महाराष्ट्र: छह आदिवासी औरतों की बेरहमी से पिटाई, चोरी का आरोप लगाकर पुलिस ने बाज़ार से उठाया

वावरे के बाएं हाथ पर पिटाई के निशान साफ़ दिखते हैं. उनके साथ पांच औरतें और थीं - 25 साल की तारू सुभाष दोकफोड़े, 21 साल की सोनम साबू भोइर, 35 साल की सीता संतराम भोईर, 43 साल की विमल मंकू पुजारा और 25 साल की दीपिका दिनेश वावरे.

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मल्हार कोली आदिवासी समुदाय की छह महिलाओं के लिए कपड़े और राशन खरीदने के लिए बाजार जाना काफी भारी पड़ गया. घटना महाराष्ट्र की है, जहां एक Assistant Police Inspector इन छह आदिवासी महिलाओं को चोरी के संदेह में पुलिस चौकी ले गया, और वहां उनकी खूब पिटाई की. उनका जुर्म बस यह था कि पुलिसकर्मी को लगा की वो जेबकतरे हैं.

सभी पीड़ित पालघर जिले के दहानू तालुका के कावदास गांव के रहने वाली हैं. इस घुमंतू जनजाति के कई लोगों ने हाल ही में काम की तलाश में अपना गांव छोड़ दिया और वो वसई में अस्थायी टेंटों में रह रहे हैं.

निर्माण स्थलों पर दैनिक मजदूरी की तलाश में यह आदिवासी वसई शहर के पापड़ी गाँव के पार नाका में इकट्ठा होते हैं, जहाँ से ठेकेदार उन्हें साइट पर ले जाते हैं. उनमें से कुछ को रोज़ काम मिल जाता है, जबकि बाकियों को अगले दिन तक इंतज़ार करना पड़ता है.

19 नवंबर को भी लगभग 100 आदिवासी पिकअप प्वाइंट पर जमा हुए थे. पीड़ितों को उस दिन काम नहीं मिला, तो उन्होंने वसई बाजार जाने का फैसला किया.

45 साल की बेबी नारायण वावरे ने स्थानीय अख़बार को बताया, “चूंकि हमें काम नहीं मिला, इसलिए हमने कुछ कपड़े खरीदने के लिए साप्ताहिक बाजार जाने का फैसला किया. हम उससे एक दिन पहले ही दहानू से वसई आए थे. लगभग 12:30 बजे हम बाजार गए और कुछ ब्लाउज के टुकड़े और चाय के प्याले खरीदे. हम में से कुछ अपने टिफिन बॉक्स ले जा रहे थे, क्योंकि हम काम के लिए सुबह-सुबह घर से निकल गए थे.”

वावरे के बाएं हाथ पर पिटाई के निशान साफ़ दिखते हैं. उनके साथ पांच औरतें और थीं – 25 साल की तारू सुभाष दोकफोड़े, 21 साल की सोनम साबू भोइर, 35 साल की सीता संतराम भोईर, 43 साल की विमल मंकू पुजारा और 25 साल की दीपिका दिनेश वावरे.

“हम बाजार में थे तभी अचानक दो पुलिसकर्मी हमारे पास आए और हमें वहां से कहीं न हिलने का आदेश दिया. शुरू में मुझे लगा कि हम मास्क न पहनने की वजह से पकड़े गए हैं, और इसलिए मैंने अपने चेहरे को ढकने की कोशिश की. इस बीच, एक पुलिस वाले ने एक ऑटो-रिक्शा लिया और हमें जबरदस्ती उसमें बिठा दिया. ड्राइवर को हमें पापड़ी पुलिस चौकी ले जाने के लिए कहा गया. हमें पता ही नहीं चला को हमारे साथ क्या हो रहा है,” वावरे ने कहा.

ऑटो से उतरने के बाद एपीआई विनोद वाघ इन औरतों को घसीटकर चौकी में ले गए और दरवाजा अंदर से बंद कर दिया. पीड़ितों का कहना है कि कमरे में एक और अधिकारी था लेकिन उसने उनके साथ मारपीट नहीं की. वाघ ने डंडा निकाला और कहा, ‘तुम सब चोर हो। क्या यहां पॉकेटमारी करने आए हो? अगली बार बाजार में और उसके आसपास मत दिखाई देना.’

सभी औरतों को अपनी हथेलियां आगे करने को कहा गया. वावरे को छोड़कर, सभी को उनकी हथेलियों पर मारा गया. वावरे ने बात नहीं मानी तो वाघ ने उनके बाएं हाथ पर तीन बार मारा. उनके हाथ पर नील पड़ गया है, और वो अपना हाथ भी नहीं हिला पा रही हैं.

वावरे के बांए हाथ पर चोट के निशान हैं

यह आदिवासी हर रोज मुश्किल से 300 से 400 कमाते हैं, और अब चोटों की वजह से काम पर नहीं जा पा रहे हैं.

वावरे पर अपने छह लोगों का परिवार चलाने की जिम्मेदारी है. वो कहती हैं, “हम गरीब हैं लेकिन चोर नहीं. हम अपना जीवन यापन करने के लिए धूप में पसीना बहाते हैं. पुलिस को महिलाओं का सम्मान करना चाहिए. हमने अपनी पहचान साबित करने के लिए अपने आधार कार्ड भी दिखाए कि हम चोर नहीं हैं, लेकिन वो लोग सुनने को तैयार नहीं थे. मुझे अब पुलिस वालों से डर लगता है. क्या वे यहां हमारी रक्षा करने के लिए हैं, या हम पर हमला करने के लिए?”

‘गरीब होने की कीमत चुकाई हमने’

एक अन्य पीड़िता दीपिका ने कहा, “हमारे पास लंच बॉक्स थे. कौन सा चोर लंच बॉक्स लेकर अपराध करने जाता है? पुलिस ने हम पर सिर्फ इसलिए हमला किया क्योंकि हम गरीब हैं. हम हाथ जोड़कर और आंखों में आंसुओं के साथ अपनी बेगुनाही की बात कहते रहे, लेकिन वो हमारे साथ मारपीट करता रहा. चौकी पर कोई महिला अधिकारी भी मौजूद नहीं थी. हमें करीब 30 मिनट तक वहीं रखा गया. वाघ ने हमें धमकाया कि हम दोबारा बाजार न जाएं वरना हमारे साथ फिर मारपीट की जाएगी. बाजार नहीं जाएंगे तो राशन और सब्जियां कहां से खरीदेंगे? और क्या हमें सिर्फ इसलिए बाजार नहीं जाना चाहिए क्योंकि हम आदिवासी हैं और दलित वर्ग के लोग हैं? हमने बस गरीब होने की कीमत चुकाई है.”

एपीआई वाघ ने कहा, “मैंने किसी के साथ मारपीट नहीं की. शिकायत मिलने पर मैं उन्हें पुलिस चौकी ले गया. बाजार में जेबकतरे की घटनाएं बढ़ती ही जा रही हैं. मुझे झूठ बोलकर फंसाया जा रहा है. पुलिस चौकी के अंदर लगे सीसीटीवी फुटेज से सब कुछ पता चल जाएगा.”

डीसीपी संजय कुमार पाटिल ने कहा कि घटना के बाद, वाघ को मीरा रोड स्थित मीरा भयंदर वसई विरार पुलिस कमिश्नरेट के नियंत्रण कक्ष में ट्रांसफर कर दिया गया. मामले की जांच की जा रही है. स्थानीय निवासियों समेत कई लोगों के बयान दर्ज किए गए हैं.

(Image Courtesy: Mid-Day)

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