बोडोलैंड में 40,000 आदिवासी परिवारों की मदद के लिए ख़ास योजना

बीटीसी के मुख्य कार्यकारी सदस्य प्रमोद बोड़ो ने कहा कि यह परियोजना समुदायों को कृषि उत्पादकता, जल संसाधनों के निर्माण, सिंचाई के बुनियादी ढांचे, पशुधन उत्पादकता और दूसरी गैर-कृषि गतिविधियों, जैसे हथकरघा को बढ़ावा देकर उनकी आय बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए काम करेगी.

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भारत ग्रामीण आजीविका फाउंडेशन (Bharat Rural Livelihoods Foundation) ने असम के दो जिलों में अनुसूचित जनजातियों (ST) के रोजगार के अवसरों में सुधार के लिए बोडोलैंड क्षेत्रीय परिषद (Bodoland Territorial Council) के साथ हाथ मिलाया है.

केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय के तहत इस समिति ने एक बयान में कहा है कि बीआरएलएफ और बीटीसी ने बोडोलैंड में कुछ विशिष्ट समुदायों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार के लिए एक परियोजना को लागू करने के लिए एक समझौते (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं.

एमओयू के अनुसार, ‘ट्रांसफॉर्मिंग द लाइव्स ऑफ बोडोलैंड ट्राइब्स’ परियोजना का लक्ष्य चार साल की अवधि में बक्सा के दो ब्लॉक और उदलगुरी के दो ब्लॉक में आदिवासी समुदायों के 40,000 घरों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति को बदलना है.

इस परियोजना का मकसद अनुसूचित जनजातियों और ख़ासतौर से बोडोलैंड के आदिवासियों की आजीविका और आय में सुधार करना है. इसके लिए नकी कृषि और गैर-कृषि गतिविधियों में वृद्धि के साथ साथ भूमि और पानी की स्थिति में सुधार जैसी विकास पहलों पर ख़ास ध्यान दिया जाएगा.

बीटीसी के मुख्य कार्यकारी सदस्य प्रमोद बोड़ो ने कहा कि यह परियोजना समुदायों को कृषि उत्पादकता, जल संसाधनों के निर्माण, सिंचाई के बुनियादी ढांचे, पशुधन उत्पादकता और दूसरी गैर-कृषि गतिविधियों, जैसे हथकरघा को बढ़ावा देकर उनकी आय बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए काम करेगी.

उन्होंने यह भी कहा कि यह परियोजना स्कूलों में बेहतर प्रतिधारण स्तर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्थानीय निकायों के बेहतर शासन और सामुदायिक केंद्रों की क्षमता में वृद्धि के माध्यम से बच्चों के शिक्षा स्तर को बढ़ाने पर भी ध्यान केंद्रित करेगी.

विकास कार्यों की बात करते हुए बीआरएलएफ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रमथेश अंबस्ता ने कहा, ”परियोजना का मकसद नागरिक समाज संगठनों (CSO) द्वारा ग्राम पंचायतों और अग्रिम पंक्ति के सरकारी अधिकारियों को सुविधा सहायता प्रदान करना है.”

उन्होंने कहा कि जहां बीआरएलएफ सीएसओ सुविधा समर्थन और क्षमता निर्माण लागत में योगदान देगा, वहीं लक्षित परिवारों को मनरेगा और बीटीसी के तहत काम करने वाले अन्य संबंधित विभागों, जैसे सरकारी प्रमुख योजनाओं से वित्तीय संसाधनों का लाभ उठाकर भौतिक कार्यों में मदद की जाएगी.

बयान के मुताबिक, ”परियोजना के लिए प्रमुख सचिव बीटीसी की अध्यक्षता में बीटीसी सरकार द्वारा एक परियोजना संचालन समिति (PAC) की स्थापना की जाएगी. पीएसी पर बीआरएलएफ और सीएसओ दोनों का प्रतिनिधित्व होगा. कार्यक्रम संबंधी लागतों के लिए, बीटीसी सरकार वित्तीय संसाधन देने के लिए प्रतिबद्ध होगी.”

असम मानव विकास रिपोर्ट (HDR) के मुताबिक़ उदलगुरी और बक्सा जिलों में बहु-आयामी गरीब और कमज़ोर तथा उच्च बहु-आयामी गरीबी सूचकांक (MPI) का हेड काउंट अनुपात (HCR) बहुत ज़्यादा है.

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