केरल: आदिवासी इलाकों के 344 स्कूल होंगे बंद, टीचरों को स्वीपर की नौकरी की पेशकश

आदिवासी बस्ती के लोगों की लिए अपने बच्चों को इन एमजीएलसी में भेजना आसान होता है क्योंकि इससे उनके बच्चे पड़ोस में ही पढ़ते हैं.

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केरल में 31 मार्च को राज्य की आदिवासी बस्तियों में संचालित 344 एमजीएलसी यानी मल्टी ग्रेड लर्निंग सेंटर, जो एकल-शिक्षक स्कूल (single teacher school) हैं, बंद कर दिए जाएंगे.

इनमें से एक, कुन्नतुमला के एमजीएलसी में, इस आदिवासी बस्ती के पांच छात्र पढ़ते हैं. इनमें कक्षा 1 से 4 तक के बच्चे हैं.

आदिवासी बस्ती के लोगों की लिए अपने बच्चों को इन एमजीएलसी में भेजना आसान होता है क्योंकि इससे उनके बच्चे पड़ोस में ही पढ़ते हैं. इसके अलावा, उन्हें स्कूल में सुबह का नाश्ता और दोपहर का भोजन भी मिलता है.

उषा कुमारी, जो पिछले 23 वर्षों से कुन्नतुमला के एमजीएलसी की टीचर हैं, ने कई आदिवासी छात्रों को पढ़ने और लिखने के लिए तैयार किया है. लेकिन अब उन्हें शायद सफाईकर्मी बनना पड़े.

सरकार ने की सफाई कर्मचारी की नौकरी की पेशकश

हर साल, कुन्नतुमला से चौथी कक्षा पूरी करने वाले ज्यादातर छात्र कोट्टूर आदिवासी यूपीएस (Upper Primary School) में शामिल हो जाते हैं, हालांकि उनमें से कुछ पूरी तरह से पढ़ाई बंद भी कर देते हैं.

कुन्नतुमला एमजीएलसी की टीचर उषा कुमारी

“बारिश हो या धूप, मैं अपने घर से स्कूल पहुंचने के लिए रोज 14 किमी का सफर तय करती हूं. मुझे एक नाव चलानी पड़ती है और फिर वहाँ पहुँचने के लिए एक पहाड़ी पर चढ़ना होता है,” उषा कुमारी ने द न्यू इंडियन एक्सप्रेस को बताया.

उषा कुमारी की सेवा को पहचाना भी गया है. आदिवासी समुदायों के बच्चों के साथ अपने काम के लिए उन्होंने कई पुरस्कार जीते हैं.

53 साल की उषा कुमारी अब कहती हैं कि उन्होंने अभी तक छात्रों और उनके माता पिता को स्कूल बंद करने के फैसले के बारे में नहीं बताया है, क्योंकि यह समुदाय के लिए बहुत दुखद होगा.

राज्य में उच्च शिक्षा के प्रधान सचिव ए पी एम मोहम्मद हनीश फैसले के बारे में कहते हैं कि सभी छात्रों को पड़ोसी स्कूलों में दाखिला दिलाने के लिए उचित व्यवस्था की जाएगी.

दलित अधिकार कार्यकर्ता धन्या रमन ने अखबार को बताया कि MGLC को बंद करने का फैसला पिछले साल लिया गया था, लेकिन दबाव के चलते इसे एक साल के लिए टाल दिया गया.

सरकार की योजना सभी आदिवासी छात्रों का पास के मॉडल आवासीय स्कूलों में दाखिला सुनिश्चित करना है. बच्चों के लिए पंचायत की मदद से गोत्र सारथी परियोजना के तहत पिक अप और ड्रॉप भी किया जाएगा.

सरकार ने अब इन 344 शिक्षकों को सामान्य शिक्षा विभाग में स्वीपर की नौकरी की पेशकश की है. सरकार इन टीचरों की बकाया सैलरी भी जल्द देगी.

(तस्वीर प्रतीकात्मक है)

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