माओवादी बताकर मारे गए आदिवासी की पत्नी ने मांगा इंसाफ़, कहा सुरक्षाकर्मियों पर हो एफ़आईआर

सिंह की विधवा जीरामणी देवी ने अपनी शिकायत में आठ नामजद और दर्जनों अज्ञात सुरक्षाकर्मियों के खिलाफ़ मामला दर्ज कराने की मांग की है. उनका कहना है कि ब्रह्मदेव सिंह अपने साथियों के साथ सरहुल पर्व मनाने के लिए जंगल में शिकार के लिए गए थे. उन्होंने सुरक्षकर्मियों से चिल्लाते हुए कहा था कि वो माओवादी नहीं हैं.

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इस साल जून में झारखंड के लातेहार ज़िले के पिरी गांव में सुरक्षा बलों द्वारा मारे गए आदिवासी युवक ब्रह्मदेव सिंह की विधवा ने ज़िला अदालत में गुहार लगाई है कि पुलिसकर्मियों पर हत्या के आरोप में तुरंत एफ़आईआर दर्ज करने का निर्देश दिया जाए.

23 साल के ब्रह्मदेव सिंह को 19 जून को सुरक्षा बलों ने गारू थाना क्षेत्र के कुकू-पीरी के जंगलों में माओवादी विरोधी अभियान के दौरान गोली मार दी थी.

सिंह की विधवा जीरामणी देवी ने अपनी शिकायत में आठ नामजद और दर्जनों अज्ञात सुरक्षाकर्मियों के खिलाफ़ मामला दर्ज कराने की मांग की है. उनका कहना है कि ब्रह्मदेव सिंह अपने साथियों के साथ सरहुल पर्व मनाने के लिए जंगल में शिकार के लिए गए थे. उन्होंने सुरक्षकर्मियों से चिल्लाते हुए कहा था कि वो माओवादी नहीं हैं.

जीरामणी ने अपनी शिकायत में कहा है कि जब सुरक्षा बलों ने गोलियां चलाईं, तो सिंह और उनके दोस्तों ने अपनी बंदूकें छोड़ दीं और चिल्लाए कि वो माओवादी नहीं हैं. लेकिन सुरक्षा बलों ने उन पर गोलियां चलाना जारी रखा. जब ब्रह्मदेव सिंह की मौसी मौके पर पहुंची तो उन्होंने सिंह को घायल हालाता में लेकिन जीवित देखा. सुरक्षा बलों ने उन्हें वहां से हटा दिया, और सिंह को अपने साथ ले गए. बाद में, ब्रह्मदेव का शरीर जंगल में मृत पाया गया.

जीरामणी ने यह भी आरोप लगाया है कि जब वह घर से निकला था तो सिंह ने एक अलग रंग की शर्ट पहन रखी थी, और सुरक्षा बलों ने “मुठभेड़” के बाद उसके कपड़े बदल दिए.

हालांकि, पुलिस ने बाद में स्वीकार किया था कि सिंह माओवादी नहीं था, मृतक सहित सभी छह आदिवासी युवकों के खिलाफ़ आर्म्स एक्ट के तहत मामला भी दर्ज किया गया. बाद में मामला सीआईडी को सौंप दिया गया.

लातेहार ज़िला पुलिस प्रशासन तब से कह रहा है कि सीआईडी ​​द्वारा जांच पूरी होने पर चार्जशीट दाखिल होने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी.

29 जून को मृतक सिंह की पत्नी जीरामणी देवी ने लातेहार पुलिस में शिकायत दर्ज कर उनके पति की हत्या में शामिल सुरक्षाकर्मियों के खिलाफ मामला दर्ज करने का अनुरोध किया था.

31 जुलाई को पीरी के ग्राम प्रधान मोदी सिंह के नेतृत्व में अधिकार कार्यकर्ताओं और ब्रह्मदेव सिंह के परिवार के सदस्यों ने उपायुक्त कार्यालय के बाहर एक दिन का विरोध प्रदर्शन कर कार्रवाई की मांग की, साथ ही मुआवज़े की भी मांग की.

मांगों को लेकर लातेहार उपायुक्त को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नाम ग्राम सभा का ज्ञापन भी सौंपा गया था.

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