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मध्य प्रदेश में आदिवासी छात्रों के साथ अभद्र भाषा के इस्तेमाल पर पुलिसकर्मी निलंबित

यह कार्रवाई 13 अक्टूबर को भोपाल में आदिवासी छात्रों और गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के छात्र विंग से जुड़े युवाओं के प्रदर्शन के बाद की गई है.

मध्य प्रदेश सरकार ने बुधवार को भोपाल में एक पुलिस थाना प्रभारी को सस्पेंड कर दिया. उन पर आरोप है कि उन्होंने एक विरोध प्रदर्शन के दौरान आदिवासी छात्रों के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की और अपशब्द कहे.

एक अधिकार ने बताया कि यह घटना मंगलवार को हुई थी, जिसके बाद मिसरोद पुलिस थाने के प्रभारी रतन सिंह परिहार को सस्पेंड कर दिया गया.

न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, भोपाल पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने इस मामले में विभागीय जांच के आदेश भी दिए हैं.

अधिकारी ने कहा, “विभागीय जांच में मामले से जुड़े तथ्यों की पड़ताल की जाएगी और जो भी नतीजे सामने आएंगे, उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी.”

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस घटना की जांच के आदेश दिए हैं.

वहीं कांग्रेस ने इस मामले में शामिल पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की है. पार्टी का कहना है कि ये टिप्पणियां आदिवासी पहचान और उनके आत्म-सम्मान का अपमान हैं.

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, मंगलवार को गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के युवा विंग ने आदिवासी छात्रों की समस्याओं को लेकर एक विरोध प्रदर्शन आयोजित किया था.

इस विरोध प्रदर्शन में शिक्षा से जुड़ी कई समस्याएं उठाई गईं, जिनमें निजी शिक्षण संस्थानों द्वारा मनमानी फीस वसूलना, छात्रवृत्ति और वित्तीय सहायता मिलने में देरी या कमी, और आदिवासी छात्रावासों में सुविधाओं का अभाव जैसे मुद्दे शामिल थे.

इसी विरोध प्रदर्शन का सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें प्रदर्शनकारियों को “जय जोहार” का नारा लगाते हुए देखा जा सकता है, जो आदिवासियों द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला एक पारंपरिक अभिवादन है.

वीडियो में पुलिस थाना प्रभारी इस नारे पर आपत्ति जताते हुए और विरोध कर रहे आदिवासी छात्रों के खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल करते हुए दिखाई दे रहे हैं.

सोशल मीडिया पर वीडियो सामने आने के बाद कांग्रेस और अन्य आदिवासी संगठनों ने परिहार के खिलाफ कार्रवाई की मांग की.

थाना प्रभारी तत्काल प्रभाव से सस्पेंड

इसके बाद भोपाल के ज़ोन-2 के डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (DCP) कार्यालय द्वारा 14 अक्टूबर को जारी सस्पेंशन आदेश में सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो का जिक्र है. इस वीडियो में इंस्पेक्टर ड्यूटी के दौरान आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए दिखाई दे रहे हैं.

आदेश में कहा गया है कि वीडियो में दिखा उनका बर्ताव मध्य प्रदेश पुलिस की छवि को नुकसान पहुंचा सकता है, इसलिए इस मामले की विस्तृत जांच जरूरी है.

आदेश के अनुसार, मिसरोद पुलिस स्टेशन के प्रभारी इंस्पेक्टर रतन सिंह परिहार को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है.

सस्पेंशन के दौरान, वे भोपाल में पुलिस रिजर्व लाइन्स से जुड़े रहेंगे और नियमों के अनुसार उन्हें निर्वाह भत्ता (subsistence allowance) मिलता रहेगा.

यह कार्रवाई 13 अक्टूबर को भोपाल में आदिवासी छात्रों और गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के छात्र विंग से जुड़े युवाओं के प्रदर्शन के बाद की गई है.

इस दौरान हुई बहस का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसकी आदिवासी संगठनों और विपक्षी नेताओं ने कड़ी आलोचना की. इंस्पेक्टर पर प्रदर्शनकारियों के साथ अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने का आरोप है. इसमें उनके द्वारा ‘जय जोहार’ अभिवादन का इस्तेमाल करने से जुड़ी टिप्पणी भी शामिल है.

‘जोहार’ या ‘जय जोहार’ का मतलब ‘अभिवादन और स्वागत’ होता है. मध्य भारत के आदिवासी समुदायों में इसका इस्तेमाल किया जाता है.

लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने बताया कि मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस घटना का तुरंत संज्ञान लिया और अधिकारियों से चर्चा करने के बाद कार्रवाई के निर्देश दिए.

पटेल ने कहा, “मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, जिनके नेतृत्व में राज्य सरकार आदिवासियों के गौरव, आत्म-सम्मान, उन्नति और प्रगति के लिए प्रतिबद्ध है. उन्होंने इस घटना के संज्ञान में आते ही पूरी संवेदनशीलता के साथ इस पर ध्यान दिया.”

उन्होंने आगे बताया कि इस घटना के लिए प्रथम दृष्टया इंस्पेक्टर जिम्मेदार हैं. मुख्यमंत्री के निर्देश पर उन्हें निलंबित कर दिया गया है और मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं.

पटेल ने विवाद के केंद्र में रहे जय जोहार के महत्व पर भी जोर दिया. उन्होंने कहा, “मध्य प्रदेश में ‘जय जोहार’ सम्मानसूचक शब्द है. यह आदिवासी समाज के गौरव और आत्म-सम्मान का प्रतीक है, और सभी को इसका सम्मान करना चाहिए.”

राजनीतिक नेताओं द्वारा इस शब्द के इस्तेमाल का जिक्र करते हुए पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री यादव ने खुद भी ‘जय जोहार’ का उपयोग किया है. इससे सरकार का यह रुख स्पष्ट होता है कि इस शब्द को आदिवासी समुदायों के प्रति सम्मान के प्रतीक के रूप में देखा जाना चाहिए.

पुलिसकर्मियों के खिलाफ दर्ज हो FIR

उधर विपक्ष के नेता उमंग सिंघार ने छात्रों के साथ हुए कथित दुर्व्यवहार की निंदा की और मांग की कि इसमें शामिल पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज की जाए.

उमंग सिंघार ने कहा कि यह घटना बेहद गंभीर और निंदनीय है. उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस अधिकारी ने आदिवासी छात्रों के खिलाफ “अपशब्दों” का इस्तेमाल किया, क्योंकि वे “जोहार” कह रहे थे और संविधान तथा लोकतंत्र की रक्षा के लिए अपनी आवाज़ उठा रहे थे.

उन्होंने कहा, “‘जोहार’ शब्द कोई गाली नहीं है, बल्कि यह हमारी आदिवासी संस्कृति, पहचान, आत्म-सम्मान और गौरव का प्रतीक है! यह अभिवादन प्रेम, सम्मान और भाईचारे का संदेश देता है. हमारी संस्कृति और पहचान का अपमान किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.”

मुख्यमंत्री मोहन यादव पर निशाना साधते हुए सिंघार ने कहा कि वर्दी की ताकत का इस्तेमाल नागरिकों को अपमानित करने के लिए नहीं, बल्कि उनके अधिकारों की रक्षा के लिए किया जाना चाहिए.

उन्होंने कहा, “कानून लागू करने वालों से यह उम्मीद की जाती है कि वे कानून और संविधान का सम्मान करें. अगर किसी पुलिस अधिकारी ने अपने पद का दुरुपयोग किया है, तो उसे जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए.”

सिंघार ने मांग की कि उस अधिकारी के खिलाफ FIR दर्ज की जाए और उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए.

उन्होंने इस विवाद को आदिवासी पहचान और संवैधानिक अधिकारों के सम्मान से जोड़ते हुए अपनी बात “जय जोहार, जय आदिवासी और जय संविधान” के नारों के साथ समाप्त की.

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