ढोकरा शिल्प कला के जाने-माने आदिवासी कारीगर कोवा नानेश्वर का निधन

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शिल्प गुरु पुरस्कार से सम्मानित ढोकरा कारीगर कोवा नानेश्वर की मौत हो गई है. ओझा आदिवासी समुदाय के एक अनुभवी और प्रसिद्ध ढोकरा कारीगर नानेश्वर की बुधवार को एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में इलाज के दौरान ब्रेन हैमरेज से मौत हुई.

नानेश्वर 60 साल के थे. तेलंगाना के आसिफ़ाबाद ज़िले के केसलागुडा गाँव के नानेश्वर को 2013 में ढोकरा कारीगरी पर उनकी महारथ के लिए केंद्र सरकार ने प्रतिष्ठित शिल्प गुरु पुरस्कार प्रदान किया था.

नानेश्वर इस प्रतिष्ठित पुरस्कार को जीतने वाले तेलंगाना के एकमात्र आदिवासी कारीगर थे. उन्होंने कांस्य कलाकृतियों को ढालने की कला बचपन में सीखी थी.

नानेश्वर ने कांस्य कलाकृतियों को ढालने की कला बचपन में सीखी थी

2005 में नानेश्वर को राष्ट्रीय मेधावी पुरस्कार से भी नवाज़ा गया था. उन्होंने दिल्ली, मैसूर, चेन्नई और देश भर के कई शहरों में आयोजित राष्ट्रीय प्रदर्शनियों में अपनी कला का प्रदर्शन किया है.

उन्होंने ज़िले में एक हस्तशिल्प विकास एजेंसी स्थापित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. नानेश्वर ने यह कौशल अपने बेटों, भूमेश्वर, रामचंदर और कशेश्वर को सिखाया, ताकि इस कला को और बढ़ाया जा सके.

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