छत्तीसगढ़ के आदिवासी बहुल रेंगनार गांव में कोविड वैक्सीन की पहली डोज़ सबको

शहरी इलाक़ों के विपरीत, दूरदराज़ के इन इलाकों में पंजीकरण के लिए स्मार्टफ़ोन और इंटरनेट की सीमित उपलब्धता के चलते 100 प्रतिशत वैक्सिनेशन आसान नहीं था. लेकिन ग्रामीणों और स्वास्थ्य कर्मियों का उत्साह काम आया.

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छत्तीसगढ़ के आदिवासी बहुल दंतेवाड़ा ज़िले का एक सुदूर गांव रेंगनार राज्य का पहला गांव बन गया है, जहां सभी पात्र लोगों को कोविड​​​​-19 वैक्सीन की पहली खुराक दे दी गई है.

राज्य के जनसंपर्क विभाग (Public Relations) के एक अधिकारी ने कहा है कि रेंगनार गांव ने महामारी के खिलाफ लड़ाई में एक मिसाल कायम की है. इस उपलब्धि के पीछे बड़ी वजह है स्वास्थ्य कर्मियों और जागरुकता टीमों का निरंतर प्रयास.

छत्तीसगढ़ की राजधानी से लगभग 420 किलोमीटर दूर स्थित रेंगानार में 310 वयस्कों की आबादी है, और उनमें से सभी श्रेणियों के 294 पात्र लोगों को वैक्सीन की पहली डोज़ दे दी गई है.

शहरी इलाक़ों के विपरीत, दूरदराज़ के इन इलाकों में पंजीकरण के लिए स्मार्टफ़ोन और इंटरनेट की सीमित उपलब्धता के चलते 100 प्रतिशत वैक्सिनेशन आसान नहीं था. लेकिन ग्रामीणों और स्वास्थ्य कर्मियों का उत्साह काम आया.

स्थानीय स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और जागरुकता टीमों ने ग्रामीणों को टीकों के बारे में जागरुक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. गांववालों को आश्वस्त किया गया कि वैक्सीन कोरोनावायरस संक्रमण से उन्हें बचाएगा.

शुरू में दंतेवाड़ा ज़िला प्रशासन ने कुआंकोंडा में रेंगानार और दूसरे गांवों के लिए कई वैक्सिनेशन कैंप आयोजित किए थे, लेकिन अफ़वाहों और जागरुकता की कमी की वजह से ज़्यादा लोगों ने इसमें  रुचि नहीं दिखाई.

रेंगनार की सरपंच, सनमती तेलमी ने मीडिया को बताया कि जागरुकता दल ने एक मिशन मोड में घर-घर जाकर लोगों को वैक्सिनेशन के फ़ायदों के बारे में बताकर उन्हें राज़ी किया.

एक अधिकारी के मुताबिक़ दंतेवाड़ा में हर पंचायत में कोरोनावायरस जागरुकता टीमों का गठन किया गया है, जो लगातार जांच और टीकाकरण गतिविधियों पर नज़र रखते हैं.

छत्तीसगढ़ में 14 जून तक सभी श्रेणियों के लोगों को 72.94 लाख से अधिक वैक्सीन की डोज़ दी जा चुकी है.

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