आदिवासी आरक्षण छीनने का नया बहाना: धर्मांतरण

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मैसूरु कोडागु से बीजेपी सांसद प्रताप सिम्हा ने जनजातीय कल्याण विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि धर्म बदलने वाले आदिवासियों को विशेष राशन समेत दूसरी सरकारी स्कीमों का लाभ न दिया जाए.

एक बेहद विवादास्पद बयान में उन्होंने कहा कि “क्रॉस” पहनने वाले आदिवासी नहीं हैं, और उन्हें सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों की सूची से बाहर निकाल दिया जाना चाहिए.

कर्नाटक के मैसूरु ज़िले में आदिवासी आबादी काफ़ी बड़ी है, और ये इलाक़े के हुनसुर, एचडी कोटे, पेरियपटना और नानजंगुड तालुकों के 155 बस्तियों में रहते हैं. मैसूर में जून कुरुबा, सोलीगा, काडु कुरुबा, हक्की पिक्की और डोंगरी गेरेसिया आदिवासी समुदाय रहते हैं.

मैसूर में जून कुरुबा, सोलीगा, काडु कुरुबा, हक्की पिक्की और डोंगरी गेरेसिया आदिवासी रहते हैं

सिम्हा ने यह बात ज़िले के दिशा प्रगति समीक्षा बैठक में कही, अधिकारियों से यह पूछने के बाद कि क्या आदिवासी क्षेत्रों में राशन का वितरण ठीक से हो रहा है. उनका कहना है कि अगर राशन वितरण प्रणाली में कोई दिक्कत नहीं है, तो आदिवासियों के बीच धर्मांतरण क्यों हो रहा है.

सिम्हा के हिसाब से धर्मांतरण को रोकने का एक ही तरीक़ा है कि ऐसा करने वाले आदिवासियों को आरक्षण से मिलने वाली कोई सुविधा न दिया जाए.

इसके अलावा, सिम्हा ने विकास परियोजनाओं के आवंटन पर चर्चा के दौरान अधिकारियों से यह बी कहा कि सवर्ण क्षेत्रों के लिए 15वें वित्त आयोग के तहत अधिक धन आवंटित किया जाए.

उनका कहना है कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति क्षेत्रों की तुलना में सवर्ण क्षेत्रों को विकास परियोजनाओं में उचित हिस्सा नहीं मिल रहा है.

हेमंत सोरेन: आदिवासी हिंदू नहीं हैं

आदिवासियों के धर्म के सवाल ने हाल ही में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के बयान के बाद तूल पकड़ा है. सोरेन ने हार्वर्ड इंडिया कॉन्फ़्रेंस में कहा था कि आदिवासी हिंदू नहीं हैं, और उनके लिए अलग धर्म कोड लागू होना चाहिए.

इसके लिए नीति आयोग की बैठक के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मामले की समीक्षा करने का आवेदन किया था.

उसके बाद बीजेपी ने सोरेन के इस बयान की कड़ी आलोचना करते हुए कहा था कि वो सीधे वैटिकन की भाषा बोल रहे हैं.

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