75 प्रतिशत नौकरी आदिवासी और मूल निवासी को दो, JMM का TATA को अल्टीमेटम

जेएमएम के विधायकों का कहना है कि अगर टाटा संस उनकी माँगो पर ध्यान नहीं देती है तो फिर कंपनी की आर्थिक नाकेबंदी की जाएगी. पार्टी के विधायकों ने चेतावनी दी है कि इस नाकेबंदी में कंपनी के लिए कच्चा माल अंदर नहीं जाने दिया जाएगा. इसके साथ ही कंपनी में तैयार माल को भी बाज़ार तक नहीं पहुँचने दिया जाएगा.

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झारखंड मुक्ति मोर्चा ने टाटा संस को आर्थिक नाकेबंदी की चेतावनी दी है. पार्टी का कहना है कि 20 दिन के भीतर अगर कंपनी ने उनकी माँग नहीं मानी तो यह कार्यवाही की जाएगी. 

झारखंड को कोलहन क्षेत्र के विधायकों ने टाटा कंपनी से माँग की है कि यहाँ टाटा कंपनी की सभी इकाइयों में आदिवासी और स्थानीय लोगों को नौकरी में प्राथमिकता दी जाए. इन विधायकों ने माँग की है कि कंपनी कुल कर्मचारियों और मज़दूरों में कम से कम 75 प्रतिशत संख्या स्थानीय और आदिवासियों की होनी चाहिए.

टाटा कंपनी ने प्रस्ताव रखा है कि उससे जुड़े टैक्स अधिकार क्षेत्र (Tax Jurisdiction) को झारखंड से पुणे किया जाए. झारखंड मुक्ति मोर्चा के विधायकों ने इस प्रस्ताव का भी विरोध किया है. 

जेएमएम के विधायकों का कहना है कि अगर टाटा संस उनकी माँगो पर ध्यान नहीं देती है तो फिर कंपनी की आर्थिक नाकेबंदी की जाएगी. पार्टी के विधायकों ने चेतावनी दी है कि इस नाकेबंदी में कंपनी के लिए कच्चा माल अंदर नहीं जाने दिया जाएगा. इसके साथ ही कंपनी में तैयार माल को भी बाज़ार तक नहीं पहुँचने दिया जाएगा. 

घाटशिला के विधायक रामदास सोरेन ने मीडिया से बात करते हुए कहा है कि कंपनी को 20 दिन का समय दिया गया है. अगर इस बीच में कंपनी उनकी बात नहीं सुनती है तो फिर पार्टी को आर्थिक नाकेबंदी का कदम उठाना पड़ेगा.

रामदास सोरेन ने बताया कि यह फ़ैसला कोलहन क्षेत्र के कम से कम 8 विधायकों की बैठक में लिया गया है. इस बैठक की अध्यक्षता झारखंड मुक्ति मोर्चा के उपाध्यक्ष चम्पाई सोरेन ने की थी.

इन सभी विधायकों ने मिल कर चम्पाई सोरेन को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ इस मसले पर चर्चा के लिए ज़िम्मेदारी दी है. इन विधायकों का कहना है कि झारखंड में टाटा ग्रुप की कंपनी की फ़ैक्ट्री हैं तो फिर कॉरपॉरेट ऑफिस भी यहीं होना चाहिए.

चम्पाई सोरेन ने मीडिया से कहा कि झारखंड मुक्ति मोर्चा राज्य में सरकार चला रही है. इसलिए पार्टी की यह ज़िम्मेदारी है कि वो आदिवासी और स्थानीय नौजवानों के भविष्य के लिए काम करे. 

इस पूरे मामले पर अभी तक टाटा ग्रुप की तरफ से कोई प्रतिक्रिया या बयान नहीं दिया गया है. लेकिन कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया है कि टाटा कंपनी दबाव में है और इस पूरे मसले पर कंपनी के उच्च अधिकारी चर्चा कर रहे हैं. 

राज्य सरकार या मुख्यमंत्री कार्यालय से भी अभी तक इस मसले पर कुछ नहीं कहा गया है. 

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