करोड़ों छोड़िए, लाखों भी छोड़िए, 2020-21 में ओडिशा की सबसे बड़ी आदिवासी विकास एजेंसी को मिले सिर्फ़ 58 हज़ार रुपए

हैरानी की बात यह है कि नबरंगपुर आईटीडीए राज्य में सबसे बड़ा है. ज़िले की लगभग 70 प्रतिशत आबादी अनुसूचित जाति और जनजाति से है. 2019-2020 में नबरंगपुर आईटीडीए को 2.86 करोड़ रुपये सैंक्शन किए गए थे, जबकि उससे पिछले साल 5.56 करोड़ रुपये. 2020-21 में दिया गया फ़ंड पिछले पांच साल में सबसे कम है.

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ओडिशा के नबरंगपुर ज़िले की एकीकृत जनजातीय विकास एजेंसी (ITDA) को वित्तीय वर्ष 2020-21 में सिर्फ़ 58,000 रुपये दिए गए. इस रकम का महत्व तब पता चलेगा जब आप इसकी तुलना दूसरे ज़िलों के आवंटन से करेंगे.

जेपोर आईटीडीए को मिले 84.20 लाख रुपये, कोरापुट को मिले 1.22 करोड़ रुपये, रायगड़ा को 81.80 लाख रुपये, गुनुपुर को 2.13 करोड़ रुपये और मलकानगिरी को करीब 2.39 करोड़ रुपये मिले. कालाहांडी के थुमुल रामपुर आईटीडीए को 49 लाख रुपये दिए गए.

हैरानी की बात यह है कि नबरंगपुर आईटीडीए राज्य में सबसे बड़ा है. ज़िले की लगभग 70 प्रतिशत आबादी अनुसूचित जाति और जनजाति से है. 2019-2020 में नबरंगपुर आईटीडीए को 2.86 करोड़ रुपये सैंक्शन किए गए थे, जबकि उससे पिछले साल 5.56 करोड़ रुपये. 2020-21 में दिया गया फ़ंड पिछले पांच साल में सबसे कम है.

2011 की जनगणना के अनुसार नबरंगपुर की लगभग 57.35 प्रतिशत आबादी को स्कूली शिक्षा नहीं मिली. ज़िले में कई दूरदराज़ के गांव ऐसे हैं जो अपने ब्लॉक और ज़िला मुख्यालय से एकदम कटे हुए हैं.

ओडिशा में कुल 62 आदिवासी समुदाय हैं, जिनमें 13 पीवीटीजी कैटेगरी में आते हैं

आदिवासी इलाक़ों में अपनी कल्याणकारी स्कीमों के माध्यम से मानव विकास संकेतकों में महत्वपूर्ण सुधार लाने के केंद्र और राज्य दोनों सरकारों के दावों के बीच, नबरंगपुर की उपेक्षा और आधिकारिक उदासीनता एक दुखद तस्वीर प्रस्तुत करती है.

नबरंगपुर की आदिवासी आबादी की हालत को देखते हुए ITDA, ओडिशा जनजातीय अधिकारिता और आजीविका कार्यक्रम (Odisha Tribal Empowerment and Livelihood Programme (OTELP) और विशेष विकास परिषद (SDC) को सामाजिक-आर्थिक सूचकांकों में सुधार लाने के लिए लागू किया गया था.

हालांकि, राज्य सरकार ने इस साल 31 मार्च से नबरंगपुर में OTELP को बंद कर दिया है, लेकिन 2009 में ज़िले में शुरू की गई इस योजना के तहत 50 वॉटरशेड परियोजनाओं की स्थापना के लिए कोसागुमुडा, पापडाहांडी, झरीगाम, तेंटुलीखुंटी और दाबूगांव के पांच ब्लॉकों में 119 गांवों की पहचान की गई थी.

बेहतर खेती और बीज के लिए तकनीकी सहायता भी आदिवासियों को दी जाती थी. इसके अलावा, दूरदराज के इलाक़ों में रहने वाले आदिवासियों से सीधे वनोपज खरीदने की योजना भी बनाई गई. बेघरों को घर और भूमिहीनों को भूमि के पट्टे प्रदान करने के लिए कदम उठाए गए.

गुरुवार को उमरकोट में कलेक्टर अजीत कुमार मिश्रा की अध्यक्षता में परियोजना स्तरीय समिति (पीएलसी) की बैठक हुई. इसमें चालू वित्त वर्ष के लिए नबरंगपुर आईटीडीए को फ़ंड जारी नहीं होने पर चिंता जताई गई. फ़ंड जारी करने की मांग को लेकर एक प्रस्ताव भी पारित किया गया.

कलेक्टर का कहना है कि परियोजनाओं के प्रस्ताव सरकार के पास स्वीकृति के लिए भेजे गए हैं, और धन के आवंटन में देरी कोविड महामारी के चलते हुई है.

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