क्षेत्रीय भाषा विवाद: झारखंड में आदिवासी छात्र उतरे सड़कों पर

एसीएस के सदस्यों ने आरोप लगाया कि हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली सरकार उन वादों को भूल रही है जिन पर वह सत्ता में आई थी.

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आदिवासी छात्र संघ (एसीएस) के सदस्यों ने शुक्रवार को झारखंड के राजपत्र में भोजपुरी, मैथिली, माघी और अंगिका को क्षेत्रीय भाषाओं के रूप में शामिल किए जाने के फैसले के विरोध में अल्बर्ट एक्का चौक पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का पुतला फूंका.

इससे पहले सदस्यों ने जेल चौक से अलबर्ट एक्का चौक तक जुलूस निकाला.

एसीएस अध्यक्ष सुशील उरांव ने कहा, ‘भोजपुरी, मैथिली, माघी और अंगिका को शामिल करने का राज्य सरकार का फैसला गलत है. यह सब बिहार की क्षेत्रीय भाषाएँ हो सकती हैं लेकिन झारखंड की नहीं. यहां तक ​​कि बांग्ला और उड़िया भी राज्य की क्षेत्रीय भाषा नहीं हैं.”

एसीएस के दूसरे सदस्यों ने आरोप लगाया कि हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली सरकार उन वादों को भूल रही है जिन पर वह सत्ता में आई थी. उन्होंने कहा कि भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार की स्थानीय निवासियों की नीति में सुधार, और 1932 के भूमि रिकॉर्ड के आधार पर इसे फिर से तैयार करने के वादों पर कोई काम नहीं किया गया है.

एसीएस सदस्यों ने यह भी दावा किया कि वर्तमान सरकार को बाहरी लोगों की ज्यादा चिंता है, और नियुक्ति नियमों में बदलाव के नाम पर वह उनके लिए वेकेंसी बना रही है.

एसीएस ने सरकार से पड़ोसी राज्यों में बोली जाने वाली भाषाओं को झारखंड की क्षेत्रीय भाषा सूची से हटाने की मांग की है.

एसीएस ने कहा कि प्रशासन को 1932 के भूमि रिकॉर्ड्स के आधार पर स्थानीय निवासियों की नीति तैयार करनी चाहिए, लाखों बैकलॉग वेकेंसी को भरने के लिए नियम बनाना चाहिए, और नियुक्ति शुरू करने के लिए तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए.

हाल ही में धनबाद और बोकारो जिलों में भी भोजपुरी, माघी और अंगिका को शामिल किए जाने के विरोध में प्रदर्शन हुए हैं.

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