कुपोषण से बच्चों की मौत पर शिंदे सरकार के मंत्रियों के विरोधाभासी दावे

महाराष्ट्र के अमरावती जिले के मेलघाट में कुपोषण का मुद्दा विधानसभा में विपक्षी नेता अजीत पवार ने उठाया था. अजीत पवार पिछले 19 और 20 अगस्त को मेलघाट के आदिवासी इलाकों का दौरा किया था. जिसके बाद उन्होंने सभागृह में कहा कि सरकार किसकी है, यह महत्वपूर्ण नहीं है, आदिवासियों का विकास नहीं हुआ है, यह अहम है.

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महाराष्ट्र में कुपोषण से होने वाली मौतों पर परस्पर विरोधी जानकारी गुरुवार को विधानसभा से सामने आई जब एकनाथ शिंदे-देवेंद्र फडणवीस सरकार के मंत्रियों ने एक-दूसरे के दावों का खंडन किया.

राज्य में कुपोषण के चलते किसी बच्चे की मौत नहीं हुई है. आदिवासी विकास मंत्री विजय कुमार गावित ने प्रश्नकाल के दौरान विधानसभा में यह दावा किया. उन्होंने कहा कि बच्चों की मौत दूसरी बीमारियों के चलते हुई. उनका कहना है कि बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने के चलते उन्हें बीमारियां हुईं और उनकी मौत हो गई.

जबकि महिला एवं बाल विकास मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने स्वीकार किया कि कुपोषण से होने वाली मौतें केवल महाराष्ट्र तक ही सीमित नहीं है.

इस बीच वन मंत्री सुधीर मुनगंटीवार और शिवसेना विधायक आदित्य ठाकरे के बीच एक बहस भी छिड़ गई. जब आदित्य ठाकरे ने टिप्पणी की कि आदिवासी समाज की हालत बहुत ही चिंताजनक है. जब भी हम उन इलाकों का दौरा करते हैं, बहुत ही दुख होता है. हम सभी को शर्म आनी चाहिए कि आजादी के 75 साल बाद भी कुपोषण से होने वाली मौतों पर अंकुश नहीं लगाया जा सका.

दरअसल महाराष्ट्र के अमरावती जिले के मेलघाट में कुपोषण का मुद्दा विधानसभा में विपक्षी नेता अजीत पवार ने उठाया था. अजीत पवार पिछले 19 और 20 अगस्त को मेलघाट के आदिवासी इलाकों का दौरा किया था. जिसके बाद उन्होंने सभागृह में कहा कि सरकार किसकी है, यह महत्वपूर्ण नहीं है, आदिवासियों का विकास नहीं हुआ है, यह अहम है.

सदन में कुपोषण से होने वाली मौतों के मुद्दे पर लगातार दूसरे दिन बहस हुई. लेकिन विजय कुमार गावित अपने रुख पर अड़े रहे कि महाराष्ट्र में पिछले पांच वर्षों में कुपोषण के कारण कोई मौत नहीं हुई है.

प्रश्नकाल के दौरान, विधायकों ने कहा कि आदिवासी आबादी वाले 16 जिलों में राज्य की नवसंजीवनी योजना को लाया गया, जो इन क्षेत्रों में माताओं और बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार करना चाहता है.

वहीं कांग्रेस विधायक कुणाल पाटिल ने कहा कि इन 16 जिलों में पिछले पांच वर्षों में कुपोषण के कारण 8,842 बच्चों की मौत हुई है और इसलिए इस योजना की कमियों को दूर करने की जरूरत है.

जिसके बाद आदिवासी विकास मंत्री ने जवाब दिया कि मृत्यु समय से पहले जन्म, जन्म के समय कम वजन, सेप्सिस, सांस की तकलीफ, जन्मजात विसंगति, जन्म के समय श्वासावरोध सहित अन्य कारकों के कारण हुई, लेकिन मौत कुपोषण से संबंधित नहीं थे.

पूर्व गृह मंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के विधायक दिलीप वालसे पाटिल ने कहा कि मंत्री ने जिन कारणों का उल्लेख किया है, वे कुपोषण से संबंधित हैं. और कांग्रेस नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने गावित की टिप्पणी को असंवेदनशील बताया.

जबकि आदित्य ठाकरे ने कहा कि आदिवासी विकास मंत्री द्वारा साझा की गई जानकारी स्पष्ट रूप से झूठी थी और इन क्षेत्रों का दौरा करके इसे खारिज किया जा सकता है. उन्होंने कहा, “हम सभी को 75 साल बाद भी कुपोषण से होने वाली मौतों को रोकने में नाकाम रहने के लिए शर्मिंदा होने की जरूरत है.”

जिसके बाद मुनगंटीवार ने इस मुद्दे को राजनीतिक बना दिया और कहा कि ठाकरे उनके पिता (पूर्व सीएम उद्धव ठाकरे) से सवाल कर रहे हैं. मुनगंटीवार ने कहा कि आदित्य ठाकरे की टिप्पणी असंसदीय है.

जैसे ही मामला गर्मागर्म बहस में बदल गया, स्पीकर राहुल नार्वेकर को उन्हें शांत करने के लिए बीच-बचाव करना पड़ा.

वहीं मंगल प्रभात लोढ़ा ने कहा, “मैं मानता हूं कि कुपोषण एक बड़ी समस्या है और यह न सिर्फ महाराष्ट्र में बल्कि पूरे देश में फैली हुई है.” उन्होंने कहा कि वह सभी संबंधित विभागों के बीच समन्वय सुनिश्चित करेंगे, जिसके लिए जिला स्तर पर एक समिति का गठन किया जाएगा.

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