पति को इंसाफ दिलाने के लिए दर-दर भटकी आदिवासी औरत, कोर्ट ने दिया पुलिस को मामला दर्ज करने का आदेश

मामला आदिवासी आदमी की उसके सुपरवाइजर द्वारा पिटाई के बाद मौत का है. इस साल की शुरुआत में उस आदमी की मौत हुई थी. जून में, मृतक की पत्नी उसका डेथ सर्टिफिकेट मिलने के बाद पुलिस के पास गई.

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पत्नी की शिकायत के बावजूद एक आदिवासी आदमी को  मौत की जांच नहीं करने के लिए एक मजिस्ट्रेट कोर्ट vs पुलिस को फटकार लगाई है. कोर्ट ने पुलिस को एफआईआर दर्ज जांच करने के आदेश दिए हैं.

अंधेरी में अतिरिक्त मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट की अदालत ने एमआईडीसी पुलिस को एफआईआर दर्ज कर, जांच पूरी करने और अंतिम रिपोर्ट जल्द से जल्द सौंपने का निर्देश दिया है. 

मामला आदिवासी आदमी की उसके सुपरवाइजर द्वारा पिटाई के बाद मौत का है. इस साल की शुरुआत में उस आदमी की मौत हुई थी. जून में, मृतक की पत्नी उसका डेथ सर्टिफिकेट मिलने के बाद पुलिस के पास गई.

उसने अपनी शिकायत में कहा कि उसका पति अनुसूचित जनजाति से था, और काम के दौरान अपने सुपरवाइजर द्वारा भेदभाव का सामना कर रहा था.

उसने अपने पति का डेथ सर्टिफिकेट भी शिकायत के साथ लगाया क्योंकि उसमें साफ कहा गया है की मृतक को हमले को वजह से कई चोटें आई थीं. उसने अपनी शिकायत में ठेकेदार का नाम भी लिखा है.

अदालत ने कहा कि शिकायत के बावजूद पुलिस ने छह महीने बाद भी रिपोर्ट दर्ज नहीं की है, और मृतक की पत्नी को दर-दर भटकने को मजबूर किया है. 

चूंकि घटना एमआईडीसी पुलिस थाने के अधिकार क्षेत्र में हुई, तो जब मृतक की पत्नी ने दूसरे पुलिस थाने का रुख किया, तो उसे वापस एमआईडीसी थाने भेज दिया जाना चाहिए था, और मामला जल्द निपटाया जाना चाहिए था.  

अतिरिक्त चीफ़ मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट अमिताभ अरुणप्रकाश पंचभाई ने अपने आदेश में कहा, “शिकायतकर्ता की शिकायत से साफ है की यह एक cognizable अपराध है. हत्या जैसा गंभीर आरोप लगने के बावजूद पुलिस ने इसपर कार्रवाई नहीं की. पुलिस को इसका तुरंत संज्ञान लेना चाहिए था.”

(तस्वीर प्रतीकात्मक है.)

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