सरकारें आई और चली गईं, मगर इन 37 आदिवासी गांवों में बिजली नहीं पहुंची

रायघर ब्लॉक के तहत आने वाले 37 ऐसे गांव हैं जहां अभी तक बिजली की आपूर्ति नहीं है. गांव में रहने वाले 50 से ज़्यादातर परिवार, जिनमें से ज्यादातर आदिवासी हैं, सालों से बिजली का इंतज़ार कर रहे हैं.

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केंद्र और कई राज्य सरकारें गांवों के विद्युतीकरण पर करोड़ों रुपये ख़र्च कर रही हैं, और बड़े-बड़े दावे करती हैं. लेकिन, ओडिशा के नबरंगपुर ज़िले के कई दुर्गम आदिवासी बहुल गांव अभी भी अंधेरे में हैं. बिजली की आपूर्ति इन गांवों के लिए एक सपना है.

एक रिपोर्ट के मुताबिक़ रायघर ब्लॉक में कई ऐसे आदिवासी गांव हैं जहां लोग अभी भी अपने घरों को तेल के दीयों से रोशन करते हैं.

छत्तीसगढ़ और ओडिशा की सीमा पर बसा जोडिंगन पंचायत के गुद्रीपाड़ा गांव को लोग राज्य सरकार से काफ़ी नाराज़ हैं. इतने नाराज़ कि वो आने वाले चुनावों में नेताओं को सही जवाब देने का प्लान बना रहे हैं.

रायघर ब्लॉक के तहत आने वाले 37 ऐसे गांव हैं जहां अभी तक बिजली की आपूर्ति नहीं है. गांव में रहने वाले 50 से ज़्यादातर परिवार, जिनमें से ज्यादातर आदिवासी हैं, सालों से बिजली का इंतज़ार कर रहे हैं.

कुछ ग्रामीणों ने कहा, “प्रशासन और जनप्रतिनिधियों दोनों ने हमारे विकास और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं पर शायद ही कभी ध्यान दिया हो. हमारे गांव में विद्युतीकरण का काम घरों में बिजली के उपकरण, बोर्ड और मीटर लगाने से आगे नहीं बढ़ पाया है. चुनाव आते हैं और चले जाते हैं, लेकिन नेता सिर्फ़ हमें आश्वासन देते हैं. असल में हमारे लिए कुछ नहीं किया जाता.”

सालों से किए जा रहे अधूरे वादों से परेशान कई आदिवासियों ने अपने घरों में लगाए गए बिजली के उपकरण हटा दिए हैं. वो कहते हैं कि कई बार प्रशासन के सामने मुद्दे को उठाने के बावजूद कोई फ़ायदा नहीं हो रहा है.

एक ग्रामीण ने कहा, “इस बीच कई गांवों का विद्युतीकरण किया गया है, लेकिन हमारा गांव छूट गया है. चुनाव आ रहे हैं और नेताओं को हम तभी जवाब देंगे.”

ऊर्जा विभाग के जूनियर इडीनियर प्रदीप कुमार चौधरी ने ओडिशा पोस्ट का बताया कि इस मामले में गांव को बीजू ग्राम ज्योति योजना में शामिल करने का प्रस्ताव प्रशासन को दिया गया है. उन्होंने कहा कि इस ब्लॉक के 37 गांवों में बिजली की आपूर्ति के प्रस्ताव भेजे जा चुके हैं.

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