मध्यप्रदेश के अलिराजपुर ज़िले से शुरू हुए मिशन D3 यानि शादियों में दहेज, DJ और दारू को नियंत्रित करने का अभियान अब धीरे धीरे अन्य ज़िलों में भी असर कर रहा है.
इस अभियान के ज़रिए समाज को शादियों के दौरान फ़िज़ूलख़र्ची से बचने के लिए जागरुक और संगठित किया जा रहा है.
मिशन D3 की कामयाबी का मतलब आदिवासी संस्कृति का संरक्षण भी होगा. क्योंकि इस अभियान के तहत इस बात पर ज़ोर दिया जा रहा है कि शादियों में DJ पर पैसा बहाने की बजाए अपने परंपरागत ढोल और मांदल का इस्तेमाल किया जाए.
इससे आदिवासी वाद्ययंत्र बनाने वाले और बजाने वाले दोनों के ही रोज़गार के अवसर सुरक्षित हो सकते हैं.
इस अभियान का नेतृत्व कर रहे नितेश अलावा ने मैं भी भारत के श्याम सुंदर से एक ख़ास बातचीत की है –

