मुर्ग़े को झाड़ा दे कर काटते हैं बारेला आदिवासी

आज हम आपको दिखा रहे हैं कि बारेला समुदाय कैसे देसी मुर्ग़ा पकाते हैं. लेकिन इस पूरी प्रक्रिया में एक अहम हिस्सा है कि ये आदिवासी मुर्ग़े को काटने से पहले उसकी नज़र उतारते हैं और अपने पुरखों को याद करते हैं.

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मध्यप्रदेश के खरगोन, बड़वानी, अलिराजपुर, झाबुआ ज़िलों में भील आदिवासी बड़ी संख्या में रहते हैं. भील आदिवासियों की मौटेतौर पर तीन-चार उपजाति हैं जिनमें भील, भिलाला, बारेला और पटेलिया हैं. जुलाई महीने के दूसरे सप्ताह में मैं भी भारत की टीम मध्यप्रेदश के इन आदिवासियों से मिली.

इस दौरान हमें इन आदिवासियों को थोड़ा और क़रीब से देखने का मौक़ा मिला. इन आदिवासियों ने बेहद गर्मजोशी से हमारी टीम का स्वागत किया.

इस यात्रा के दौरान हमने इन आदिवासियों की सामाजिक-धार्मिक आस्थाओं, खेती-किसानी और ज़िंदगी के दूसरे मसलों को समझने का प्रयास किया.

इस सिलसिले में इन आदिवासियों के खान-पान को देखने और खाने का भी मौक़ा मिला. आज हम आपको दिखा रहे हैं कि बारेला समुदाय कैसे देसी मुर्ग़ा पकाते हैं. लेकिन इस पूरी प्रक्रिया में एक अहम हिस्सा है कि ये आदिवासी मुर्ग़े को काटने से पहले उसकी नज़र उतारते हैं और अपने पुरखों को याद करते हैं.

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