हाटी समुदाय को जल्द मिलेगी अच्छी खबर- सीएम जयराम ठाकुर

अभी तक केन्द्र सरकार से भी जो संकेत मिले हैं उनसे लगता है कि अब हाटी समुदाय को जनजाति का दर्जा दिए जाने का फ़ैसला कर लिया गया है. हालाँकि सिरमौर के दलित संगठन हाटी समुदाय को जनजाति का दर्जा दिए जाने का विरोध भी कर रहे हैं.

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हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) सरकार ने सिरमौर जिले के हाटी समुदाय (Hattee community) को जनजातीय दर्जा देने के मुद्दे को प्रभावी ढंग से उठाया है और केंद्र सरकार की ओर से हाटी समुदाय के लिए जल्द ही अच्छी खबर मिलेगी. मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर (Jai Ram Thakur) ने सिरमौर जिले के ट्रांस-गिरी क्षेत्र के हटी समुदाय को आश्वासन दिया कि उसे जल्द ही अच्छी खबर मिलेगी, क्योंकि राज्य सरकार ने केंद्र सरकार के साथ आदिवासी दर्जे की उनकी मांग को प्रभावी ढंग से उठाया था.

जयराम ठाकुर ने शुक्रवार को सिरमौर जिले के रेणुकाजी में यह बात कही. वो यहां प्रगतिशील हिमाचल स्थापना के 75 वर्ष कार्यक्रम में उपस्थित जनसभा को संबोधित कर रहे थे.

इससे पहले के बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा (JP Nadda) ने भी हिमाचल प्रदेश नेताओं को संबोधित करते हुए आश्वासान दिया था कि हाटी समुदाय को जल्दी ही जनजाति का दर्जा मिलेगा. एक लंबे इंतजार के बाद हिमाचल प्रदेश में हाटी समुदाय को जल्दी ही जनजातीय का दर्जा मिलने की उम्मीद बढ़ी है.

सिरमौर और शिमला क्षेत्र में बड़े पैमाने पर केंद्रित हाटी समुदाय द्वारा आदिवासी दर्जे की लंबे समय से मांग की जा रही है. आदिवासी का दर्जा भी एक चुनावी मुद्दा है क्योंकि राज्य में हाटी समुदाय की आबादी करीब 3 लाख है.

हिमाचल प्रदेश में अगले दो-तीन महीने के भीतर ही विधानसभा चुनाव होंगे. पिछले विधानसभा चुनाव के घोषणा पत्र में पार्टी ने यह वादा किया था कि वो हाटी समुदाय को जनजाति का दर्जा देगी. ऐसे में उम्मीद है कि चुनाव से पहले बीजेपी अपना ये वादा पूरा करेगी.

क्या है पूरा मामला

दरअसल गिरीपार क्षेत्र के हाटी समुदाय के लोगों की ओर से जनजाति क्षेत्र घोषित करने की मांग हिमाचल प्रदेश के पूर्ण राज्य बनने से पहले 1967 से ही उठ रही थी. फिर 1983 में इसके लिए केंद्रीय हाटी समिति को पंजीकृत किया गया और इसके बाद इसकी मांग पुरजोर तरीके से उठने लगी.

हालांकि इसके बाद कई सरकारें आई और सभी सरकारों की ओर से हाटी समुदाय को जनजातीय घोषित करने का समर्थन मिलता रहा. साल 2009 में बीजेपी की ओर से हाटी समुदाय को जनजातीय घोषित करने के मामले को अपने घोषणापत्र में भी शामिल किया गया था.

इसके बाद साल 2014 में वर्तमान में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपने सिरमौर जिला के दौरे के दौरान हाटी समुदाय को जनजाति का दर्जा दिलाने की घोषणा की थी. वहीं पिछले चार वर्षों में इस मामले में तेज़ी देखी गई और केंद्रीय हाटी समिति, स्थानीय सांसद और मुख्यमंत्री की अगुवाई में कई दल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री से मिले और इस मामले में तेज़ी लाने की मांग समय-समय पर उठाते रहे.

2011 की जनगणना के अनुसार हिमाचल प्रदेश में जनजातीय लोगों की कुल जनसंख्या 3 लाख 92 हज़ार 126 है जो प्रदेश की कुल जनसंख्या का 5.7 फीसदी है. जनजातीय क्षेत्र की बात की जाए तो हिमाचल प्रदेश के कुल क्षेत्र 55673 वर्ग किलोमीटर में से 23655 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र आता है जो कुल क्षेत्रफल का 42.49 फीसदी है.

हिमाचल प्रदेश में अभी तक 10 जातियों- भोट, गद्दी, गुजर, लाहौला, स्वांगला, बेडा, किन्नौरा और लांबा को जनजाति का दर्जा दिया गया है.

इसी का नतीजा है कि अब गिरीपार के क्षेत्र को जनजातीय क्षेत्र घोषित करने की जल्द ही घोषणा होने की आस हाटी समुदाय के लोग लगाए बैठे हैं. हाटी समुदाय लोग आस लगाए बैठें हैं कि गिरीपार क्षेत्र को अनुसूचित जनजाति क्षेत्र घोषित करने के लिए सभी औपचारिकताएं पूरी हो चुकी हैं और संसद के इस मानसून सत्र में उन्हें यह दर्जा दिया जा सकता है.

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