केरल के आदिवासियों में 100 प्रतिशत साक्षरता हासिल करने की कोशिश

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केरल राज्य साक्षरता मिशन ने पिछले चार साल में 13 हज़ार आदिवासियों को साक्षर बनाया है. इसी कड़ी में अब राज्य के पालक्काड ज़िले के अट्टपाड़ी की आदिवासी बस्तियों में स्पेशल आदिवासी साक्षरता योजना के तहत परीक्षाएं शुरु हुई हैं.

अट्टपाड़ी की तीन पंचायतों – अगली, पुडूर और शोलयूर – की 171 बस्तियों के कुल 2,347 आदिवासी यह परीक्षा लिख ​​रहे हैं. इसमें से सबसे ज़्यादा 1011 पुडूर में हैं, जबकि अगली में 866, और शोलयूर में 470 आदिवासी यह परीक्षा लिख रहे हैं.

ज़िला साक्षरता मिशन के असिस्टेंट प्रोजेक्ट समन्वयक एम मोहम्मद बशीर का कहना है कि जिन स्थानों पर शनिवार को परीक्षा नहीं हो सकी, वहां रविवार और सोमवार को परीक्षा आयोजित होगी.

पालक्काड के अट्टपाड़ी इलाक़े में आदिवासी आबादी काफ़ी ज़्यादा. इनके लिए 2009 में राज्य सरकार ने साक्षरता कार्यक्रम शुरू किया था. 18 अप्रैल, 2020 तक इस क्षेत्र को पूरी तरह से आदिवासी साक्षर घोषित किया जाना था.

अभी जो परीक्षा चल रही है, वो मूल योजना के तहत मार्च 2020 के पहले सप्ताह में होनी थी. जो आदिवासी इसे पास नहीं कर पाते, उनके लिए परीक्षा उसी महीने के तीसरे हफ़्ते में दोबारा आयोजित होती. लेकिन, कोविड की वजह से यह नहीं हो सका.

इसके बाद सरकार ने ऑनलाइन क्लास और परीक्षा के बारे में एक सर्वे भी किया. लेकिन इसमें पाया गया कि अट्टपाड़ी की आदिवासी बस्तियों में इंटरनेट नेटवर्क की कमी है, और कई घरों में स्मार्टफ़ोन भी नहीं है.

मौजूदा परीक्षा तीन भागों में है. पहले सवाल का लिखित में उत्तर दिया जाना है, दूसरे का मौखिक, और तीसरे भाग में आदिवासियों की गणित की परीक्षा है.

इस स्पेशल आदिवासी साक्षरता मिशन का मक़सद है कि यह लोग अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में सक्षम हों. मिशन के तहत आदिवासी अपना नाम लिख पाएं, बैंकों में निकासी पर्ची भर सकें, और इनकी रोज़ की ज़रूरतों के लिए गणित इन्हें आता हो.

केरल में स्पेशल आदिवासी साक्षरता सतत शिक्षा कार्यक्रम सिर्फ़ अट्टपाड़ी और वायनाड में ही चलाया जा रहा है.

केरल में क़रीब पांच लाख आदिवासी हैं, जिनमें से ज़्यादातर वायनाड में बसे हैं. राज्य में पांच पीवीटीजी यानि आदिम जनजातियां हैं, जिनकी साक्षरता दर काफ़ी कम है.

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