार की ओर से पिछली सरकार की ‘लक्ष्मी भंडार’ योजना (जिसके तहत महिलाओं को हर महीने 1,500 रुपये मिलते थे) की जगह शुरू की गई ‘अन्नपूर्णा योजना’ के लिए 1.51 करोड़ महिलाओं ने आवेदन किया है. इनमें से 1.20 करोड़ आवेदनों को मंजूरी दे दी गई है.”
शुभेंदु ने कहा कि सरकार बुधवार को अन्नपूर्णा योजना के तहत इन सभी लाभार्थियों के बैंक खातों में 3,000 रुपये ट्रांसफर करेगी. उन्होंने बताया कि इन लाभार्थियों में पांच लाख आदिवासी महिलाएं शामिल हैं.
आदिवासियों को 125 दिन रोजगार
आदिवासी परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए मुख्यमंत्री ने कई नयी घोषणाएं कीं. उन्होंने कहा कि अब आदिवासी श्रमिकों को 100 दिनों की बजाय 125 दिन रोजगार मिलेगा.
आदिवासी छात्रावासों में रहने वाले विद्यार्थियों का मासिक भत्ता 1800 रुपए से बढ़ाकर 3300 रुपए किया जाएगा.
साथ ही ‘जय जोहार’ योजना के तहत मिलने वाली सहायता राशि में 500 रुपए की वृद्धि की गई है.
आदिवासी लोक कलाकारों को भत्ता देने के साथ पारंपरिक वाद्य यंत्र भी उपलब्ध कराये जायेंगे.
इसके अलावा अधिकारी ने दावा किया कि हज़ारों फ़र्ज़ी अनुसूचित जनजाति प्रमाण-पत्र जारी किए गए थे और चेतावनी दी कि ऐसे प्रमाण-पत्र धोखाधड़ी से हासिल करने वालों और उन्हें जारी करने के लिए ज़िम्मेदार अधिकारियों, दोनों के ख़िलाफ़ आपराधिक कार्रवाई की जाएगी.
(Photo Credit: PTI)

