पुलिस ने आदिवासी आदमी को बुरी तरह पीटा, हेमंत सोरेन ने दिए जांच के आदेश

लातेहार जिला पुलिस ने सिंह को जंगल में "माओवादियों को सुरक्षित छोड़ने" के लिए पीटा था.

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झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 42 साल के एक आदिवासी आदमी, अनिल सिंह की लातेहार जिला पुलिस द्वारा कथित तौर पर पिटाई किए जाने की घटना के जांच के आदेश दिए हैं.

मुख्यमंत्री ने यह आदेश अनिल सिंह की तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा किए जाने के बाद दिए. लातेहार जिला पुलिस ने सिंह को जंगल में “माओवादियों को सुरक्षित छोड़ने” के लिए पीटा था.

इस मुद्दे को अधिकार संगठन झारखंड जनाधिकार महासभा (JJM) ने उठाया. उन्होंने कहा कि अनिल सिंह, जो किसान होने का दावा करता है, को लातेहार जिले में गारू पुलिस द्वारा 23 और 24 फरवरी की आधी रात को उठाया गया और बुरी तरह से पीटा गया था.

अनिल सिंह ने मीडिया को बताया, “हम घर पर सो रहे थे जब गारू थाना प्रभारी ने दरवाजा खटखटाया और मुझे अपने साथ थाने चलने के लिए कहा. मेरे घर पर दो मेहमान थे और उन्हें भी आने के लिए कहा गया. पुलिस ने आरोप लगाया कि हम माओवादियों को जंगल छोड़ने गए थे और फिर उन्होंने मुझे इस हद तक पीटा कि मैं बेहोश हो गया.”

घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने ट्वीट कर कहा कि झारखंड पुलिस, मामले का तत्काल संज्ञान लें और दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई कर उन्हें सूचित करें.

JJM ने कहा कि थाना प्रभारी के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज किया जाए, और पीड़ित आदिवासी को मुआवजा दिया जाए.

“अनिल और कुछ दूसरे ग्रामीणों को आधी रात को उठाया गया और उन पर माओवादियों की मदद करने का आरोप लगाया गया. उसे और एक दूसरे व्यक्ति को तब तक बुरी तरह पीटा गया जब तक कि वह होश नहीं खो बैठे. गौरतलब है कि इसी प्रखंड के मासूम आदिवासी ब्रम्हदेव सिंह को कुछ महीने पहले सुरक्षाबलों ने मार गिराया था. नक्सली तलाशी अभियान के दौरान उन्हें गोली मार दी गई थी,” जेजेएम ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा.

झारखंड के लातेहार जिले के गारू प्रखंड के पिरी गांव में पिछले साल 12 जून को एक आदिवासी समुदाय के 24 साल के आदमी की भी हत्या कर दी गई थी. ग्रामीणों ने इसे पुलिस द्वारा एकतरफा फायरिंग का मामला बताते हुए सुरक्षा कर्मियों के खिलाफ गारू थाने में शिकायत दर्ज कराई.

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