असम में जल्द बनेगी आदिवासी भूमि नीति

आदिवासी आबादी के भूमि अधिकारों को सुनिश्चित करने के लिए छह महीने के अंदर आदिवासी भूमि नीति लाई जाएगी.

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असम सरकार ने राज्य की आदिवासी आबादी के भूमि अधिकारों को सुनिश्चित करने के लिए छह महीने के अंदर आदिवासी भूमि नीति (Tribal Land Policy) लाने की घोषणा की है.

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कार्बी आंगलोंग के लांघिन में ऑल बोडो स्टूडेंट्स यूनियन (ABSU) के 54वें वार्षिक सम्मेलन में यह बात कही. उन्होंने यह भी बताया कि बीटीआर (Bodoland Territorial Region) के बाहर रहने वाले बोडो लोगों की सामाजिक-आर्थिक बेहतरी के लिए कदम उठाए जाएंगे.

मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐतिहासिक बोडो शांति समझौते पर हस्ताक्षर के बाद, बीटीआर ने प्रगति और विकास की तरफ में एक बड़ा क़दम बढ़ाया है.

यह कहते हुए कि ABSU न सिर्फ छात्रों, बल्कि पूरे बोडो समाज की आकांक्षाओं को आवाज़ देने में सबसे आगे रहा है, मुख्यमंत्री ने कहा कि ABSU ने सामाजिक-सांस्कृतिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. संगठन ने बोडो समुदाय को उनके राजनीतिक अधिकारों के बारे में जागरुक भी किया है.

सरमा ने यह भी कहा कि असम में सबसे बड़ा जातीय-भाषाई समूह होने के नाते, बोडो ने असमिया समाज के विकास में भी बहुत बड़ा योगदान दिया है. उनका एक गौरवशाली इतिहास और एक बहुत समृद्ध संस्कृति है.

राज्य सरकार ने असम की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए स्वदेशी आस्था और संस्कृति विभाग (Indigenous Faith and Culture) की स्थापना की है.

सरकार का दावा है कि राज्य तभी प्रगति कर सकता है जब आदिवासी आबादी का विकास सुनिश्चित हो.

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