आदिवासी छात्रों को उच्च शिक्षा तक लाने के लिए ओस्मानिया यूनिवर्सिटी का ‘मिशन 1,000’

'मिशन 1,000' के हाल ही में पूरे हुए पहले चरण में काउंसलिंग के ज़रिये कुल 30 आदिवासी छात्रों को ग्रैजुएट और पोस्ट-ग्रैजुएट कॉलेजों में दाखिला मिला है.

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ओस्मानिया यूनिवर्सिटी के प्रोफेसरों, रिसर्चर और पोस्ट-ग्रैजुएट छात्र एक ख़ास मिशन पर हैं. उन्होंने ‘मिशन 1,000’ के नाम से एक पहल शुरु की है, जिसके तहत तेलंगाना के आदिवासी समुदायों के 1,000 छात्रों को शहर के कॉलेजों में दाखिला दिलाने का मक़सद है.

‘मिशन 1,000’ के हाल ही में पूरे हुए पहले चरण में काउंसलिंग के ज़रिये कुल 30 आदिवासी छात्रों को ग्रैजुएट और पोस्ट-ग्रैजुएट कॉलेजों में दाखिला मिला है.

कोविड महामारी ने आदिवासी छात्रों की पहचान कर उन्हें कॉलेजों तक लाने में एक बड़ी चुनौती पेश की है, क्योंकि ज़्यादातर आदिवासी छात्र जंगलों के बीचोंबीच या दूरदराज़ के इलाक़ों में रहते हैं. ऐसी स्थिति में 30 छात्रों को कॉलेज़ों में दाखिला दिलाना एक उपलब्धि माना जा रहा है.

मिशन के दूसरे और तीसरे चरण की काउंसलिंग के लिए ज़्यादा आदिवासी छात्रों के आगे आने की उम्मीद की जा रही है.

ओस्मानिया यूनिवर्सिटी में गणित विभाग में सहायक प्रोफेसर, सी किशोर कुमार, जो खुद भद्राचलम एजेंसी इलाक़े से आते हैं, ने द न्यू इंडियन एक्सप्रेस को बताया, “हमें यह विचार 2018 में आया था, और हमने आसिफ़ाबाद, भद्राचलम, खम्मम और आदिलाबाद के आदिवासी गांवों का दौरा कर छात्रों की पहचान करने की कोशिश की थी. हमने आदिवासी कल्याण कॉलेज़ों का भी दौरा कियाथा. फिर हमने दिल्ली यूनिवर्सिटी, आईआईटी-मद्रास और अन्यदूसरे प्रतिष्ठित संस्थानों में पढ़ने वाले कुछ आदिवासी छात्रों से संपर्क किया. हमने उनसे इन आदिवासी छात्रों तक पहुंचने की ज़रूरत पर चर्चा की, जो इंटरमीडिएट के बाद पढ़ाई छोड़ रहे थे.”

‘मिशन 1,000’ के तहत आदिवासी छात्रों को अलग-अलग कॉलेजों में विज्ञान साइंस और आर्ट्स कोर्सेस के लिए आवेदन करने के लिए मदद दी जाती है. आदिवासी छात्रों में उच्च शिक्षा के बारे में जागरुकता की कमी है, ऊपर से आदिवासी अपनी ज़मीन को छोड़कर पढ़ाई के लिए शहर आने से कतराते हैं.

इसके अलावा पैसों की कमी भी उन्हें शहर आकर पढ़ने से रोकती है. लेकिन ‘मिशन 1,000’ जैसे प्रयासों से सिर्फ़ ओस्मानिया यूनिवर्सिटी में जहां पांच साल पहले एक या दो आदिवासी छात्र थे, अब उनकी संख्या 16 हो गई है.

ऐसे कई सरकारी कर्मचारी जो आदिवासी समुदायों से हैं, वो भी छात्रों की आर्थिक मदद कर रहे हैं. इसका नतीजा यह है कि फ़िलहाल एक आदिवासी छात्र सिविल सर्विसेज़ की पढ़ाई कर रहा है, जबकि आईआईटी मद्रास जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में एडमिशन पाने वाले दो छात्रों को लैपटॉप दिए गए हैं.

कुछ साल पहले तक भी आदिकमेट और सरूरनगर में आदिवासी छात्रों के लिए बने हॉस्टल खाली पड़े थे. अब ‘मिशन 1,000’ की टीम चाहती है कि यह हॉस्टल आदिवासी छात्रों से भर जाएं, और उनको हर ज़रूरी मदद दी जाए.

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