नंदुरबार की 1250 आदिवासी बस्तियों को पीने का पानी पहुंचाने पर हो रहा काम

नंदुरबार पहला जिला है जहां राज्य सरकार ने बड़े पैमाने पर सौर ऊर्जा से चलने वाले नए हैंडपंप लगाने का फ़ैसला किया है.

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महाराष्ट्र सरकार ने नंदुरबार के अक्कलकुवा और धड़गांव तालुका में 1,250 से ज़्यादा दुर्गम आदिवासी बस्तियों को पीना का पानी पहुंचाने के लिए 125 करोड़ रुपए की योजना शुरु की है.

यह परियोजना केंद्र के जल जीवन मिशन (JJM) के तहत शुरू की गई है. जल जीवन मिशन का उद्देश्य देश भर के हर घर में पाइप के ज़रिए पानी उपलब्ध कराना है. वैसे तो इस तरह की एक परियोजना राज्य के गढ़चिरौली जिले में भी शुरू की गई है, लेकिन नंदुरबार पहला जिला है जहां राज्य सरकार ने बड़े पैमाने पर सौर ऊर्जा से चलने वाले नए हैंडपंप लगाने का फ़ैसला किया है.

राज्य जल आपूर्ति विभाग के प्रधान सचिव संजीव जायसवाल, राज्य जेजेएम मिशन निदेशक ऋषिकेश यशोद, नासिक संभाग के आयुक्त राधाकृष्ण गेम और नंदुरबार कलेक्टर मनीषा खत्री का परियोजना को शुरू करने में महत्वपूर्ण योगदान रहा है.

टाइम्स ऑफ़ इंडिया के मुताबिक़ नंदुरबार जिला परिषद के सीईओ रघुनाथ गावड़े का कहना है कि इस परियोजना को इन दो तालुकों के दुर्गम इलाकों में स्थित आदिवासी बस्तियों में इसलिए लागू किया जा रहा है, क्योंकि यहां पानी के छोटे टैंकरों की आवाजाही मुश्किल है.

गावड़े ने कहा, “एक बार परियोजना पूरी हो जाने के बाद स्थानीय लोगों को पीने योग्य पानी आसानी से मिल जाएगा, और उन्हें सिर्फ पानी लाने के लिए लंबी दूरी तय करने की ज़रूरत नहीं होगी.”

जिला परिषद ने 127 सोलर डुअल हैंड पंप स्थापित करने का कार्य आदेश जारी कर दिया है, और इसपर काम शुरू हो चुका है. इस काम को पूरा करने के लिए अगले चार महीनों के अंदर की समय सीमा निर्धारित की गई है.

नंदुरबार जिला एक मुश्किल इलाका है. ज़िला परिषद की टीमों ने उन बस्तियों के पास के जगहों की पहचान करना शुरू कर दिया है जहां अच्छी मात्रा में ज़मीन के नीचे पानी है, और जहां सौर हैंडपंप लगाए जा सकते हैं. यहां सौर ऊर्जा की जरूरत इसलिए है क्योंकि इन इलाक़ों में पारंपरिक बिजली आपूर्ति अनिश्चित है.

“जहां हैंडपंप लगाए जा रहे हैं, वहां सोलर पैनल और सबमर्सिबल पंप भी लगाए जाएंगे. भूमिगत जल को ओवरहेड टैंकों में पंप किया जाएगा जहां से यह पानी घरों तक पाइपों की मदद से पहुंचाया जाएगा. रात में या मॉनसून के दौरान पंपों को मैन्युअल रूप से इस्तेमाल किया जा सकता है,” गावड़े ने बताया.

इन बस्तियों में फ़िलहाल करीब 1,500 हैंडपंप हैं. अगर जिला परिषद की टीमों यह पाती हैं कि भूमिगत जल पर्याप्त रूप से उपलब्ध है, तो सौर पैनल, सबमर्सिबल पंप और ओवरहेड टैंक जैसे बुनियादी ढांचे की स्थापना की जाएगी.

अगर टीमें यह पाती हैं कि जल स्तर अच्छा नहीं है, तो नई जगहों की तलाश कर उन्हें अंतिम रूप दिया जाएगा जहां हैंडपंप लगाने के लिए अच्छी मात्रा में भूमिगत पानी है.

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