हड़िया दारू निर्माण एवं बिक्री से जुड़ी महिलाओं को सम्मानजनक आजीविका

एटलस परियोजना का लक्ष्य राज्य की 20 हजार आदिवासी महिलाओं को तकनीक आधारित उन्नत खेती से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाना है, जिसके अंतर्गत एफपीओ से जुड़ी महिलाओं को एडवाइजरी सेवाएं, वीडियो आधारित प्रशिक्षण, क्षमतावर्धन जैसे काम किए जाएंगे.

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झारखंड सरकार का दावा है कि वो आदिवासी महिलाओं के सशक्तिकरण और सम्मान के लिए कई योजनाएं चला रही है. इसके अलावा कई ग़ैर सरकारी संगठनों से भी इस काम मे सहयोग के लिए समझौते किए जा रहे हैं. झारखंड सरकार का कहना है कि उसका उद्देश्य आदिवासी महिलाओं को रोज़गार के साथ साथ सम्मान देना भी है. 

महिला किसान सशक्तिकरण परियोजना के अंतर्गत झारखण्ड स्टेट लाईवलीहुड प्रमोशन सोसाईटी (SLPS) एवं डिजिटल ग्रीन ने एक समझौता किया है.

राज्य की आदिवासी महिलाओं के सशक्त आजीविका के जरिए आत्मनिर्भर बनाने के लिए यह समझौता किया गया है. इन दोनों ही संस्थानों ने महिलाओं के उत्थान के लिए एडवासिंग ट्राईबल लाइवलीहुड एंड सेल्फ रिलायंस (ATLAS) परियोजना के क्रियान्वयन हेतु गैर वित्तीय समझौता ज्ञापन (MOU) पर हस्ताक्षर किया है.

इस बाबत JSLPS में मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी नैन्सी सहाय और अंतर्राष्ट्रीय एनजीओ डिजिटल ग्रीन के प्रमुख कृष्णन पल्लासानी ने एमओयू साइन किया है.जेएसएलपीएस की सीईओ नैन्सी सहाय ने दावा किया है कि राज्य की करीब 20 हजार आदिवासी महिलाओं को इस पहल के जरिए उन्नत और तकनीक आधारित खेती से जोड़कर उनकी आमदनी में इजाफा किया जा सकेगा.

इसके साथ ही नैन्सी सहाय ने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर राज्य में हड़िया दारू निर्माण एवं बिक्री से जुड़ी महिलाओं को सम्मानजनक आजीविका से जोड़ा जा रहा है. फुलो झानो आशीर्वाद अभियान की लाभार्थी महिलाओं को भी इस पहल से लाभ होगा. 

उन्होंने कहा कि उन्नत तकनीक आधारित खेती, आईसीटी, डेटा एनालिसीस, किसान डायरी ऐप और उत्पादक कंपनी के प्रबंधन आदी कार्यों में भी डिजिटल ग्रीन महिला किसान सशक्तिकरण परियोजना अंतर्गत काम करेगी.

नैन्सी सहाय ने पलाश ब्राण्ड के मार्केटिंग एवं उत्पादों की बिक्री के लिए भी डिजिटल ग्रीन से काम करने की अपील की है. उन्होने डिजिटल ग्रीन को ग्रामीण महिलाओं की जिंदगी में बदलाव लाने के लिए धन्यवाद दिया और उम्मीद जताया कि इस पहल के जरिए आदिवासी महिलाएं आजीविका सशक्तिकरण की दिशा में मिसाल कायम करेंगी.

वहीं डिजिटल ग्रीन के प्रमुख कृष्णन ने कहा कि जेएसएलपीएस ग्रामीण महिलाओं के विकास के लिए लगातार काम कर रही है. 

उन्होंने कहा कि हमारी टीम और जेएसएलपीएस की कोशिश से अरहर की खेती करने वाली महिलाओं का उपज तीन गुणा बढ़ाया जा सका है. एटलस परियोजना के तहत हमारा प्रयास राज्य की आदिवासी महिलाओं और उत्पादक कंपनियों को आत्मनिर्भर बनाना है.

एटलस परियोजना का लक्ष्य राज्य की 20 हजार आदिवासी महिलाओं को तकनीक आधारित उन्नत खेती से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाना है, जिसके अंतर्गत एफपीओ से जुड़ी महिलाओं को एडवाइजरी सेवाएं, वीडियो आधारित प्रशिक्षण, क्षमतावर्धन जैसे काम किए जाएंगे.

 इस साझा पहल से उत्पादक कंपनियों को आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिलेगी ताकि समुदाय के स्वामित्व वाली किसान उत्पादक कंपनियां लाभ कमाने वाली कंपनी बन सके और सभी सदस्यों को अच्छी आमदनी हो.

इसके अंतर्गत किसान डायरी मोबाइल ऐप की सुविधा भी उत्पादक कंपनी के किसानों को मिल सकेगी जिससे उनके मार्केटिंग, संग्रहण और दूसरे कामों से जुड़े डेटा विभिन्न अनुश्रवण एवं डेटा एनालिसीस में इस्तेमाल होगा ताकि उसके आधार पर उनकी गतिविधियों में और सुधार लाया जा सकेगा.

डिजिटल ग्रीन के साथ हुए इस समझौते के तहत महिला किसान सशक्तिकरण परियोजना अंतर्गत चुनिंदा किसान उत्पादक कंपनियों को एडवाइजरी सेवा, चैटबोट के जरिए तकनीकी मदद और अलग अलग कामों से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी. इस पहल से उत्पादक कंपनी के किसानों को आत्मनिर्भर और अच्छी आमदनी सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी.

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