‘मामा’ मुख्यमंत्री पहुँचे आदिवासी विवाह समारोह में, हर मोड़ पर साथ देने का वादा किया

सीएम शिवराज ने कहा कि कन्या विवाह योजना को अब और अधिक उपयोगी बनाने के लिए राशि बढ़ाकर 55 हज़ार कर दी गई है. इससे विवाह के आयोजन से लेकर गृहस्थी की जरूरत का लगभग पूरा सामान नवजोड़े को दिया जा सके.

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मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के गांव पिपलानी में मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के तहत सामूहिक विवाह समारोह का आयोजन किया गया. इस समारोह में 310 गोंड एवं 101 कोरकू समाज के जोड़ों की शादी हुई. इस समारोह की ख़ास बात यह रही कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी आयोजन में पहुंचे. 

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री चौहान ने 10 लड़कियों को उपहार में  11 हज़ार रुपये का चेक भेट किया. इसके अलावा उन्होंने नव दंपतियों को प्रदेश सरकार की ओर से 32 इंच का एलईडी टीवी, एक टेबल फेन, 51 बर्तन, पलंग-बिस्तर, दुल्हन के कपड़े,  शृंगार का सामान और चांदी के आभूषण सामान दिए गए.  

कार्यक्रम में पूरे प्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों से जनप्रतिनिधियों ने शिरकत की. समारोह का आयोजन करने वालों ने दावा किया है कि कार्यक्रम में 50 हज़ार से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया.  

मुख्यमंत्री चौहान ने स्थानीय जन प्रतिनिधियों को अपना स्वागत करने से रोक दिया. मुख्यमंत्री का कहना था कि वो इस समारोह में मेहमान नहीं मेज़बान हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि बेटियों की शादी में खुद का स्वागत नहीं करवाया जाता है. 

उन्होंने कहा कि मैं तो वर-वधू अपने बेटे बेटियों का स्वागत करने आया हूं. मुख्यमंत्री चौहान ने सामूहिक विवाह कार्यक्रम में फूल बरसा कर नवदंपतियों का स्वागत किया. 

मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजातीय समूहों के बेटे-बेटियों के विवाह के साथ ही उच्च शिक्षा का खर्च आवास, राशन, स्वास्थ्य सहित जिन्दगी की हर मोड़ पर मामा साथ देंगे. 

सीएम शिवराज ने कहा कि कन्या विवाह योजना को अब और अधिक उपयोगी बनाने के लिए राशि बढ़ाकर 55 हज़ार कर दी गई है. इससे विवाह के आयोजन से लेकर गृहस्थी की जरूरत का लगभग पूरा सामान नवजोड़े को दिया जा सके. 

वधू के खाते में 11 हज़ार रुपये की राशि भी डाली जाती है ताकि कोई जरूरत की चीज़ छूट भी गई हो तो ली जा सके. मुख्यमंत्री ने बेटियों को प्यार और सम्मान से रखने के लिए दूल्हों से आग्रह भी किया. 

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि जनजातीय समाज को और अधिक सशक्त बनाने के लिए वनों पर अधिकार बढ़ाए जाएंगे.  इसके साथ ही अन्य योजनाओं के माध्यम से चौतरफा विकास किया जाएगा. उन्होंने कहा कि इमारती लड़की के विक्रय पर 20 प्रतिशत राशि स्थानीय वन समितियों को मिलेगी. 

तेंदुपत्ता की प्रति 100 गड्डी संग्रहण की राशि 250 रुपये से बढ़ाकर 300 रुपये की गई है. जनजातियों के हित में पेसा एक्ट लागू करने का निर्णय लिया गया है. सामाजिक वन प्रबंधन का कार्य जनजातीय समूहों को दिया जाएगा. 

मंडला सांसद संपतिया उइके के पारसी भाषा में संबोधन से प्रभावित होकर मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि जनजातीय भाषा एवं संस्कृति के संरक्षण के लिए सरकार सभी प्रयास करेगी. उन्होंने कहा कि अपनी भाषा एवं संस्कृति को कभी न छोड़ें यह एक सम्मान की बात है.  

सामूहिक विवाह सम्मलेन में बैतूल तथा महाराष्ट्र से आए सांस्कृतिक दल की आकर्षक नृत्य प्रस्तुति ने उपस्थित जनसमूहों का मन मोह लिया. सीएम ने दोनों सांस्कृतिक दलों को 25-25 हज़ार रुपये देने की घोषणा की. 

इसके अलावा मंडला संसद संपतिया उइके ने भी सांस्कृतिक दलों को 10 हज़ार रुपये देने की घोषणा की. मुख्यमंत्री चौहान ने कक्षा 10वीं और 12वीं में प्रथम श्रेणी प्राप्त 49 जनजातीय छात्र-छात्राओ को प्रशस्ति पत्र एवं ट्रॉफी प्रदान की जिनमें मेरिट लिस्ट के छह विद्यार्थी भी शामिल हैं.  

वैसे इस साल कक्षा दस के परीक्षा परिणामों में आदिवासी छात्र बड़ी संख्या में फेल हुए हैं. इसका कारण कोरोना काल में उनकी पढ़ाई ठप्प होना बताया जा रहा है.

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज चौहान लगातार आदिवासी इलाक़ों का दौरा कर रह हैं. इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के भी बड़े कार्यक्रम आयोजि किए गए हैं.

मध्य प्रदेश में अब चुनाव को बस एक साल बचा है. पिछले विधानसभा चुनाव में बीजेपी के हाथ से सत्ता फिसल गई थी. इसका एक बड़ा कारण था कि बीजेपी को आदिवासी क्षेत्रों में आशा के अनुसार सफलता नहीं मिली थी.

इस बार बीजेपी इस मामले में पहले से ही सावधान नज़र आ रही है. इसलिए राज्य सरकार ने आदिवासियों के लिए एक के बाद एक कार्यक्रम आयोजित किए हैं. इसके अलाव आदिवासी कल्याण से जुड़ी कई बड़ी घोषणाएँ भी की गई हैं.

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