मिलिए श्रीधन्या सुरेश से, केरल की पहली आदिवासी महिला आईएएस अधिकारी

कुरिचिया आदिवासी समुदाय की श्रीधन्या सुरेश IAS अफ़सर बनने वाली केरल की पहली आदिवासी महिला हैं. उन्होंने 2018 की सिविल सर्विसेज़ परीक्षा में 410 रैंक हासिल की थी.

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केरल के एक आदिवासी गांव की श्रीधन्या सुरेश की कहानी सपनों के पूरे होने की कहानी है. उनकी कहानी एक मिसाल है उन सभी के लिए जो सपने तो बड़े-बड़े देखते हैं, लेकिन ज़िंदगी के हालात से हार मानने को मजबूर हो जाते हैं.

कुरिचिया आदिवासी समुदाय की श्रीधन्या सुरेश IAS अफ़सर बनने वाली केरल की पहली आदिवासी महिला हैं. उन्होंने 2018 की सिविल सर्विसेज़ परीक्षा में 410 रैंक हासिल की थी.

किसी भी आम बच्चे की तरह ही श्रीधन्या के भी बचपन में बड़े सपने थे, लेकिन उनके परिवार की आर्थिक स्थिति उनके लिए एक बड़ी चुनौती बनी. उन्होंने हार नहीं मानी और अपने दृढ़ संकल्प और कड़ी मेहनत से उन्होंने यह मुक़ाम हासिल किया.

श्रीधन्या के माता-पिता दिहाड़ी मजदूर हैं जो अपने इलाक़े के बाज़ार में सुबह से रात तक मेहनत कर पैसा कमाते हैं.

श्रीधन्या सुरेश और उनका परिवार वायनाड के एमपी राहुल गांधी के साथ

देश के ज़्यादातर आदिवासी बच्चों की तरह ही श्रीधन्या का बचपन भी कई बुनियादी सुविधाओं के बिना गुज़रा. मुश्किलों के बावजूद, उन्होंने वायनाड ज़िले के एक सरकारी स्कूल से अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी की. इसके बाद, उन्होंने कोझिकोड के सेंट जोसेफ कॉलेज से जूलॉजी में अपनी उच्च शिक्षा पूरी की. इसके अलावा, उन्होंने कालीकट यूनिवर्सिटी से एप्लाइड जूलॉजी में पोस्ट ग्रैजुएशन भी पूरा किया.

अपनी मेहनत और अपने माता-पिता के समर्थन के बूते श्रीधन्या सुरेश ने अपने तीसरे प्रयास में AIR 410 के साथ CSE 2018 को क्रैक करने में कामयाबी हासिल की. उसके बाद उन्होंने राज्य सरकार के अनुसूचित जनजाति विकास विभाग में क्लर्क के रूप में काम किया. उन्होंने आदिवासी छात्रों के हॉस्टल में वॉर्डन के रूप में भी काम किया है.

श्रीधन्या के यूपीएससी परीक्षा देने के पीछे वायनाड जिले के तत्कालीन कलेक्टर श्रीराम राव का प्रोत्साहन है. उन्होंने ही श्रीधन्या को यूपीएससी परीक्षा देने के लिए कहा.

आमतौर पर यूपीएससी मेन्स क्लियर करना कामयाबी की ओर पहला क़दम बन जाता है, लेकिन श्रीधन्या के लिए मेन्स के आगे की हार आसान नहीं थी. दिल्ली में इंटरव्यू के लिए जाने के लिए उनके पास पैसे नहीं थे. लेकिन श्रीधन्या के दो दोस्त उनकी मदद करने के लिए सामने आए.

श्रीधन्या सुरेश कोझीकोड ज़िले की एसिस्टेंट कलेक्टर हैं

दोनों ने मिलकर श्रीधन्या को 40,000 रुपये दिए ताकि वह एक आईएएस अधिकारी बनने के अपने सपने की ओर एक कदम और आगे बढ़ सकें. उनका यह फ़ैसला सही साबित हुआ, जब श्रीधन्या ने इंटरव्यू में सफलता प्राप्त की और केरल की पहली आदिवासी महिला आईएएस अधिकारी बन गईं.

आईएएस अधिकारी बनने के बाद श्रीधन्या ने कहा था, “मैं राज्य के सबसे पिछड़े जिले से हूं. यहां से कोई आदिवासी आईएएस अधिकारी नहीं बना है, हालांकि ज़िले में काफी बड़ी आदिवासी आबादी है. मुझे उम्मीद है कि मेरी यह कामयाबी आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा होगी.”

श्रीधन्या सुरेश फ़िलहाल कोझीकोड ज़िले की एसिस्टेंट कलेक्टर हैं.

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