खारघर आदिवासियों ने किया पहाड़ की खुदाई का विरोध, पुलिस हस्तक्षेप के बाद रुका काम

"पहाड़ी के खुदाई की अनुमति देने के बजाय हम शांति से सलाखों के पीछे चले जाएंगे."

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धामोले के आदिवासी निवासियों के विरोध के चलते खारघर पहाड़ी के उत्खनन (excavation) के खिलाफ जनता के गुस्से ने रविवार को एक नया मोड़ ले लिया, जब पुलिस ने खुदाई का काम रोक दिया.

पहाड़ के साथ बसे धामोले के लोगों ने मानव श्रृंखला बनाकर विरोध किया, क्योंकि उनका मानना है कि पहाड़ की खुदाई से उनके घरों पर बुरा असर पड़ेगा.

वन हक्क समिति के अध्यक्ष बलराम पारधी ने टाइम्स ऑफ इंडिया से कहा कि प्रभावित आदिवासी इस खुदाई को पूरी तरह से रोकने के लिए राज्य के शीर्ष अधिकारियों को पत्र लिखेंगे, क्योंकि इससे न सिर्फ उनके घर नष्ट होंगे, बल्कि पर्यावरण पर भी बेहद बुरा असर पड़ेगा.

खारघर पुलिस निरीक्षक विमल बिडवे ने मानव श्रृंखला को रोकने की कोशिश की क्योंकि लोगों ने इसके लिए अनुमति नहीं ली थी. लेकिन विरोध करने वाले आदिवासी अपनी बात पर अड़े रहे और कहा कि अगर पुलिस उन्हें शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने की अनुमति नहीं दे सकती तो उन्हें गिरफ्तार कर ले.

पारधी ने कहा, “पहाड़ी के खुदाई की अनुमति देने के बजाय हम शांति से सलाखों के पीछे चले जाएंगे.”

प्रदर्शनकारियों ने पहाड़ी उत्खनन को तत्काल रोकने का अनुरोध किया है. Cidco ने एक छोटे से अंतराल के बाद राजस्व विभाग के हस्तक्षेप के बाद फिर से शुरू किया था.

खारघर गोल्फ कोर्स को समतल करने के लिए ट्रक से मिट्टी ढोने के लिए पहाड़ी की खुदाई की जा रही है.

पुलिस ने विरोध को देखते हुए फिलहाल खुदाई का काम रोक दिया है. प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को लेकर गवर्नर और सिडको के मैनेजिंग डायरेक्टर से मिलने का फैसला किया है.

नैटकनेक्ट फाउंडेशन, जिसने एक डिजिटल आंदोलन #DontKillKhargharHill शुरू किया है, ने कहा कि यह चौंकाने वाली बात है कि मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे द्वारा पर्यावरण और शहरी विकास सचिवों से इस मुद्दे को देखने के लिए कहने के बावजूद, खुदाई फिर से शुरू हो गई है.

मुंबई में और रायगढ़ जिले के तलाई गांव में हाल ही में भूस्खलन की कई घटनाएं हुई हैं. नैटकनेक्ट के निदेशक बी एन कुमार ने मुख्यमंत्री को ईमेल के जरिए कहा है कि पहाड़ पर मिट्टी के लिए खुदाई काटना पर्यावरणीय आपदा को निमंत्रण देने जैसा है.

वातावरण के संस्थापक और सीईओ भगवान केसभट ने भी कहा कि धामोले के लोग काफी परेशान हैं क्योंकि उनके घर इस काम से प्रभावित होंगे.

यहां लोग सदियों से यहां रह रहे हैं और रायगढ़ कलेक्टर ने उनके लिए 250 एकड़ का सीमांकन सोशल फॉरेस्ट्री के लिए किया है.

बी एन कुमार ने आश्चर्य जताया कि पर्यावरण के मुद्दों पर आम लोग सरकारी अधिकारियों की तुलना में अधिक जागरुक हैं.

शहरी आवासों के बीच पहाड़ियों को नुकसान पहुंचाने के इस तरह के शॉर्टकट अपनाने के बजाय Cidco को अपने गोल्फ कोर्स को समतल करने के लिए मिट्टी लाने का कोई दूसरा वैकल्पिक स्रोत ढूंढना चाहिए.

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