झारखंड में आदिवासी विधान सभा कमेटी को ज़मीन की अवैध ख़रीदी की सीधी शिकायत कर पाएँगे

सीएनटी-एसपीटी एक्ट के प्रावधानों के उल्लंघन की शिकायत करने वाले लोगों को अपनी शिकायत के साथ साक्ष्य भी देने ज़रूरी होंगे. आदिवासी जमीन के अवैध हस्तांतरण की शिकायतों की जांच के लिए विधानसभा द्वारा गठित विशेष कमेटी एक आम सूचना जारी करेगी.

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झारखंड में आदिवासी जमीन की अवैध खरीद-बिक्री की शिकायत विधानसभा की विशेष कमेटी सुनेगी़. जिन लोगों की ज़मीन की अवैध ख़रीद या बिक्री हुई है वो लोग अपनी ज़मीन के दस्तावेज  इस कमेटी के सामने रख सकते हैं. इसके साथ ही परेशान लोग अपनी शिकायत साक्ष्यों के साथ सीधे कमेटी को भेज सकेंगे. 

सीएनटी-एसपीटी एक्ट के प्रावधानों के उल्लंघन की शिकायत करने वाले लोगों को अपनी शिकायत के साथ साक्ष्य भी देने ज़रूरी होंगे. आदिवासी जमीन के अवैध हस्तांतरण की शिकायतों की जांच के लिए विधानसभा द्वारा गठित विशेष कमेटी एक आम सूचना जारी करेगी. 

वरिष्ठ आदिवासी नेता और विधायक स्टीफन मरांडी को इस विशेष कमेटी का संयोजक बनाया गया है़. 

सोमवार को कमेटी की पहली बैठक हुई, जिसमें तय किया गया कि यह मामला गंभीर और संवेदनशील है. लोगों को न्याय मिले, इस दिशा में कमेटी काम करेगी. आम सूचना प्रकाशित करने से लोगों को अपनी बात सीधे पहुंचाने में सहूलियत होगी.

कमेटी की अगली बैठक में आम सूचना और जांच प्रक्रिया को आगे बढ़ाने पर चर्चा होगी. इस संबंध में संयोजक स्टीफन मरांडी ने कहा कि मामला बड़ा है और इसकी जांच में समय लगेगा़ कमेटी की पहली बैठक थी. यह गंभीर व संवेदनशील मामला है. सबको न्याय मिले, इसके लिए पूरी प्रक्रिया का पालन किया जायेगा़

विधानसभा के मॉनसून सत्र में विशेष कमेटी गठित की गयी थी. कमेटी को 45 दिनों में रिपोर्ट देनी थी़, लेकिन कमेटी के संयोजक श्री मरांडी सहित सदस्यों का मानना था कि इतने कम दिनों में इस बड़े मामले को लेकर जांच पूरी नहीं हो सकती है. 

कमेटी के आग्रह को विधानसभा अध्यक्ष रबींद्रनाथ महतो ने स्वीकार कर लिया है. फिलहाल कमेटी का कार्यकाल 31 दिसंबर तक बढ़ा दिया गया है़

आदिवासी जमीन के हस्तांतरण को लेकर बनी विधानसभा की विशेष कमेटी की यह पहली बैठक थी. कमेटी की बैठक की सूचना कई लोगों तक पहुंच गयी थी. 

पहले ही दिन आदिवासी जमीन की अवैध खरीद-बिक्री को लेकर 20 से ज्यादा आवेदन कमेटी के पास पहुंच गये. राज्य के विभिन्न हिस्सों से पीड़ित आदिवासी परिवार पहुंचे थे. लातेहार, पिपरवार, नगड़ी और राजधानी रांची के विभिन्न हिस्से से लोग आवेदन के साथ पहुँचें.

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