भूमिहीन आदिवासी परिवारों को मिलेगा ज़मीन का पट्टा

कलेक्टर ए. गीता ने आश्वासन दिया है कि पट्टों से संबंधित उनके मुद्दों को दो महीने में हल किया जाएगा.

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केरल के वायनाड में जिला कलेक्टर ए गीता इस हफ्ते तिरुनेल्ली ग्राम पंचायत के काकेरी और नेदुमतना गांवों का दौरा कर रही हैं.

वायनाड जिला प्रशासन वन अधिकार अधिनियम (FRA) के तहत भूमिहीन आदिवासी परिवारों को ज़मीन का पट्टा देने में तेजी लाने के लिए कमर कस रहा है.

वायनाड जिला कलेक्टर ए गीता के नेतृत्व में राजस्व विभाग के अधिकारियों की एक टीम ने बुधवार को 111 भूमिहीन आदिवासी परिवारों को पट्टा देने की प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए काट्टुनायकन और पनिया जनजातियों के दो दूर दराज के गांवों काकेरी और नेदुमतना का दौरा किया.

बस्तियों के आदिवासियों ने पट्टे की कमी पर अपनी चिंताओं को कलेक्टर के साथ साझा किया. उन्होंने कहा कि पट्टे की कमी ने उन्हें कई सरकारी फायदों से वंचित कर दिया है.

कलेक्टर ने उन्हें आश्वासन दिया कि पट्टों से संबंधित उनके मुद्दों को दो महीने में हल किया जाएगा.

आदिवासियों ने इलाके में बढ़ते वन्यजीवों के हमलों, अपने बच्चों की शिक्षा जारी रखने के लिए सुविधाओं की कमी, और पिछले मॉनसून में अपने घरों के नष्ट होने का मुआवजा देने के लिए सरकारी अधिकारियों की कथित लापरवाही जैसे मुद्दों को भी उठाया.

आदिवासी कल्याण विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जिले के 8,255 भूमिहीन आदिवासी परिवारों ने वन अधिकार अधिनियम के तहत भूमि के लिए आवेदन किया था, जिनमें से 4,541 परिवारों को कब्जा प्रमाण पत्र मिला.

आदिवासी बस्तियों में वन अधिकार समितियों ने अलग अलग वजहों से 3,074 आदिवासी परिवारों के आवेदन को खारिज कर दिया.

आंकड़ों के अनुसार, 413 आवेदनों पर काम चल रहा है, और बाकी अभी भी लंबित हैं.

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