जम्मू-कश्मीर में ट्राइबल रिसर्च इंस्टीट्यूट ने 30 फैलोशिप को दी मंजूरी

रिमोट सेंसिंग में जनजाति गांवों की मैपिंग होगी. रिसर्च और पॉलिसी में फैलोशिप जनजाति कल्याण के लिए विशेष नीति बनाई जाएगी. डेयरी में दूध के सौ गांवों को विकसित किए जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है.

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जनजातीय अनुसंधान संस्थान जम्मू-कश्मीर ने साल 2021-22 के लिए 12 अलग अलग क्षेत्रों में 30 फैलोशिप को मंजूरी दी है. इससे प्रदेश में आदिवासी समुदायों के सामाजिक-आर्थिक बुनियादी ढांचे के विकास के लिए कार्य अनुसंधान, अध्ययन और योजना तैयार की जा सकेगी.

जनजाति मामलों के विभाग के सचिव डॉक्टर शाहिद इकबाल चौधरी ने बताया कि विभाग ने विभिन्न क्षेत्रों में फैलोशिप को मंजूरी दी है.

दरअसल सामान्य प्रशासनिक विभाग ने कुछ समय पहले एक वर्किंग ग्रुप बनाया था. जिसमें जनजाति मामलों के विभाग के सचिव को ग्रुप का चेयरमैन बनाया गया था. वर्किंग ग्रुप को ट्राइबल रिसर्च इंस्टीट्यूट बनाने का काम दिया गया था. फैलोशिप को शुरू करना इंस्टीट्यूट का पहला काम है.

फैलोशिप 12 क्षेत्रों में शुरू की गई है जिसमें स्वास्थ्य और पोषण, रिमोट सेंसिंग, पशु भेड़ पालन व डेयरी, जन स्वास्थ्य व सफाई, रिसर्च एंड पॉलिसी, साहित्य, कला, वेब डिजाइनिंग, आईटी एंड डिजिटेशन, वन अधिकार कानून लागू करना, महिला सशक्तिकरण, जनजाति युवाओं के लिए आजीविका योजनाएं शामिल है.

मेडिसन और जन स्वास्थ्य के ग्रेजुएट विद्यार्थी जनजाति समुदाय के लोगों के स्वास्थ्य का सर्वे करेंगे. कई स्क्रीनिंग कैंप लगाए जाएंगे. उनकी फील्ड रिपोर्ट हाल ही में शुरू की गई जनजातीय स्वास्थ्य योजना का समर्थन करने के लिए आधार बनेगी जिसके तहत जनजातीय सब-सेंटर और मोबाइल अस्पतालों के नेटवर्क की योजना बनाई गई है.

रिमोट सेंसिंग में जनजाति गांवों की मैपिंग होगी. रिसर्च और पॉलिसी में फैलोशिप जनजाति कल्याण के लिए विशेष नीति बनाई जाएगी. डेयरी में दूध के सौ गांवों को विकसित किए जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है.

इसी तरह कला, संस्कृति और साहित्य में फैलोशिप आदिवासी कला और संस्कृति के संरक्षण, आदिवासी कलाकारों का समर्थन करने और प्रकाशन सहित आदिवासी साहित्य के विकास के लिए समर्थन और मंच प्रदान करने पर ध्यान केंद्रित करेगी.

आदिवासी महिलाओं और युवाओं को सशक्त बनाने के लिए मॉडल पर काम करने के लिए एक समर्पित फैलोशिप की भी योजना है. उनके कल्याण के लिए योजनाओं को विकसित करना और जनजातीय मामलों के विभाग द्वारा समर्थित और वित्त पोषित किया जाना है.

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