आदिवासी अधिकार यात्रा का जवाब अमित शाह के ज़रिए देगी बीजेपी

0
505

मध्य प्रदेश में अभी से विधानसभा चुनाव की  2023 के लिए प्रतिस्पर्धा शुरू हो चुकी है.  इस राज्य में आदिवासी आबादी एक बड़ा वोट बैंक हैं. इसलिए दोनों ही पार्टियां एक बार फिर आदिवासी वोट बैंक को साधने में लगी हुई हैं. राज्य की आबादी का 21 फीसदी से अधिक आदिवासी है और 230 विधानसभा सीटों में से 47 उनके लिए आरक्षित हैं. वहीं सामान्य वर्ग की 31 और सीटों को भी प्रभावित करते हैं और किंग मेकर की भूमिका में नजर आते हैं.

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ ने सोमवार को बड़वानी जिले में आदिवासी अधिकार यात्रा की शुरुआत की. कांग्रेस ने दावा किया कि क्षेत्र के 50,000 से अधिक आदिवासी लोगों ने रैली में भाग लिया. जबकि अन्य 25,000 को प्रशासन ने अवैध रूप से भाग लेने से रोक दिया.

जनजातीय लोगों के खिलाफ हिंसा के लगातार बढ़ते मामलों, विश्व आदिवासी दिवस पर अवकाश समाप्त करने के राज्य सरकार के निर्णय और आदिवासी लोगों के मूल अधिकारों के उल्लंघन के विरोध में इस रैली का आयोजन किया गया था.

कांग्रेस का दावा है कि इस आदिवासी अधिकार यात्रा के जरिए आदिवासियों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया जाएगा. इसके साथ ही बीजेपी सरकार की नीति रीति के बारे में भी आदिवासियों को बताया जाएगा. वो बड़वानी में आदिवासी अधिकार यात्रा निकालकर प्रदेश की 47 आदिवासी सीटों को साधने की कोशिश में है.

कांग्रेस का दावा है कि आदिवासी उत्पीड़न और आदिवासियों से जुड़े मुद्दों को लेकर कांग्रेस का बीजेपी सरकार के खिलाफ यह बड़ा हल्ला बोल है.

कांग्रेस पार्टी ने तीन मिनट का एक वीडियो जारी किया. जिसमें 15 महीने की कांग्रेस सरकार द्वारा आदिवासी लोगों के कल्याण के लिए उठाए गए कदमों को दर्शाया गया है. जिसमें आदिवासियों द्वारा साहूकारों से लिए गए कर्जे की माफी, महिला समूहों को मौद्रिक सहायता, खेल परिसरों की स्थापना, नए स्कूल शामिल हैं. साथ ही सामुदायिक केंद्र और विश्व आदिवासी दिवस आदि पर अवकाश घोषित करते हैं.

हाल ही में कांग्रेस ने राज्य विधानसभा में विश्व आदिवासी दिवस पर सार्वजनिक अवकाश रद्द करने का मुद्दा उठाया था और नीमच की घटना पर तथ्य खोज के लिए एक प्रतिनिधिमंडल भी भेजा था. जहां एक आदिवासी शख्स को वाहन से बांधकर मौत के घाट उतार दिया गया था.

राज्य की दोनों प्रमुख पार्टियां जनजातीय आबादी को लुभाने की होड़ में हैं. 

साल 2003 के पहले आदिवासी वोट बैंक परंपरागत रूप से कांग्रेस का माना जाता रहा था. लेकिन बीते कुछ सालों से बीजेपी ने इसमें सेंध लगा दी है. इसलिए आदिवासी कांग्रेस से दूर हो गए है. हालांकि साल 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 47 आदिवासी सीटों में से 31 सीटें मिली थीं जबकि बीजेपी को 16 सीटों से ही संतोष करना पड़ा था.

इसलिए दोनों दल सत्ता परिवर्तन में आदिवासी मतदाताओं द्वारा निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका से अच्छी तरह वाकिफ हैं और उन्हें लुभाने के लिए 2023 से पहले कदम उठा रहे हैं.

कमलनाथ ने सोमवार को रैली को संबोधित करते हुए आदिवासियों से भय में नहीं जीने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि कांग्रेस आदिवासी लोगों के समर्थन में है और उनके मुद्दों के लिए संघर्ष करना जारी रखेगी और जब कांग्रेस 2023 में सत्ता में लौटेगी तो समुदाय के साथ पूरा न्याय होगा.

उन्होंने यह भी कहा कि प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान हमेशा सिर्फ नाट्यकला में लगे रहते हैं न कि वास्तविक कल्याणकारी गतिविधियों में और एक बार फिर चौहान पर तंज कसते हुए उन्हें अभिनय करियर शुरू करने के लिए मुंबई जाने के लिए कहा. कमलनाथ ने यह भी दोहराया कि चौहान ने कभी अपनी आंखों या कानों का इस्तेमाल नहीं किया (लोगों की पीड़ा नहीं सुनी या नहीं देखी) और सिर्फ अपना मुंह खुला रखा (झूठे वादे करने के लिए). 

इस बीच एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए राज्य बीजेपी प्रमुख विष्णु दत्त शर्मा ने कहा कि कमलनाथ द्वारा की गई रैली एक धोखा रैली थी और नाथ को आदिवासी लोगों की याद तभी आती है जब चुनाव करीब होते हैं. लेकिन उन्हें 15 महीने की सरकार के दौरान आदिवासी अधिकारों के उल्लंघन के बारे में जवाब देना चाहिए.

विष्णु दत्त शर्मा ने कहा, “विधानसभा चुनाव से पहले कमलनाथ जी ने आदिवासियों को लुभाने के लिए बहुत सारे वादे किए लेकिन एक बार सत्ता में आने के बाद उन्हें धोखा दिया? उनकी सरकार ने आदिवासी क्षेत्रों के विकास के लिए क्या कदम उठाए? बल्कि नाथ ने आदिवासी लोगों के लिए बनी बीजेपी सरकार की कल्याणकारी योजनाओं को भी बंद कर दिया और बिरसा मुंडा, टंट्या भील, शंकर शाह और रघुनाथ शाह जैसी महान आदिवासी हस्तियों पर कभी ध्यान नहीं दिया. क्या कांग्रेस और कमलनाथ भगवान बिरसा मुंडा की जयंती (15 नवंबर) पर सार्वजनिक अवकाश देने के राज्य सरकार के फैसले का विरोध कर उनका अपमान नहीं कर रहे हैं. हम इस दिन को आदिवासी सम्मान दिवस (जनजातीय गौरव दिवस) के रूप में मनाएंगे और मैं कमलनाथ को इसमें भाग लेने के लिए आमंत्रित करता हूं.”

वहीं दूसरी तरफ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जबलपुर में 18 सितंबर को चुनावी अभियान की शुरुआत करेंगे. अमित शाह ने कार्यक्रम के लिए 18 सितंबर को इसलिए चुना है क्योंकि इसी दिन साल 1858 को अंग्रेजों ने गोंड राजा रघुनाथ शाह और शंकर शाह को तोप के मुंह से बांधकर उड़ा दिया था. बीजेपी इस अवसर पर ‘जनजातीय समाज जोड़ो अभियान’ (आदिवासी समुदायों को एकजुट करने का अभियान) भी शुरू करेगी.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here