झारखंड में पार्टी के कामकाज को संभालने के लिए एक आदिवासी चेहरे को आगे करते हुए, भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने बुधवार को अपने राष्ट्रीय महासचिव गजेंद्र सिंह पटेल (Gajendra Singh Patel) को पार्टी की झारखंड यूनिट का प्रभारी नियुक्त किया.
बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने बुधवार को नए राज्य प्रभारियों और सह-प्रभारियों की नियुक्ति की घोषणा की.
झारखंड में पटेल की मदद के लिए सौरभ सिंह और निवेदिता सिंह को सह-प्रभारी नियुक्त किया गया है.
पार्टी के एक नेता ने बताया कि पूर्व विधायक सौरभ सिंह अभी छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (CMDC) के प्रमुख थे. जबकि निवेदिता सिंह बिहार विधान परिषद की सदस्य थीं. केंद्रीय नेतृत्व ने बुधवार को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए प्रभारी नियुक्त किए.
पटेल मध्य प्रदेश की खरगोन लोकसभा सीट (जो अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित है) से दो बार सांसद रहे हैं. नितिन नबीन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद हाल ही में हुए संगठनात्मक बदलाव में उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया था.
पटेल ने उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सदस्य लक्ष्मीकांत वाजपेयी की जगह ली है, जिन्हें 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले पार्टी के कामकाज का प्रभारी बनाया गया था.
पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, “पटेल भील आदिवासी समूह से आते हैं, जो देश भर के सभी आदिवासी उप-समूहों में आबादी के हिसाब से सबसे बड़ा है. झारखंड के लिए आदिवासी चेहरे को चुनकर, पार्टी उन आदिवासी वोटों को फिर से हासिल करने की कोशिश कर रही है जो पिछले कुछ चुनावों में उससे दूर हो गए थे. सामान्य श्रेणी से दो सह-प्रभारी नियुक्त करके, पार्टी ने सभी सामाजिक समूहों को एक संदेश भी दिया है, खासकर इसलिए क्योंकि उसने पहले ही ओबीसी नेता आदित्य साहू को राज्य इकाई का प्रमुख नियुक्त किया था.”
बीजेपी की राज्य में पकड़ मजबूत करने की कोशिश
पटेल की यह नियुक्ति झारखंड के आदिवासी निर्वाचन क्षेत्रों में बीजेपी के हालिया चुनावी प्रदर्शन को देखते हुए की गई है.
2024 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी राज्य की अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित सभी पांच संसदीय सीटें हार गई थी; जबकि इनमें से JMM ने तीन और कांग्रेस ने दो सीटें जीती थीं.
झारखंड में अनुसूचित जनजातियों के लिए 28 विधानसभा सीटें आरक्षित हैं, जिससे आदिवासी मुद्दे राज्य की चुनावी राजनीति का एक अहम हिस्सा बन जाते हैं.
आदिवासी मतदाताओं के बीच JMM का पारंपरिक रूप से मजबूत समर्थन आधार रहा है; पार्टी की राजनीति शिबू सोरेन और बाद में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की विरासत पर आधारित है.
आदिवासी इलाकों में पार्टी की चुनौतियां 2024 के चुनावों में खास तौर पर साफ दिखीं. चुनावों के बाद हुए विश्लेषणों में राज्य की 28 अनुसूचित जनजाति-आरक्षित विधानसभा सीटों पर बीजेपी के प्रदर्शन पर गौर किया गया, जहां JMM के नेतृत्व वाले गठबंधन ने आदिवासी मतदाताओं के बीच अपनी मजबूत स्थिति बनाए रखी.
इस पृष्ठभूमि में किसी दूसरे राज्य के आदिवासी नेता को बीजेपी का झारखंड प्रभारी नियुक्त करने से पटेल की भूमिका सामान्य संगठनात्मक समन्वय से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है.
गजेंद्र सिंह पटेल
52 वर्षीय पटेल ने पार्टी में धीरे-धीरे तरक्की की है. उन्होंने मध्य प्रदेश में ST मोर्चा के अध्यक्ष और फिर ST मोर्चा के राष्ट्रीय महासचिव के तौर पर काम किया, जिसके बाद उन्हें संगठनात्मक राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया.
मध्य प्रदेश के खरगोन से दो बार लोकसभा सदस्य रहे पटेल को अगस्त में बीजेपी का राष्ट्रीय महासचिव नियुक्त किया गया था. उन्होंने पार्टी के अनुसूचित जनजाति मोर्चा में भी संगठनात्मक जिम्मेदारियां संभाली हैं
पटेल की नई जिम्मेदारी उन्हें ऐसे राज्य में बीजेपी संगठन का काम सौंपती है जहां जमीन, आदिवासी पहचान, संस्कृति और विकास से जुड़े मुद्दे राजनीतिक चर्चा में अहम स्थान रखते हैं.
पटेल 2019 में खरगोन (ST) लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से चुने गए थे और 2024 में भी उन्होंने यह सीट बरकरार रखी.
उनके संसदीय प्रोफाइल के अनुसार, वे एक किसान हैं और उनके पास BA और LLB की डिग्रियां हैं. संसद में उनके हस्तक्षेपों में खरगोन-बड़वानी क्षेत्र में रेल कनेक्टिविटी, बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, कृषि और विकास से जुड़े मुद्दे शामिल रहे हैं.

