मीणा आदिवासी, पहचान और विधान सभा से सड़क तक मज़बूत आवाज़

आमागढ़ किला 967 ईसवी में मीणा समुदाय के नेताओं की तरफ से बनवाया गया था. यह रणनीतिक तौर पर काफी प्रासंगिक रहा है और मीणा समुदाय के इतिहास का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बना हुआ है. किले की ऐतिहासिक प्रासंगिकता के अलावा मीणा समुदाय राजनीतिक रूप से भी खासी अहमियत रखता है.

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जयपुर का आमागढ़ क़िला मीणा समुदाय के इतिहास और आस्था केन्द्र रहा है. लेकिन हाल ही में हिंदू संगठनों और स्थानीय मीणा समुदाय के लोगों के बीच विवाद का केंद्र बन गया.

मीणा समुदाय का दावा है कि अठारहवीं सदी में बने इस क़िले का निर्माण उनके पूर्वजों ने कराया था और वहां स्थित मंदिर उनके समुदाय की देवी का मंदिर है.

लेकिन वहां हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियां भी मौजूद हैं. कुछ समय पहले स्थानीय हिंदू संगठनों ने वहां हिंदू धर्म का भगवा झंडा फहरा दिया था, जिसके बाद मीणा समुदाय में अशांति फैल गई थी.

मीणा समुदाय ने आरोप लगाया था कि हिंदू संगठन उनके आदिवासी देवताओं को हिंदू धर्म में मिलाना चाहते हैं. जिसके बाद मीणा समुदाय के लोगों ने आमागढ़ के क़िले पर मीणा समुदाय का सफेद झंडा फहरा दिया.

इस समुदाय का आरोप है कि किले के ‘हिंदूकरण’ की कोशिश के तहत भगवा झंडा फहराए जाने के पीछे दक्षिणपंथी हिंदुत्व समूहों के सदस्यों का हाथ है. 

जयपुर का आमागढ़ फ़ोर्ट

सार्वजनिक तौर पर बढ़ते आक्रोश के बीच राजस्थान में के एक निर्दलीय विधायक रामकेश मीणा के नेतृत्व में मीणा समुदाय के सदस्यों ने 21 जुलाई को झंडा उतारने का फैसला किया था. हालांकि इस मामले के दौरान झंडा फट गया. मीणा समुदाय के कार्यकर्ताओं का दावा है कि यह अनजाने में हुआ और यह उस दिन तेज हवाएं चलने का नतीजा था.

लेकिन हिंदू समूह इस तर्क से सहमत नहीं थे. उन्होंने सोशल मीडिया पर हैशटैग #Arrest_Ramkesh_Meena के साथ इस घटना के वीडियो वायरल होने लगे, जिसके बाद प्राथमिकी दर्ज की गई.

विधायक मीणा ने का कहना था कि उन्होंने सिर्फ मीणा समुदाय की विरासत बचाने की कोशिश की और वो हिंदू समूहों की तरफ से आदिवासियों पर इतिहास या धार्मिक आस्था थोपे जाने के खिलाफ हैं.

वहीं इस पूरे मामले में शामिल हिंदू संगठनों का कहना है कि उन्होंने झंडा फहराकर कोई गलती नहीं की है. सारे हंगामे के बीच इस मामले में अब तक चार एफ़आइआर  दर्ज कराई जा चुकी हैं—एक मीणा समुदाय ने झंडा फहराए जाने के खिलाफ दर्ज कराई है तो दूसरी हिंदू संगठनों की तरफ से झंडा उतारे जाने के खिलाफ की गई.

तीसरी एफआईआर मुस्लिम युवाओं के खिलाफ किला परिसर में स्थित शिव मंदिर से मूर्तियां चुराने को लेकर दर्ज हुई है. वहीं एक अन्य प्राथमिकी मीणा समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाने के लिए सुदर्शन टीवी के प्रधान संपादक सुरेश चव्हाणके के खिलाफ दर्ज हुई.

निर्दलीय विधायक रामकेश मीणा

जयपुर के बाहरी इलाके में स्थित आमागढ़ किले का ये विवाद इस साल जून में उस समय शुरू हुआ, जब कुछ असामाजिक तत्वों ने किले में स्थित हिंदू धर्म के देवताओं की मूर्तियों को तोड़कर उनका अपमान किया.

दरअसल 4 जून को आमागढ़ किले के परिसर में स्थित एक छोटे से शिव मंदिर से मूर्तियों की चोरी हो गई थी.

राजस्थान पुलिस ने इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की और पांच लोगों को हिरासत में लिया जिनमें से चार किशोर थे. ये सभी मुस्लिम थे.

जिसके बाद हिंदू संगठनों की तरफ से यह दावा किया जाने लगा कि वे राज्य में सांप्रदायिक माहौल बिगाड़ने के लिए मंदिर में तोड़-फोड़ की कोशिश कर रहे थे.

राजस्थान की विरासत बचाने में जुटे होने का दावा करने वाली संस्था राजस्थान धरोहर बचाओ समिति के अनुसार मुस्लिम युवकों ने सांप्रदायिक एजेंडा फैलाने के इरादे से मूर्तियों को तोड़ा.

ये मूर्तियां क्षतिग्रस्त किए जाने के तरीके से भी साफ था. इसने पूरे हिंदू समुदाय को नाराज कर दिया. हिंदू संगठनों ने इस पूरे मामले में हिंदू-मुस्लिम जंगल डालने की भी भरपूर कोशिश की.

 पुलिस ने इस घटना के पीछे किसी सांप्रदायिक एंगल की बात से साफ़ इनकार किया है. जिन लड़कों को मूर्ति चुराने के सिलसिले में ग़िरफ़्तार किया गया उनमें से किसी का किसी संगठन से कोई जुड़ाव नहीं पाया गया. 

राजस्थान में मीणा समुदाय के कई बड़े नेता बीजेपी में भी हैं. इस समुदाय के एक बड़े नेता किरोड़ी लाल मीणा इस पूरे मामले में काफ़ी चर्चा में रहे.

बीजेपी के राज्य सभा सांसद किरोड़ी लाल मीणा

उन्होंने जुलाई के शुरू में दिए गए एक बयान में कहा था, “मीणा समुदाय जन्म से लेकर मृत्यु तक सभी हिंदू धार्मिक परंपराओं का पालन करता है. मीणा समुदाय के एक गुट को भड़काकर रामकेश मीणा धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं. उन्हें गिरफ्तार किया जाना चाहिए.

इस किले में स्थित अम्बा माता मंदिर है. यह मंदिर मीणा समुदाय का माना जाता रहा है. लेकिन हिंदू संगठनों ने देवी का नाम ‘अम्बा माता’ से बदलकर ‘अंबिका भवानी’ करने का भी प्रयास किया था. मंदिर के रास्ते में लगे पत्थरों पर भी यही नाम लिखा गया. 

मीणा समुदाय ने हिंदू संगठनों के इस प्रयास पर ज़बरदस्त विरोध दर्ज कराया. कुछ आदिवासी नेताओं ने कहा कि हजारों सालों से इन लोगों ने आदिवासियों और दलितों को धार्मिक शास्त्रों और शिक्षा से बाहर रखा है, और इसे अपने लिए सुरक्षित रखा है. केवल इन्हीं लोगों के पास धार्मिक पूजा-पाठ का पेटेंट नहीं है.

मीणा समुदाय राजस्थान में एक प्रभावशाली आदिवासी समुदाय है. रोज़गार, शिक्षा और राजनीतिक प्रतिनिधित्व के मामले में इस समुदाय ने काफ़ी तरक़्क़ी की है.

उनका आरोप है कि हिंदू संगठन उनके देवी-देवताओं को अपने धर्म में शामिल (appropriate) करना चाहते हैं.

हरिराम मीणा एक जाने-माने लेखक हैं और इससे पहले वो एक आईपीएस अधिकारी थे. इस मामले पर उन्होंने सोशल मीडिया पर काफ़ी कुछ लिखा है.

वो कहते हैं कि आमागढ़ किला 967 ईसवी में मीणा समुदाय के नेताओं की तरफ से बनवाया गया था. यह रणनीतिक तौर पर काफी प्रासंगिक रहा है और मीणा समुदाय के इतिहास का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बना हुआ है.

उन्होंने कहा कि अम्बा माता जिसे ‘आमा माता’ भी कहा जाता है, प्राकृतिक रचनात्मकता की पूजा किए जाने से संबंधित हैं क्योंकि आमा का अर्थ रचनात्मकता है.

किले की ऐतिहासिक प्रासंगिकता के अलावा मीणा समुदाय राजनीतिक रूप से भी खासी अहमियत रखता है. 

राजस्थान विधानसभा में कुल 200 सीटें हैं, जिनमें से 25 अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं. इसमें से 18 मौजूदा समय में मीणा समुदाय के विधायकों के पास हैं.

जबकि मीणा समुदाय को कांग्रेस और बीजेपी दोनों दलों में प्रतिनिधित्व का मौका मिलता है, लेकिन 2017 में स्थापित भारतीय ट्राइबल पार्टी इस समुदाय के बीच तेजी से लोकप्रियता हासिल कर एक तीसरी पार्टी बनी है.

बीटीपी आदिवासी संस्कृति की रक्षा के प्रति काफी मुखर रही है और उसने रामकेश मीणा के प्रयासों का भी समर्थन किया है.

रामकेश मीणा कांग्रेस सरकार का समर्थन करने वाले एक निर्दलीय विधायक हैं लेकिन सत्तारूढ़ दल ने खुद को विवाद से दूर रखते हुए इस मामले में कोई स्पष्ट रुख नहीं अपनाया है.

लेकिन एक बात स्पष्ट है कि मीणा समुदाय के पास राजस्थान में मज़बूत आवाज़ है, विधान सभा में भी और सड़कों पर भी. 

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