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अमित मालवीय ने मणिपुर दौरे के माध्यम से राहुल गांधी पर स्वार्थ साधने का लगाया आरोप

बीजेपी नेता अमित मालवीय ने मणिपुर दौरे पर राहुल गांधी को घेरने के साथ ही साल 2015 से 2017 में भड़की जातीय हिंसा को भी याद दिलाया. राहुल गांधी के दौरे को राजनीतिक एजेंड़ा बताने की आड़ में अमित मालवीय कहीं खुद राजनीतिक रोटियां तो नहीं सेक रहे है?


भाजपा के राष्ट्रीय सूचना एवं तकनीकि विभाग के प्रभारी अमित मालवीय ने विपक्ष के नेता राहुल गांधी के मणिपुर दौरे को असफल बताया है. उन्होंने राहुल गांधी के दौरे का उद्देश्य बताते हुए कहा कि यह दौरा सिर्फ फोटो खिंचवाने के लिए था, इसके अलावा कुछ नहीं.

सोमवार को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने मणिपुर का एक दिवसीय दौरा किया था. जिसके बाद भारतीय जनता पार्टी का आईटी विभाग संभाल रहे अमित मालवीय ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि तीसरी बार असफल राहुल गांधी का मणिपुर दौरा सिर्फ फोटो खिंचवाने के लिए था और इससे ज़्यादा कुछ नहीं.

विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सोमवार को जिरीबाम और चुराचांदपुर जिलों में राहत शिविरों का दौरा करने के बाद राज्यपाल अनुसुइया उइके से मुलाकात की. फिर कांग्रेस भवन में अपनी संक्षिप्त मीडिया ब्रीफिंग के बाद इम्फाल एयरपोर्ट के लिए निकल गए थे और उन्होंने मीडिया के किसी भी सवाल का जवाब देने से इनकार कर दिया था.

वहीं अमित मालवीय ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि जैसे ही प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुश्किल सवाल पूछे जाने लगे तो उन्होंने जवाब देने से मना कर दिया. इसके बाद मालवीय ने राहुल गांधी पर सवालों की बौछार कर दी.

मालवीय ने मणिपुर के लोगों की तरफ से सवाल पूछने के नाम पर 2015 की हिंसा से जुडे मामले पर राहुल गांधी को घेरा.

मालवीय ने कहा कि राहुल गांधी 2015-17 के बीच जातीय हिंसा के पीड़ितों से मिलने मणिपुर के चुराचांदपुर का दौरा क्यों नहीं किया.

2015 की जातीय हिंसा की शुरुआत कांग्रेस के मुख्यमंत्री ओकराम इबोबी सिंह की सरकार ने राज्य में तीन विधेयक पारित करने का फैसला लिया था.

ये तीन विधेयक मणिपुर लोगों का संरक्षण विधेयक, 2015; मणिपुर भूमि राजस्व और भूमि सुधार (सातवां संशोधन) विधेयक, 2015 और मणिपुर दुकानें और प्रतिष्ठान (दूसरा संशोधन) विधेयक, 2015 शामिल थे.

चुराचांदपुर जिले के पाइते और कुकी आदिवासियों ने इन विधेयकों को आदिवासी विरोधी और बहुसंख्यक मैतेई समुदाय द्वारा आदिवासी भूमि हड़पने की ‘साजिश’ के रूप में देखा था. जिसके बाद उस समय जातीय हिंसा भड़की थी.

मालवीय ने राहुल गांधी के दौरे पर सवाल उठाए और कहा कि उस समय नौ युवकों की गोली मारकर हत्या कर दी गई और प्रदर्शनकारियों ने दो साल तक उनका अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया था, तब राहुल गांधी मणिपुर क्यों नहीं गए.

उन्होंने राहुल पर अवसर का फायदा उठाने का आरोप लगाया और कहा कि वह शांति के मसीहा नहीं हैं, बल्कि एक राजनीतिक अवसरवादी हैं, जो माहौल को गर्म रखना चाहते हैं.

मालवीय ने कहा मणिपुर में राहुल गांधी ने लोगों की चिंता के कारण यह दौरा नहीं किया है बल्कि अपना राजनीतिक एजेंडा पूरा करने के लिए किया है.

उन्होंने टिपण्णी करते हुए कहा कोई भी राहुल गांधी पर या कांग्रेस पर भरोसा नहीं करता. मालवीय ने कहा कि मणिपुर मीडिया ने बालक बुद्धि को भगाना सही समझा.

राहुल गांधी के दौरे का तो पता नहीं लेकिन राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए अमित मालवीय की बातें ज़रूर एक एजेंड़ा लगीं. अगर मालवीय को यहां के लोगों की चिंता होती तो शायद वे साल 2015-2017 की जातीय हिंसा का ज़िक्र न करते क्योंकि इससे मणिपुर के हालात सुधरने की बजाय और बिगड़ने के ही आसार बनेंगे.

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