आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू (N Chandrababu Naidu) ने रविवार को घोषणा की कि सरकार ने 2027 तक हर आदिवासी परिवार को सुरक्षित पीने का पानी और घर उपलब्ध कराने का एक बड़ा लक्ष्य रखा है.
उन्होंने इंफ्रास्ट्रक्चर, आजीविका, पर्यटन और कौशल विकास के ज़रिए आदिवासी इलाकों को बदलने के लिए एक व्यापक रोडमैप भी पेश किया.
विजयवाड़ा में अंबेडकर कला वेदिका में ‘दुनिया के मूल निवासियों के अंतर्राष्ट्रीय दिवस’ के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नायडू ने कहा कि सरकार आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा करने और समुदायों के लिए आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने के अवसर पैदा करने के लिए प्रतिबद्ध है.
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में 27.39 लाख आदिवासियों के सर्वांगीण विकास के लिए 4,764 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं.
2,336 आदिवासी बस्तियों तक सड़क संपर्क पहुंचाने का काम मिशन मोड में किया जा रहा है. जबकि ‘अडवी तल्ली बाटा’ पहल के तहत 1,000 करोड़ रुपये की लागत से 905 किलोमीटर सड़कें बनाई गई हैं.
नायडू ने कहा कि सरकार दूर-दराज के आदिवासी इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं को भी मजबूत कर रही है ताकि मरीज़ों को डोली में ले जाने जैसे पारंपरिक तरीकों पर निर्भरता खत्म हो सके.
फीडर एम्बुलेंस, 108 और 104 मोबाइल मेडिकल यूनिट तैनात की जा रही हैं जबकि डिजिटल कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए सेल टावर लगाए जा रहे हैं.
वन उत्पादों की ब्रांडिंग को बढ़ावा
मुख्यमंत्री का कहना है कि सरकार आदिवासी इलाकों से मिलने वाले वन और कृषि उत्पादों की वैल्यू बढ़ाने और उत्पादन से लेकर प्रोसेसिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग तक की पूरी चेन को सहयोग देने की योजना बना रही है.
सीतामपेटा हल्दी, रामपाचोडावरम रबर, पार्वतीपुरम अनानास, शहद और ताड़ के गुड़ जैसे उत्पादों को विशेष सहयोग दिया जाएगा.
सीएम नायडू ने कहा कि सरकार ‘अराकू कॉफी’ की सफलता को दोहराना चाहती है, जो एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचाना जाने वाला ब्रांड बन गया है.
कॉफी की खेती का विस्तार एक लाख एकड़ और ज़मीन पर किया जा रहा है. साथ ही एजेंसी इलाकों में कॉफी, काली मिर्च और हल्दी को प्रमुख व्यावसायिक फसलों के रूप में विकसित करने के प्रयास किए जा रहे हैं.
1.5 लाख आदिवासी युवाओं को स्किल ट्रेनिंग
बेरोजगारी और आजीविका के अवसर एक बड़ी चिंता का विषय हैं इसलिए नायडू ने घोषणा की कि 1.5 लाख आदिवासी युवाओं को स्किल ट्रेनिंग यानि कौशल प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि उन्हें नौकरी और स्वरोजगार के बेहतर अवसर मिल सकें.
विशेष पहल के ज़रिए आदिवासी छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भी तैयार किया जाएगा.
सरकार आदिवासी इलाकों में पर्यटन को भी बढ़ावा देगी, जिसमें वहां के जंगलों, हरियाली और प्राकृतिक नज़ारों का इस्तेमाल किया जाएगा और साथ ही यह सुनिश्चित किया जाएगा कि स्थानीय समुदायों को आर्थिक लाभ मिले.
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के सफ़र का ज़िक्र करते हुए नायडू ने कहा कि एक आदिवासी महिला से देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक उनका पहुंचना प्रेरणादायक है.
उन्होंने आदिवासी समुदायों से अपनी आकांक्षाओं को हकीकत में बदलने और राष्ट्र-निर्माण में योगदान देने का आग्रह किया.
उन्होंने हाल ही में ‘धिमसा’ नृत्य के विशाल प्रदर्शन से बने गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड का भी ज़िक्र किया और इसे एक गर्व का पल बताया, जिसने दुनिया के सामने आंध्र प्रदेश की समृद्ध आदिवासी विरासत को पेश किया.
आंध्र प्रदेश में 34 अनुसूचित जनजाति समूह हैं, जो राज्य की कुल आबादी का 5.5 फीसदी से ज़्यादा हिस्सा हैं.
इनमें ‘येनाडी’ सबसे बड़ी जनजाति है, जबकि चेंचू, गडाबा और कोंडा रेड्डी जैसे समूह जंगलों और पहाड़ियों में अपनी अलग जीवनशैली अपनाते हैं. अन्य जनजातियां कोंड डोरा, कोंध, सौरा, जाटापु, कोया, कोलम है.
राज्य की जनजातीय आबादी मुख्य तौर पर विशाखापत्तनम, अल्लूरी सीताराम राजू, पार्वतीपुरम मन्यम, श्रीकाकुलम, विजयनगरम, पूर्वी गोदावरी और प्रकाशम जैसे क्षेत्रों के पहाड़ी एवं वनवासी इलाकों में केंद्रित है.

