गुजरात के आदिवासी इलाक़ों में कोरोना की रफ़्तार हुई तेज़, वैक्सीन डोज़ की धीमी

राज्य के कम से कम 9 ज़िलों में कोरोना की रफ़्तार थमने या कमज़ोर होने के संकेत नहीं हैं. इन ज़िलों में अमरेली, आणंद, अरावली, दाहोद, देवभूमि द्वारका, खेड़ा, महिसागर, पंचमहल और साबरकांठा शामिल हैं.

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भारत का इतिहास गवाह है कि आदिवासियों से युद्ध में कोई जीत नहीं पाया और ना ही कोई उन पर राज कर पाया. जब भी आदिवासी मारा गया धोखे का शिकार हो कर ही मारा गया.

आज के युग में सबसे बड़ा धोखेबाज़ तो कोरोना वायरस (Covid-19) ही है, जो शरीर की प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) को धोखा देकर अंदर घुस जाता है और इंसान को मारने की कोशिश करता है.

इस वायरस की पहली लहर से भी काफ़ी हद तक आदिवासी बच गए थे. लेकिन दूसरी लहर घातक है और आदिवासी इलाक़ों में भी घुस गई है.

गुजरात के आदिवासी इलाक़ों में यह वायरस तबाही मचा रहा है और तेज़ी से आदिवासी इलाक़ों में बढ़ रहा है.

गुजरात सरकार ने 19 मई को यह दावा किया था कि राज्य में कोविड-19 संक्रमण में स्थिरता आ गई है. यानि हालात नियंत्रण में आ रहे हैं और कोरोना की रफ़्तार थम रही है. 

लेकिन गुजरात के ग्रामीण इलाक़ों और ख़ास तौर से आदिवासी इलाक़ों से ख़बर अच्छी नहीं है. इन इलाक़ों में कोरोना वायरस का संक्रमण बढ़ रहा है. 

राज्य के कम से कम 9 ज़िलों में कोरोना की रफ़्तार थमने या कमज़ोर होने के संकेत नहीं हैं. इन ज़िलों में अमरेली, आणंद, अरावली, दाहोद, देवभूमि द्वारका, खेड़ा, महिसागर, पंचमहल और साबरकांठा शामिल हैं. 

इन ज़िलों में से अरावली, दाहोद, पंचमहल, और महीसागर में फ़िलहाल 10 प्रतिशत की पॉज़िटिव रेट दर्ज हो रही है. 

अमरेली में क़रीब 2400 टेस्ट रोज़ किए जा रहे हैं. इनमें से कम से कम 200 टेस्ट कोरोना पॉज़िटिव पाए जा रहे हैं.

गुजरात के दूर दराज़ के आदिवासी इलाक़ों में भी कोरोना घुस चुका है

10 मई से पहले की स्थिति से तुलना करें तो यहाँ कोरोना की रफ़्तार बढ़ रही है. तब यहाँ पर 2400 में औसतन क़रीब 141 पॉज़िटिव केस मिल रहे थे. लेकिन 11-12 मई के बीच भी यह दर 212 तक पहुँच गई. 

ज़िले के 10 कोविड अस्पतालों में से कम से कम 3 अस्पताल ऐसे हैं जहां एक भी ऑक्सीजन बेड उपलब्ध नहीं है. बाक़ी अस्पतालों में भी स्थिति बहुत अच्छी नहीं है. यहाँ की पॉज़िटिव रेट 8 प्रतिशत की रफ़्तार से बढ़ रही है. 

इस ज़िले में वैक्सीन अभियान की गति भी धीमी हो गई है. जानकारी के अनुसार 9 मई को पूरे ज़िले में सिर्फ़ 9 मई को 500 लोगों को ही कोविड से बचाव की वैक्सीन दी गई.

दरअसल यहाँ पर 13 अप्रैल के बाद से ही वैक्सीन अभियान की रफ़्तार में कमी दर्ज की जा रही है. 

आणंद ज़िले में भी कोरोना संक्रमण की रफ़्तार बढ़ती हुई नज़र आ रही है. यहाँ पर 24 अप्रैल के बाद से ही वायरस से हो रहे संक्रमण की रफ़्तार तेज़ हो गई है. ज़िले में 11 मई को कोरोना वायरस के 231 नए मामले सामने आए हैं. 

यहाँ पर कोविड टेस्ट की संख्या भी लगातार कम ज़्यादा हो रही है. मसलन 3 मई को कुल 345 टेस्ट किए गए और उस दिन लिए गए सैंपल में से 36 प्रतिशत पॉज़िटिव पाए गए.

इसके बाद 5 मई को 3000 सैंपल के बाद पॉज़िटिव केस की दर 5 प्रतिशत दर्ज हुई. फ़िलहाल यहाँ पर कोरोना संक्रमण की दर 8 प्रतिशत बताई जा रही है. 

राजस्थान सीमा से लगे अरावली और महिसागर ज़िलों में भी कोरोना क़हर बरपा रहा है. अरावली ज़िले में पॉज़िटिव केसों की दर चिंताजनक बताई जा रही है.

राजस्थान सीमा से सटे अरावली ज़िले की हालत भी अच्छी नहीं है

यहाँ पर 11 मई को प्रशासन ने जो आँकड़े दिए हैं, उसमें 12 प्रतिशत टीपीआर (टेस्ट पॉज़िटिव रेट) दर्ज हुई है. 

यहाँ चिंताजनक बात ये है कि इस ज़िले में कोरोना की रफ़्तार में बिलकुल भी कमी दर्ज नहीं की गई है. 19 अप्रैल को जो स्थिति बताई गई थी, उसके बाद से अभी तक स्थिति बिगड़ ही रही है.

अरावली ज़िले के हालात के बारे में स्थानीय निवासी और राजनीतिक कार्यकर्ता राजू भाई वलवाई का कहना है हालात बहुत ख़राब हैं.

उन्होंने बताया कि एक भी दिन ऐसा नहीं जा रहा है जब हर गाँव से एक ना एक व्यक्ति की मौत कोविड से हो रही है. उन्होंने कहा कि उनका अपना पूरा परिवार भी इस वायरस से पीड़ित था. 

राजू भाई भील आदिवासी समुदाय से हैं. उन्होंने बताया कि लोग इतनी बड़ी तादाद में बीमार हो रहे हैं कि तमाम कोशिशों के बावजूद लोगों को इलाज देना संभव नहीं हो रहा है.

यहाँ पर टेस्टिंग भी एक चुनौती बन गया है. जानकारी के अनुसार 24 घंटे में 1300 से ज़्यादा टेस्ट नहीं हो पा रहे हैं. वैक्सीन के मामले में भी यह ज़िला काफ़ी पिछड़ रहा है. 2 मई से 5 मई के बीच यहाँ पर 900 वैक्सीन डोज़ ही दी जा सकी हैं. 

महिसागर और पंचमहल ज़िले में भी हालात ख़राब हो रहे हैं. यहाँ पर भी औसत टेस्ट पोज़िटिव रेट 10 प्रतिशत से उपर बताई जा रही है. महिसागर में 11 मई को यह दर 11 प्रतिशत दर्ज की गई है. 

इसके अलावा दाहोद, खेड़ा, नर्मदा और साबरकांठा ज़िलों में हालात क़ाबू में नहीं आ रहे हैं. यह हैरानी की बात है कि नर्मदा ज़िले में 5 मई तक एक भी RT-PCR टेस्ट की मशीन नहीं थी.

दाहोद से सामाजिक कार्यकर्ता केतन बामणिया ने बताया कि हालात बेहद ख़राब हैं. उन्होंने कहा कि प्रशासन के अलावा सामाजिक संगठन और कार्यकर्ता भरसक कोशिश कर रहे हैं कि लोगों की मदद की जा सके.

लेकिन यह संकट इतना बड़ा है कि सभी लोगों को उचित मदद दे पाना संभव नहीं है. फिर भी लोग एक दूसरे की मदद में जुटे हैं.

इन ज़िलों में कोरोना की रफ़्तार के मुक़ाबले स्वास्थ्य सेवाएँ बेहद कमज़ोर और लचर हैं. इसके अलावा इन आदिवासी और ग्रामीण इलाक़ों में वैक्सीन अभियान भी ना के बराबर है. इस लिहाज़ से इन क्षेत्रों में कोरोना संक्रमण की यह गति बेहद ख़तरनाक है. 

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