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Manipur Update: N Biren Singh के बारे में सोशल मीडिया पोस्ट लिखने वाले ‘कुकी’ लड़के की जघन्य हत्या हुई

मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह के बारे में सोशल मीडिया पोस्ट लिखने वाले कुकी लड़की की हत्या शायद मणिपुर हिंसा में पहली जघन्य हत्या की वारदात थी. इस कुकी लड़के की हत्या का जितना दोष भीड़ को दिया जा रहा है उससे ज़्यादा दोषी पुलिस और राज्य सरकार है.

मई की शुरूआत में हथियारबंद आदमी और औरतें इंफ़ाल में पुलिस के हथियार लूट रहे थे. इंफ़ाल में फैली हिंसा में पहली हत्या एक 21 साल के लड़के की हुई थी. यह लड़का चुराचांदपुर का रहने वाला था और उसे मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह के खिलाफ़ सोशल मीडिया पोस्ट लिखने के लिए पुलिस ने ग़िरफ्तार किया था.

इस मामले में दर्ज एफ़आईआर के अनुसार जब पुलिस इस लड़के को कोर्ट से जेल ले जा रही थी तो रास्ते में एक पोरमपट नाम की जगह पर भीड़ ने पुलिस का रास्ता रोक लिया. इस भीड़ ने पुलिस के हथियार छीन लिए और उनकी हिरासत में मौजूद कुकी लड़के को पीट पीट कर मार डाला.

इस वारदात को मणिपुर हिंसा में पहली हत्या के तौर पर दर्ज किया गया है. इस मामले में 4 मई को दंगा और हत्या की धाराओं के तहत रिपोर्ट दर्ज की गई है. इस एफ़आईआर के दर्ज होने के बाद वहां के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने इस वारदात की ख़बर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को भेजी थी.

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने यह सूचना मिलने के बाद राज्य सरकार को एक नोटिस जारी किया और साथ ही राज्य के मानावाधिकार आयोग को अलर्ट किया.

लड़के की हत्या के आरोप से पुलिस बरी नहीं है

चुराचांदपुर ज़िले में 27 अप्रैल से ही तनाव व्याप्त था. कुकी-ज़ोमी समुदाय के संगठन ने एक जिम को जला दिया था. इस जिम का उद्घाटन मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह को करना था. इस बीच टी वाईफेई (T Vaiphei) नाम के छात्र ने मैतई नेताओं और मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह को कुकी-ज़ोमी की मुसीबतों का कारण बताते हुए सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लिखा.

यह कुकी लड़का चुराचांदपुर के एक कॉलेज में भूगोल का छात्र था. इस लड़के ने 24 घंटे बाद ही यह पोस्ट हटा दी थी. लेकिन पुलिस इस मामले में 30 अप्रैल को ही उसके घर पहुंच गई थी.

इस लड़के ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा था कि मैतई नेता पहाड़ियों में अफ़ीम की खेती करवाते हैं और इसके लिए ग़रीब आदिवासियों को बदनाम करते हैं. इस पोस्ट में उसने मैतई समुदाय को ‘नस्लवादी’ और ‘भारत विरोधी’ बताया था.

इस लड़के के परिवार ने बताया कि इस मामले में 3 मई को ही इस लड़के को ज़मानत मिल गई थी. लेकिन जैसे ही कोर्ट ने इस लड़के को ज़मानत दी, इंफ़ाल में पुलिस ने एक और एफ़आईआर दर्ज कर दी. दूसरी एफ़आईआर भी उसी मामले में और उन्हीं धाराओं में दर्ज कर इस कुकी लड़के को फिर ग़िरफ़्तार कर लिया गया. 

इस लड़के की हत्या के बाद पुलिस के सब इंस्पेक्टर एल संजीवा सिंह ने एक एफ़आईआर दर्ज कराई है. एफ़आईआऱ में बताया गया है कि जब वे इस कुकी लड़के को लेकर जेल की तरफ जा रहे थे तो रास्ते में पॉपुलर हाई स्कूल के सामने करीब 800 लोगों की भीड़ ने उन्हें घेर लिया. 

एफ़आईआर में बताया गया है कि जब पुलिस पार्टी ने भीड़ देखी तो कंट्रोल रुम से और फोर्स मांगी गई. लेकिन जब अतिरिक्त फोर्स भेजी गई तो उसे भी रास्ते में भीड़ ने रोक लिया था. इस पुलिस अधिकारी ने एफ़आईआर में बताया है कि भीड़ ने कुकी लड़के के साथ साथ पुलिस वालों की पिटाई भी शुरु कर दी तो पुलिस पार्टी इस लड़के को भीड़ के बीच छोड़ कर अलग अलग दिशा में भाग गए. 

इस मामले में अफ़सोस की बात ये है कि इस कुकी लड़के का शव अभी तक उसके परिवार को नहीं मिला है. परिवार को प्रशासन की तरफ से बताया गया है कि उसका शव इंफ़ाल के अस्पताल में रखा गया है. लेकिन फ़िलहाल तो जो हालात हैं उसमें यह संभव ही नहीं है कि वे इंफ़ाल जा कर अपने बच्चे का शव ले आएं और उसका अंतिम संस्कार कर दें. 

2 COMMENTS

  1. पूरा सरकार की ही साज़िश है। इन दंगाओं के लिए मुख्मंत्री एन बिरेन सिंह मुख्य रूप से ज़िम्मेदार हैं । इतने लोगों की हत्या का ज़िम्मेदार सिर्फ और सिर्फ एन0बिरेन सिंह ही हैं ।

  2. पूरा सरकार की ही साज़िश है। इन दंगाओं के लिए मुख्मंत्री एन बिरेन सिंह मुख्य रूप से ज़िम्मेदार हैं । इतने लोगों की हत्या का ज़िम्मेदार सिर्फ और सिर्फ एन0बिरेन सिंह ही हैं ।

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