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केरल: आदिवासी लड़के को फंसाया, 13 अधिकारियों पर ST एक्ट में केस दर्ज

केरल राज्य अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति आयोग के हस्तक्षेप के बाद वन अधिकारियों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है.

केरल पुलिस ने इडुक्की के कन्नमपडी में एक आदिवासी युवक को अवैध शिकार के झूठे मामले में फंसाने वाले वन अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है. उप्पुथरा पुलिस ने सोमवार को पूर्व इडुक्की वन्यजीव वार्डन बी. राहुल समेत वन विभाग के 13 अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक केस दर्ज किया.

अधिकारियों के अनुसार, वर्तमान कार्रवाई केरल के राज्य अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति आयोग के हस्तक्षेप के बाद की गई. आदिवासी युवक की शिकायत के आधार पर आयोग के अध्यक्ष बी.एस. मावोजी ने पुलिस उपाधीक्षक पीरुमादे को अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था. आयोग ने इस मामले में पुलिस से 15 दिनों के भीतर रिपोर्ट मांगी है.

जिसके बाद पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 341, 323, 294 (बी), 506, 330, 201, 34 और अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया. पीरुमादे के डीएसपी जे. कुरियाकोस ने बताया, वन अधिकारियों पर हिरासत में यातना, मौखिक दुर्व्यवहार, अवैध हिरासत, साजिश और सबूतों के साथ छेड़छाड़ जैसे अपराधों के लिए केस दर्ज किया गया है.

पुलिस के अनुसार, आरोपियों की सूची में श्री राहुल, वनपाल अनिल कुमार के साथ-साथ बीट वन अधिकारी लेनिन, जिम्मी, शिबिन दास, महेश और शिजीराज और वन रक्षक मोहनन, जयकुमार, संतोष, गोपालकृष्णन और लीलामणि का नाम शामिल है.

इडुक्की में उप्पुथरा के पास वलाकोड के निवासी 24 वर्षीय सरून साजीमोन को कथित तौर पर जंगली मांस बेचने की कोशिश करने के आरोप में 20 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था. गिरफ्तारी के बाद परिवार ने उच्चाधिकारियों के समक्ष शिकायत दर्ज करायी और अवैध शिकार के झूठे मामले को वापस लेने की मांग को लेकर भूख हड़ताल की.

वन विभाग द्वारा एक उच्च स्तरीय जांच से पता चला कि अधिकारियों ने आदिवासी युवक पर अवैध शिकार का झूठा मामला दर्ज किया था. बता दे कि वन विभाग ने आरोपी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई तो की थी, लेकिन सरुन के खिलाफ मामला निरस्त नहीं किया गया. केरल सरकार ने सरुन के खिलाफ मामला वापस लेने की परिवार की याचिका पर अभी तक कोई सुनवाई नहीं की है.

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