अर्जुन मुंडा और शीर्ष अधिकारी असम में क्या कर रहे हैं?

उत्तर-पूर्वी भारत में स्थित असम में 3,308,570 जनजातीय आबादी है, जो कुल आबादी का 12.4 फीसदी है. दरअसल असम की जनजातियों और टी ट्राइब्स से जुड़े ज्यादातर इलाकों ने बीजेपी को राज्य में सत्ता दिलाने में बड़ी भूमिका निभाई है. लेकिन इसके बावजूद बीजेपी की राज्य सरकार आदिवासियों के मुद्दों से आंखें चुराती रही है.

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असम में आदिवासियों को लेकर सरकारी हलचल तेज़ है. हाल ही में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा शर्मा ने आदिवासी मामलों के लिए एक कैबिनेट कमेटी का गठन किया है. इसके अलावा भी कई घोषणाएं उन्होंने की हैं.

अब केंद्रीय जनजातीय मामलों के मंत्री अर्जुन मुंडा राज्य के दो दिवसीय दौरे पर असम में है. अर्जुन मुंडा ने असम में जनजातीय विकास कार्यक्रमों के कार्यान्वयन की समीक्षा की और कहा कि ‘वन धन’ आदिवासी आजीविका को बढ़ावा देने के लिए एक गेम-चेंजर हो सकता है. 

अर्जुन मुंडा ने रविवार को कहा, “वन धन असम में जनजातीय आजीविका और उद्यमों को बढ़ावा देने के लिए एक गेम-चेंजर हो सकता है. जबकि एकलव्य विद्यालय आदिवासी बच्चों को समान और उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा प्रदान करेगा.”

राज्य में जनजातीय मामलों के मंत्रालय द्वारा एक विज्ञप्ति के मुताबिक, अर्जुन मुंडा राज्य के दो दिवसीय दौरे पर असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा शर्मा से मिलने पहुंचे थे. मुख्यमंत्री के साथ इस व्यापक बैठक का उद्देश्य आदिवासी विकास कार्यक्रमों (लघु वनोपज (MFP), वन धन स्वयं सहायता समूह (VDSHG) और भारतीय जनजातीय सहकारी विपणन विकास संघ (TRIFOOD) के कार्यान्वयन की स्थिति की समीक्षा करना और उसे समझना था.

बैठक के दौरान आदिवासी जीवन में सुधार के लिए सरकार द्वारा किए गए कार्यक्रमों के संबंध में असम द्वारा की गई प्रगति जैसे लघु वन उपज के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MFP के लिए MSP), वन धन योजना, ईएसडीपी प्रशिक्षण के लिए आदिवासियों की समीक्षा अर्जुन मुंडा ने की.

इससे पहले अगस्त में असम के मुख्यमंत्री ने नई दिल्ली में ट्राइफेड टीम के साथ मुलाकात की थी ताकि राज्य में आदिवासी विकास के विस्तार की योजना बनाई जा सके और आगे के लिए कदमों को परिभाषित किया जा सके.

अपने दो दिवसीय दौरे पर अर्जुन मुंडा के साथ ट्राइफेड के प्रबंध निदेशक प्रवीर कृष्ण और ट्राइफेड के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी हैं. मुख्यमंत्री के साथ बैठक के बाद मंत्री ने पूर्वोत्तर क्षेत्रीय केंद्र में लक्ष्मी बाई राष्ट्रीय शारीरिक शिक्षा संस्थान में वॉयस ऑफ नॉर्थ ईस्ट जनजातीय नेता सम्मेलन में भाग लिया.

न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के माध्यम से लघु वन उपज (MFP) के विपणन के लिए मकैन्जिम और एमएफपी के लिए मूल्य श्रृंखला का विकास इस राज्य में पिछले दो सालों में बदलाव की एक किरण के रूप में आया है. 

ट्राइफेड द्वारा देश के 21 राज्यों में राज्य सरकार की एजेंसियों के सहयोग से परिकल्पित और कार्यान्वित किया गया. यह योजना जनजातीय मामलों के मंत्रालय के मुताबिक जनजातीय अर्थव्यवस्था में सीधे करोड़ों रुपये का निवेश करने वाले जनजातीय संग्रहकर्ताओं के लिए बड़ी राहत के स्रोत के रूप में उभरी है.

असम ने एमएफपी योजना के लिए एमएसपी का इस्तेमाल किया है जिसमें भारत सरकार के फंड का उपयोग करने वाली कुल खरीद 58.56 मीट्रिक टन है, जिसका मूल्य 37.39 लाख रुपए है. वन धन योजना के तहत कुल 1,920 वीडी एसएचजी स्वीकृत किए गए हैं जिन्हें 128 वीडीवीके क्लस्टर में शामिल किया गया है. इसका सीधा लाभ 37,786 वन आदिवासी संग्रहकर्ताओं को हो रहा है. 

उत्तर-पूर्वी भारत में स्थित असम में 3,308,570 जनजातीय आबादी है, जो कुल आबादी का 12.4 फीसदी है. दरअसल असम की जनजातियों और टी ट्राइब्स से जुड़े ज्यादातर इलाकों ने बीजेपी को राज्य में सत्ता दिलाने में बड़ी भूमिका निभाई है. लेकिन इसके बावजूद बीजेपी की राज्य सरकार आदिवासियों के मुद्दों से आंखें चुराती रही है. उसने अपने घोषणापत्र में शामिल वादे से भी बीजेपी मुकरती रही है. पार्टी को अहसास है कि अब आदिवासी समुदाय में बेचैनी बढ़ रही है.

आदिवासियों की यह बेचैनी लोकसभा चुनाव में पार्टी को भारी पड़ सकती है. चुनावी मशीन में तब्दील हो चुकी बीजेपी, इस तथ्य की तरफ से आंख नहीं मूंद सकती है. 

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