निर्मला पुतुल मूर्मु: कविता, संघर्ष और बदलाव की भूख लिए एक संताली औरत

निर्मला पुतुल दो दशकों से अधिक समय से आदिवासी महिलाओं के विस्थापन, पलायन, उत्पीड़न, लैंगिक भेदभाव, मानवाधिकार, संपत्ति का अधिकार जैसे विषयों पर व्यक्तिगत, सामूहिक और संस्थागत स्तर पर सक्रिय रही हैं. 

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निर्मला पुतुल मूर्मु को दुनिया एक कवियत्री के तौर पर जानती है. उनकी कविताओं के लिए उन्हें साहित्य से जुड़े बड़े बड़े सम्मान मिले हैं. लेकिन जब मैंने उनसे पूछा कि वो अपने कौन से परिचय से जुड़ा हुआ महसूस करती हैं. इस सवाल के जवाब में निर्मला पुतुल कहती हैं कि वो तो एक सामाजिक कार्यकर्ता को ही अपना परिचय मानती हैं.

वो कहती हैं कि एक सामाजिक कार्यकर्ता के तौर पर अपने समुदाय में उन्होंने जो घटते देखा उसे दर्ज करती चली गई. इसके अलावा उन्होंने अपने आस-पास और ख़ासतौर से अपने समाज की औरतों की दशा को समझा. एक कार्यकर्ता के नाते जब वो इन मसलों को समझ रही थीं तो इन मसलों को नोट भी कर रही थीं.

उन्होंने औरतों की व्यथा के कारणों को भी समझा और संभव निदान के लिए भी काम शुरू किया.

निर्मला पुतुल का जन्म 6 मार्च 1972 को झारखंड के दुमका ज़िले के दुधनी कुरुवा ग्राम में एक ग़रीब आदिवासी परिवार में हुआ। शिक्षा-दीक्षा सामान्य रही। आसानी से आजीविका पा सकने के लिए नर्सिंग का कोर्स किया.  उन्होंने इग्नू से राजनीतिशास्त्र में स्नातक की डिग्री प्राप्त की. 

निर्मला पुतुल दो दशकों से अधिक समय से आदिवासी महिलाओं के विस्थापन, पलायन, उत्पीड़न, लैंगिक भेदभाव, मानवाधिकार, संपत्ति का अधिकार जैसे विषयों पर व्यक्तिगत, सामूहिक और संस्थागत स्तर पर सक्रिय रही हैं. 

इसके साथ ही ग्रामीण, पिछड़ी, दलित, आदिवासी और आदिम जनजाति की महिलाओं के बीच शिक्षा एवं जागरूकता के प्रसार के लिए विशेष प्रयासरत रही हैं. इस उद्देश्यों की पूर्ति के लिए प्रत्यक्ष राजनीति में उतर आने से भी परहेज़ नहीं किया और अपने गृह पंचायत से मुखिया पद के लिए चुनी गईं.

कविता-लेखन की शुरुआत मातृभाषा संताली में की थी. फिर हिंदी में भी लिखने लगी. अपनी कविताओं के विद्रोही स्वर और अपने समाज की यथार्थपरक अभिव्यक्ति के लिए उनकी खूब तारीफ़ हुई है. 

उनका पहला कविता संग्रह ‘अपने घर की तलाश में’ संताली-हिंदी द्विभाषिक संग्रह के रूप में 2004 में प्रकाशित हुआ. हिंदी के वृहत चर्चा-प्रदेश में उनका प्रवेश ‘नगाड़े की तरह बजते शब्द’ (2005) कविता-संग्रह के साथ हुआ. 

वह साहित्य अकादेमी के ‘साहित्य सम्मान’ भारतीय भाषा परिषद के राष्ट्रीय युवा सम्मान, बनारसी प्रसाद भोजपुरी सम्मान सहित कई और पुरस्कारों और सम्मानों से नवाज़ी गई हैं. इसके अतिरिक्त, उन्हें विभिन्न संस्थानों से फ़ेलोशिप प्राप्त हुए हैं.  

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