आंध्र प्रदेश: साइक्लोन गुलाब से 78 आदिवासियों के घर हुए बर्बाद

राजस्व या जीवीएमसी से कोई भी उनके बारे में पता लगाने नहीं आया है. सिर्फ़ वॉर्ड वॉलंटियर यहां पहुंचे, और उन्होंने पेंडुरति तहसीलदार को न लोगों की दुर्दशा के बारे में बताया. एमआरओ ने बस्ती का दौरा तो किया है, लेकिन पूछताछ के अलवा इन आदिवासियों की मदद के लिए कुछ नहीं बताया.

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साइक्लोन गुलाब की वजह से आई बाढ़ आंध्र प्रदेश के ने विशाखापत्तनम शहर में 78 इरुकुला आदिवासी परिवारों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. पेंडुरति मंडल की एकलव्य कॉलोनी में रहने वाले यह आदिवासी राज्य में आर्थिक रूप से सबसे ज़्यादा पिछड़े हैं.

गुलाब चक्रवाती तूफ़ान ने छप्परों से बने उनके अस्थायी घरों को पानी से भर दिया, जिससे उनके घर का सारा सामान, कपड़े, स्कूल की किताबें और खाना पकाने के बर्तन सब कुछ बर्बाद हो गया.

एक आदिवासी बुज़ुर्ग रामनय्या ने डेक्कन क्रॉनिकल को बताया कि चक्रवात के लैंडफ़ॉल के कुछ घंटे बाद सोमवार तड़के करीब साढ़े तीन बजे बाढ़ का पानी उनके घरों में घुस गया, और वो किसी तरह जान बचाकर वहां से भागे.

“हम भारी बारिश में भीग रहे थे, जब एक आदमी ने हमें देखा और हम सभी 130 लोगों को अपने अपार्टमेंट के बेसमेंट में ले गया और हमें वहां रहने की जगह दी. उन्होंने हमें पूरे दिन खाना दिया, और आज (बुधवार) सुबह की चाय के बाद हम लोग अपने घरों के लिए निकल पड़े,” रामनय्या ने कहा.

रामनय्या ने यह भी बताया कि राजस्व या जीवीएमसी से कोई भी उनके बारे में पता लगाने नहीं आया है. सिर्फ़ वॉर्ड वॉलंटियर यहां पहुंचे, और उन्होंने पेंडुरति तहसीलदार को न लोगों की दुर्दशा के बारे में बताया. एमआरओ ने बस्ती का दौरा तो किया है, लेकिन पूछताछ के अलवा इन आदिवासियों की मदद के लिए कुछ नहीं बताया.

यह इरुकुला परिवार 1986 में नेल्लोर से विशाखापत्तनम शिफ़्ट हुए और एकलव्य कॉलोनी में बस गए थे. आजीविका के लिए यह लोग बाँस से बनी टोकरियाँ, प्लास्टिक के ड्रम, पुराने सोफ़े और कुर्सियाँ शहर, गाँवों और कभी-कभी एजेंसी इलाक़ों में बेचते थे.

बस्ती के एक निवासी सुरीबाबू कहते हैं, “चुनाव के बाद, नेताओं ने हमारी कॉलोनी का दौरा किया और हमें पक्के घर और दूसरी बुनियादी सुविधाओं का वादा किया. लेकिन आज तक हमें कुछ नहीं मिला है. हमारे इलाक़े में पहले बाढ़ नहीं आती थी. यह अब इसलिए हो रहा है क्योंकि अमीर लोगों ने सड़कें बनाने के लिए नालियों को बंद कर दिया.”

इन इरुकुला आदिवासियों के बच्चे स्कूल जाने के लिए पांच किलोमीटर पैदल चलते हैं. पहले से ही ग़रीब इन बच्चों की सारी किताबें और यूनिफॉर्म बाढ़ के पानी से ख़राब हो गई हैं.

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