आदिवासियों को भरोसे में लेकर वैक्सीन दे रहा है केरल, सीखें बाक़ी राज्य

जनजातीय विकास विभाग द्वारा चलाए जा रहे इस अभियान के तहत 45 वर्ष से ज़्यादा उम्र के सभी आदिवासियों को वैक्सिनेट किया जाना है. ज़िला प्रशासन ने आदिवासियों को उनकी बस्तियों से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचाने के लिए गाड़ियों की सुविधा भी दी है.

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केरल के वायनाड ज़िले में आदिवासियों के लिए कोविड टीकाकरण अभियान, गोत्र सुरक्षा, शुक्रवार को शुरू हो गया.

जनजातीय विकास विभाग द्वारा चलाए जा रहे इस अभियान के तहत 45 वर्ष से ज़्यादा उम्र के सभी आदिवासियों को वैक्सिनेट किया जाना है.

ज़िला प्रशासन ने आदिवासियों को उनकी बस्तियों से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचाने के लिए गाड़ियों की सुविधा भी दी है.

विभाग के आंकड़ों के अनुसार ज़िले में 45 वर्ष से ज़्यादा उम्र के 43,992 आदिवासी हैं. इनमें से 13,994 लोगों को वैक्सीन की पहली डोज़ दी गई, जबकि 5,323 लोगों को दूसरी डोज़.

तीन दिन के इस वैक्सिनेशन ड्राइव में बाकि बचे 29,998 आदिवासियों को वैक्सीन लगाया जाएगा. ज़िला कलेक्टर अदीला अब्दुल्ला ने मीडिया को बताया कि अगर किसी आदिवासी ने शिविर में आकर वैक्सीन लगवाने में संकोच दिखाया, तो आने वाले दिनों में उन्हें उनके गांव में जाकर वेक्सीन लगाया जाएगा.

वायनाड का यह टीकाकरण अभियान रविवार को ख़त्म होगा.

उधर, एर्णाकुलम ज़िले के कुट्टमपुझा की आदिवासी बस्तियों के निवासियों को कोविशील्ड वैक्सीन की पहली डोज़ देने का चार दिवसीय मिशन शुक्रवार को ख़त्म हो गया.

“TRIBVAX EKM” नाम के इस अभियान को ज़िले के स्वास्थ्य अधिकारियों और वन विभाग, कुट्टमपुझा पंचायत और परिवार स्वास्थ्य केंद्र के प्रतिनिधियों द्वारा संयुक्त रूप से चलाया गया.

कुट्टमपुझा की 17 बस्तियों में 18 वर्ष से ज़्यादा उम्र के कुल 3,252 लोगों में से 2,728 को वैक्सीन की पहली डोज़ दी गई. 524 लोग वैक्सीन नहीं लगवा सके क्योंकि या तो वो फ़िलहाल खुद कोविड पॉज़िटिव हैं, या ऐसे लोगों के संपर्क में हैं.

वट्टवड़ा में एक आदिवासी किसान से बात करते स्वास्थ्य कर्मचारी

राज्य में जहां एक तरफ़ इस तरह के वैक्सिनेशन आभियान चलाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ़ कई ऐसे आदिवासी हैं जिन्हें मनाने के लिए प्रशासन को काफ़ी जद्दोजहद करनी पड़ रही है.

इडुक्की ज़िले के वट्टवड़ा में स्वास्थ्य कार्यकर्ता लोगों को वैक्सिनेशन कैंप तक लाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं. स्वास्थ्य कर्मचारी अब बस्तियों के सरदारों को निवासियों को वैक्सीन लगवाने के लिए मनाने के लिए कह रहे हैं.

वट्टवड़ा की आबादी लगभग 7,500 है, लेकिन अब तक सिर्फ़ 972 वैक्सीन लगाए गए हैं. संकोच सिर्फ़ वैक्सिनेशन को लेकर नहीं है, बल्कि कोविड टेस्ट से भी लोग बच रहे हैं. इन हालात में बढ़ते मामलों के बीच स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के लिए घरों का दौरा कर निवासियों का टेस्ट करना मुश्किल हो गया है.

वट्टवड़ा में अब तक 189 पॉज़िटिव मामले सामने आए हैं. पास के कंदल्लूर में 52 एक्टिव केस हैं.

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