भाजपा का मेगा आदिवासी आउटरीच, नड्डा मिलेंगे पार्टी के एसटी नेताओं से

नड्डा इस कार्यक्रम में नेताओं को आदिवासी समुदाय के लिए नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा जारी किए गए या किए जाने वाली सभी कल्याणकारी योजनाओं के बारे में विस्तार से बताएंगे.

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भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रमुख जेपी नड्डा अपने सबसे बड़े आदिवासी आउटरीच के तहत 27 मई यानि शुक्रवार को देश भर से पार्टी के अनुसूचित जनजाति (एसटी) के नेताओं की एक बैठक को संबोधित करेंगे.

यह बैठक नई दिल्ली में पार्टी के राष्ट्रीय मुख्यालय में होने वाली है.

बैठक में सभी केंद्रीय मंत्री, मोर्चा सदस्य, वैचारिक रूप से जुड़े आदिवासी समूहों के वरिष्ठ नेताओं समेत एसटी समुदाय के सभी भाजपा सांसद भी मौजूद रहेंगे.

नड्डा इस कार्यक्रम में नेताओं को आदिवासी समुदाय के लिए नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा जारी किए गए या किए जाने वाली सभी कल्याणकारी योजनाओं के बारे में विस्तार से बताएंगे.

यह बैठक पार्टी द्वारा भाजपा के अनुसूचित जाति (एससी) के नेताओं के साथ इसी तरह के विचार-मंथन के बाद आ रही है. पार्टी के दलित नेताओं के साथ यह मुलाकात 17 मई को हुई थी.

27 मई को होने वाले कार्यक्रम में संगठन के राष्ट्रीय महासचिव बीएल संतोष, एसटी मोर्चा के केंद्रीय संगठक वी सतीश, और एसटी मोर्चा के प्रभारी दिलीप सैकिया भी मौजूद रहेंगे.

लोकसभा में 47 आरक्षित एसटी निर्वाचन क्षेत्र हैं, और सभी विधानसभाओं में एसटी निर्वाचन क्षेत्रों की संख्या समान है.

झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा और देश के सभी उत्तर पूर्वी राज्यों समेत कई राज्यों में आदिवासी समुदाय का बोलबाला है.

बैठक की अहमियत इसलिए भी है कि देश के कई राज्यों में अगले एक साल में होने वाले विधानसभा चुनावों, और 2024 के लोकसभा चुनावों में आदिवासी समुदाय को एक मज़बूत और महत्वपूर्ण वोटबैंक माना जाता है.

हिमाचल प्रदेश, गुजरात और बाद में कर्नाटक, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में, जहां एसटी समुदायों की ठीक-ठाक आबादी है, इस साल के अंत तक या अगले साल चुनाव होने वाले हैं.

17 मई को गुजरात में हुए पार्टी के एक चिंतन शिविर में भी आदिवासी सरोकार पर ज़ोर दिया गया था. बैठक में राज्य के आदिवासी इलाकों में पार्टी की पहुंच बढ़ाने और अपना पकड़ मज़बूत करने पर ख़ास चर्चा हुई थी.

यह भी फ़ैसला लिया गया था कि आदिवासी मतदाताओं का विश्वास हासिल करने के लिए पार्टी उन इलाक़ों में प्रधानमंत्री मोदी की ज़्यादा से ज़्यादा रैलियां आयोजित करेगी, जहां आदिवासी आबादी ज़्यादा है.

गुजरात के आदिवासी वोटबैंक पर सिर्फ़ बीजेपी की ही नज़र नहीं है. विपक्षी कांग्रेस और गुजरात चुनाव के मैदान में पहली बार उतर रही आम आदमी पार्टी, दोनों ही अपना ध्यान ख़ासतौर से आदिवासी इलाक़ों पर केंद्रित कर रही हैं.

राहुल गांधी ने कुछ दिन पहले ही आदिवासी बहुल जिले दाहोद में एक बड़ी रैली को संबोधित किया था. केजरीवाल एक मई को भरूच के चंदेरिया में थे. आप गुजरात में भारतीय ट्राइबल पार्टी के साथ गठबंधन में चुनाव के मैदान में उतर रही है.

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