मुदुवान आदिवासी समुदाय का पहला इंजीनियरिंग ग्रैजुएट बना मिसाल

उनके रास्ते में कई ऐसी अड़चनें आईं जो सफ़लता की तलाश में आदिवासी भारत से निकलने वाले ज़्यादातर छात्रों को आती हैं. पक्की सड़कों का अभाव, और मोबाइल कनेक्टिविटी की कमी जैसी समस्याओं ने चिन्नराज की मुश्किलें भी बढ़ाईं.

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केरल के इडुक्की ज़िले में रहने वाले मुदुवान आदिवासी समुदाय के लोगों की खुशी अपने चरम पर है. वजह है उनके एक बेटे की बड़ी उपलब्धि. मुदुवान समुदाय के चिन्नराज के ने वट्टवड़ा पंचायत के समियारालाकुडी में अपनी बस्ती का पहला इंजीनियरिंग ग्रौजुएट बनकर अपने पूरे सुदाय का सर ऊंचा कर दिया है.

दिवंगत करुणन और अमुता के आठ बच्चों में से एक, 26 साल के चिन्नराज के लिए इंजीनियर बनने का सफ़र आसान नहीं था. चिन्नाराज, जिनके चार भाई हैं, जो सभी खेती करते हैं, ने कहा, “मैंने पांच साल पहले अपने पिता को खो दिया. मेरी माँ ने किसी तरह मेरी तीन बहनों की शादी की. हम खेती से मिलने वाली अपनी सीमित पर जीवित रहते हैं.”

उनका कहना है कि चूंकि उनके भाई खेती करते थे, इसलिए वो पढ़ना चाहते थे और नौकरी करना चाहते थे ताकि वो अपनी मां की देखभाल कर सकें.

उनके रास्ते में कई ऐसी अड़चनें आईं जो सफ़लता की तलाश में आदिवासी भारत से निकलने वाले ज़्यादातर छात्रों को आती हैं. पक्की सड़कों का अभाव, और मोबाइल कनेक्टिविटी की कमी जैसी समस्याओं ने चिन्नराज की मुश्किलें भी बढ़ाईं. इंटरनेट की कमी ने उनका कोविड महामारी के दौरान कक्षाओं में भाग लेना लगभग नामुमकिन कर दिया.

उनके ट्यूटर उन्हें ऑनलाइन कक्षाओं के रिकॉर्डेड वीडियो भेजते थे, जिन्हें वह अपनी बस्ती से बाहर बेहतर इंटरनेट कवरेज वाले स्थान पर जाकर डाउनलोड करते थे. लेकिन, अपने दृढ़ निश्चय और आत्मविश्वास से सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज, कण्णूर से सिविल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की और अपने समुदाय के युवाओं के लिए एक उदाहरण बन गए.

“पक्की सड़कों की कमी इस इलाक़े के आदिवासी छात्रों के सामने सबसे बड़ी समस्या है. हमें बस्ती के अंदर और बाहर जाने के लिए हर दिन जीप किराए पर लेनी पड़ती है,” चिन्नराज ने कहा.

70 प्रतिशत अंकों के साथ मुन्नार के मॉडल रेजिडेंशियल स्कूल से दसवीं, और कोच्चि के सेंट थॉमस एचएसएस से हायर सेकेंडरी में 75 प्रतिशत अंकों के साथ पास हुए.

अब, चिन्नराज नौकरी पाने और अपने परिवार का समर्थन करने की योजना बना रहे हैं. “मेरी उच्च अध्ययन के लिए जाने की कोई योजना नहीं है. मैंने वट्टवड़ा पंचायत में एक मान्यता प्राप्त इंजीनियर के पद के लिए आवेदन दिया है. चूंकि यह एक अस्थायी नौकरी है, इसलिए मैं सिविल इंजीनियरिंग क्षेत्र में बेहतर नौकरी के दूसरे अवसरों की भी तलाश कर रहा हूं,” उन्होंने कहा.

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